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ISRO: अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी उद्योग की साझेदारी, इसरो ने निजी फर्म को सैटेलाइट बस तकनीक ट्रांसफर की
Sat, 05 Aug 2023 03:36 PM IST
देव कश्यप
पीटीआई, बेंगलुरु।
पीटीआई, बेंगलुरु।
Published by: देव कश्यप
Updated Sat, 05 Aug 2023 03:36 PM IST
सार
प्रौद्योगिकी हस्तांतरण दस्तावेज औपचारिक रूप से एनएसआईएल के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक डी राधाकृष्णन द्वारा अल्फा डिजाइन टेक्नोलॉजीज लिमिटेड (एडीटीएल) के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक कर्नल एचएस शंकर (सेवानिवृत्त) को सौंपे गए।
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हस्तांतरण के समझौते पर एनएसआईएल मुख्यालय में किए गए हस्ताक्षर।
- फोटो : ISRO
विस्तार
इसरो ने शनिवार को कहा कि उसने आईएमएस-1 सैटेलाइट बस टेक्नोलॉजी (IMS-1 Satellite Bus Technology) को अल्फा डिजाइन टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड को हस्तांतरित कर दिया है। यह देश के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी उद्योग की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक कदम है। अंतरिक्ष एजेंसी ने अपनी वेबसाइट पर कहा कि इसरो की वाणिज्यिक शाखा न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (एनएसआईएल) ने दो अगस्त (बुधवार) को एनएसआईएल मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान हस्ताक्षरित एक समझौते के माध्यम से प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की सुविधा प्रदान की।
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प्रौद्योगिकी हस्तांतरण दस्तावेज औपचारिक रूप से एनएसआईएल के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक डी राधाकृष्णन द्वारा अल्फा डिजाइन टेक्नोलॉजीज लिमिटेड (एडीटीएल) के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक कर्नल एचएस शंकर (सेवानिवृत्त) को सौंपे गए। एडीटीएल उन दो निजी फर्मों में से एक है जिन्हें एनएसआईएल द्वारा प्रकाशित इंटरेस्ट एक्सप्लोरेटरी नोट (आईईएन) के माध्यम से इस तकनीक का हस्तांतरण प्राप्त करने के लिए चुना गया है।
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यह स्थानांतरण इसरो द्वारा विकसित उपग्रह बस प्रौद्योगिकियों को निजी उद्योगों को हस्तांतरित करने की शुरुआत का प्रतीक है। इसके अलावा, पीएसएलवी (PSLV) का उत्पादन उद्योगों के एक सहायता संघ (Consortium) द्वारा किया जा रहा है। इसरो निजी कंपनियों को सुविधा प्रदान करके और विशेषज्ञता का विस्तार करके अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों को विकसित करने में सक्षम बना रहा है और इस प्रकार आउट-बाउंड और इन-बाउंड दोनों दृष्टिकोण सुनिश्चित कर रहा है।
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क्या है सैटेलाइट बस टेक्नोलॉजी?
इसरो के यू आर राव सैटेलाइट सेंटर (यूआरएससी) द्वारा विकसित सैटेलाइट बस एक बहुमुखी और कुशल छोटा सैटेलाइट प्लेटफॉर्म है जिसे अंतरिक्ष तक कम लागत में पहुंच की सुविधा के लिए डिजाइन किया गया है। बस विभिन्न पेलोड के लिए एक समर्पित वाहन के रूप में कार्य करती है, जो उपग्रह प्रक्षेपण के लिए त्वरित समय सुनिश्चित करते हुए पृथ्वी की इमेजिंग, महासागर और वायुमंडलीय अध्ययन, माइक्रोवेव रिमोट सेंसिंग और अंतरिक्ष विज्ञान मिशन को सक्षम बनाती है।
इसरो ने एक बयान में कहा कि लगभग 100 किलोग्राम वजनी आईएमएस-1 बस में 30 किलोग्राम पेलोड होता है। सौर सारणियां 30-42 वोल्ट के कच्चे बस वोल्टेज के साथ 330 वाट बिजली उत्पन्न करती हैं। यह एक न्यूटन थ्रस्टर के साथ चार प्रतिक्रिया पहियों के साथ तीन-अक्ष स्थिर प्रदान करता है जो +/- 0.1 डिग्री पॉइंटिंग की सटीकता प्रदान करता है। बयान में कहा गया है कि यह आईएमएस-2 बस तकनीक का अग्रदूत है, जो बेहतर सुविधाओं में सक्षम है और आईएमएस-1 बस का उपयोग आईएमएस-1, यूथसैट और माइक्रोसैट-2डी जैसे पिछले इसरो मिशनों में किया गया है।
आईएमएस-1 तकनीक को निजी क्षेत्र में स्थानांतरित करके इसरो या अंतरिक्ष विभाग का लक्ष्य अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत के औद्योगिक विकास और तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है। बयान में आगे कहा गया है कि यह विकास वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में अपनी उपस्थिति का विस्तार करने के भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप निजी कंपनियों के लिए अंतरिक्ष अनुसंधान और अन्वेषण में योगदान करने के लिए नए रास्ते खोलता है।
अल्फा डिजाइन टेक्नोलॉजीज प्रा. लिमिटेड एक एयरोस्पेस और रक्षा कंपनी है। इस कंपनी के पास इंजीनियरिंग, विनिर्माण और सिस्टम एकीकरण में विशेषज्ञता है। यह रक्षा, अंतरिक्ष और देश की सुरक्षा से संबंधित विभिन्न परियोजनाओं में एक प्रमुख खिलाड़ी रहा है और इन क्षेत्रों में भारत की तकनीकी प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।