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अपनी कक्षा में पहुंचा GSAT- 6A, सुधरेगी मोबाइल कम्युनिकेशन की हालत

Thu, 29 Mar 2018 09:40 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 29 Mar 2018 09:40 PM IST
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ISRO launches GSAT-6A satellite, Mobile Communication will benefit
आबादी से दूर-दराज के इलाकों में देश की सीमाओं की रक्षा में लगी भारतीय सैनिकों और उनके अधिकारियों के बीच अब कम्युनिकेशन की समस्या नहीं होगी। साथ ही आम आदमी को भी मोबाइल कम्युनिकेशन में थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने बृहस्पतिवार को जियोसिंक्रोनस रॉकेट जीएसएलवी-एफ08 की मदद से कम्युनिकेशन सेटेलाइट जीसेट-6ए को सफलतापूर्वक उसकी कक्षा में स्थापित किया। इसरो का दावा है कि 10 साल तक काम करने वाले इस सेटेलाइट से मल्टी बीम कवरेज के जरिए कम्युनिकेशन सुधारने में मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट के जरिए इसरो को बधाई दी और लिखा कि ये मोबाइल क्षेत्र में नई राह खोलेगा।
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ISRO ने श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से किया लांच

यहां सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से 27 घंटे के काउंटडाउन के बाद स्वेदश निर्मित थर्ड स्टेज वाले क्रायोजेनिक इंजन के साथ अपनी छठी व कुल 12वीं फ्लाइट लेकर उड़े जीएसएलवी-एफ08 को सेटेलाइट के साथ शाम 4.56 बजे लांच किया गया। लांच के 18वें मिनट में अपनी कक्षा में पहुंच गया। जनवरी में कार्यभार संभालने के बाद इसरो के चेयरमैन के. सिवान का ये पहला प्रोजेक्ट था। उन्होंने ही सेटेलाइट के अपनी कक्षा में स्थापित हो जाने की घोषणा की। ये सेटेलाइट वर्ष 2015 में लांच किए गए जीसेट-6 के साथ मिलकर एडवांस तकनीक के विकास के लिए प्लेटफार्म साबित होगा।
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सेना के लिए ऐसे फायदा

एस बैंड पर काम करने वाले जीसेट-6ए को घोषित तौर पर सैन्य कम्युनिकेशन के लिए होने का दावा नहीं किया गया है, लेकिन इसरो सूत्रों ने बताया कि इसमें सैन्य उपयोग के लिए ट्रांसपोंडर लगे हैं, जिससे सेना को मोबाइल की पहुंच से दूर वाले क्षेत्रों में भी आसानी से अपनी पेट्रोल टीमों से संपर्क बनाकर मिशन चलाने में मदद मिलेगी। साथ ही ये नेटवर्क मैनेजमेंट तकनीकों, 6 मीटर खुलने वाले एस-बैंड एंटीना जैसी विकासशील तकनीक को भी दिखाएगा।
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चंद्र मिशन के लिए भी उपयोगी

इस सेटेलाइट को लांच करते समय इसरो ने अपने अक्टूबर में लांच होने वाले चंद्रयान-2 के लिए भी कुछ प्रयोग किए। तीन स्टेज वाले सेटेलाइट लांच व्हीकल जीएसएलवी-एफ08 की दूसरी स्टेज में स्वेदश निर्मित क्रायोजेनिक विकास इंजन का इस्तेमाल किया गया, जो चंद्रयान-2 में भी लगेगा। साथ ही इलेक्ट्रो हाइड्रोकिल एक्चुएशन सिस्टम के बजाय इलेक्ट्रो कैमिकल ऑटोमेशन तकनीक इस्तेमाल की गई।
 
एक नजर में

2140 किग्रा की जीसेट-6ए सेटेलाइट की उम्र है 10 साल
270 करोड़ रुपये में किया गया है इस सेटेलाइट का निर्माण
49.1 मीटर लंबा व 415.6 टन के जीएसएलवी-एफ08 से किया लांच
36 हजार किलोमीटर की ऊंचाई पर किया गया है स्थापित

अंतरिक्ष-देवास डील से आया था चर्चा में

जीसेट-6ए सेटेलाइट पहले ही इसरो की कॉमर्शियल विंग अंतरिक्ष और बंगलूरू की फर्म देवास के बीच 28 जनवरी, 2005 को हुए अनुबंध के बाद चर्चा में आया था। इस अनुबंध में अंतरिक्ष को जीसेट-6 व 6ए के 90 प्रतिशत ट्रांसपोंडर देवास की डिजिटल मल्टीमीडिया सर्विस के लिए 70 मेगाहर्ट्ज की अनूठी एस-बैंड वेवलैंग्थ पर लीज पर देने थे। बदले में देवास को 12 साल में अंतरिक्षक को करीब 19.53 अरब रुपये चुकाने थे। वर्ष 2011 में इस अनुबंध में गड़बड़ी मिलने पर इसे रद्द कर दिया गया था। देवास के इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल में जाने पर वर्ष 2015 में उसे करीब 43.76 अरब रुपये का मुआवजा देने के आदेश अंतरिक्ष को दिए गए थे।
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