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एटीएस का दावा हिंदुस्तान में हैं आईएस संदिग्धों के आका
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 01 Mar 2017 08:44 AM IST
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गुजरात एटीएस ने कहा है कि भारत में आतंक फैलाने आए आईएस से जुड़े दोनों संदिग्धों का हैंडलर भारत का ही हो सकता है। एटीएस का कहना है कि दोनों भाई अज्ञात
हैंडलर से हिंदी में निर्देश ले रहे थे, इसलिए इसकी प्रबल संभावना है कि उनके आका हिंदुस्तान में ही हैं। टेलीफोन संदेश से यह पता चला है कि वसीम को हैंडलर बार-बार
बड़े हमले और काफिरों की हत्या के लिए उकसाता रहता था।
बड़ी आतंकी साजिश को नाकाम करते हुए वसीम और नईम को राजकोट और भावनगर से रविवार को सुबह-सुबह गिरफ्तार किया गया था। एटीएस ने खुलासा किया है कि
दोनों अकेले दम पर कहर बरपाने के बाद सीरिया भागने की योजना बना रहे थे। दोनों के खिलाफ दर्ज एफआईआर के मुताबिक उनकी कॉल डिटेल से इस बात का पता चला
है कि मुफती अब्दुस समी कासमी (आईएस का विवादित उपदेशक) द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला मोबाइल वसीम रामोदिया के नाम और नेहरू नगर, स्ट्रीट 2, रैया रोड,
राजकोट, गुजरात के पते पर दर्ज है।
मुफ्ती कासमी को एनआईए ने फरवरी 2016 में गिरफ्तार किया था। उस पर आरोप है कि वह भारत में आईएस के लिए काम करता है। वसीम के टेक्निकल सर्विलांस से यह
भी खुलासा हुआ है कि वह अपने छोटे भाई नईम के बराबर संपर्क में था और दोनों आईएस की गतिविधियों के बारे में बातचीत करते थे। टेलीफोन पर उनकी आवाज और
टोन का विश्लेषण करने से यह पता चला है कि वे आईएस के विचारों से बेहद प्रभावित थे। एटीएस ने एफआईआर में दोनों भाइयों से उनकी बेगमों से फोन पर बातचीत के
ट्रांस्क्रिप्ट का भी जिक्र किया है।
सर्विलांस से यह भी पता चला है कि वसीम जिस अज्ञात हैंडलर से निर्देश प्राप्त करता था वह ऑनलाइन प्रोफाइल पर ‘बिग कैट’ के नाम से दर्ज है। वसीम निंजा फॉक्स के
नाम से फर्जी आईडी बना रखी थी। दोनों में संदेशों का आदान-प्रदान हिंदी में होता था जिससे एटीएस को संदेह है कि हैंडलर दक्षिण एशियाई था और संभवत: भारतीय था।
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एफआईआर के मुताबिक टेलीफोन संदेश से यह पता चला है कि वसीम को हैंडलर बार-बार बड़े हमले और काफिरों की हत्या के लिए उकसाता रहता था।
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हैंडलर से हिंदी में निर्देश ले रहे थे, इसलिए इसकी प्रबल संभावना है कि उनके आका हिंदुस्तान में ही हैं। टेलीफोन संदेश से यह पता चला है कि वसीम को हैंडलर बार-बार
बड़े हमले और काफिरों की हत्या के लिए उकसाता रहता था।
बड़ी आतंकी साजिश को नाकाम करते हुए वसीम और नईम को राजकोट और भावनगर से रविवार को सुबह-सुबह गिरफ्तार किया गया था। एटीएस ने खुलासा किया है कि
दोनों अकेले दम पर कहर बरपाने के बाद सीरिया भागने की योजना बना रहे थे। दोनों के खिलाफ दर्ज एफआईआर के मुताबिक उनकी कॉल डिटेल से इस बात का पता चला
है कि मुफती अब्दुस समी कासमी (आईएस का विवादित उपदेशक) द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला मोबाइल वसीम रामोदिया के नाम और नेहरू नगर, स्ट्रीट 2, रैया रोड,
राजकोट, गुजरात के पते पर दर्ज है।
मुफ्ती कासमी को एनआईए ने फरवरी 2016 में गिरफ्तार किया था। उस पर आरोप है कि वह भारत में आईएस के लिए काम करता है। वसीम के टेक्निकल सर्विलांस से यह
भी खुलासा हुआ है कि वह अपने छोटे भाई नईम के बराबर संपर्क में था और दोनों आईएस की गतिविधियों के बारे में बातचीत करते थे। टेलीफोन पर उनकी आवाज और
टोन का विश्लेषण करने से यह पता चला है कि वे आईएस के विचारों से बेहद प्रभावित थे। एटीएस ने एफआईआर में दोनों भाइयों से उनकी बेगमों से फोन पर बातचीत के
ट्रांस्क्रिप्ट का भी जिक्र किया है।
सर्विलांस से यह भी पता चला है कि वसीम जिस अज्ञात हैंडलर से निर्देश प्राप्त करता था वह ऑनलाइन प्रोफाइल पर ‘बिग कैट’ के नाम से दर्ज है। वसीम निंजा फॉक्स के
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नाम से फर्जी आईडी बना रखी थी। दोनों में संदेशों का आदान-प्रदान हिंदी में होता था जिससे एटीएस को संदेह है कि हैंडलर दक्षिण एशियाई था और संभवत: भारतीय था।
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एफआईआर के मुताबिक टेलीफोन संदेश से यह पता चला है कि वसीम को हैंडलर बार-बार बड़े हमले और काफिरों की हत्या के लिए उकसाता रहता था।
एटीएस ने लिया गिरफ्तार आईएस संदिग्धों के परिजनों का बयान
गुजरात एटीएस ने मंगलवार को आईएस से जुड़े दोनों संदिग्धों के परिजनों का बयान दर्ज कर लिया। वसीम रामोदिया और उसके भाई नईम को रविवार को गिरफ्तार किया गया था। एटीएस के डीएसपी रमेश फल्दू ने कहा कि हमने वसीम की पत्नी शाजीन और उसके माता पिता से मंगलवार को पूछताछ की और
उनका बयान दर्ज किया। हालांकि डीएसपी ने पूछताछ का ब्योरा नहीं दिया।
अधिकारियों ने कहा कि सोमवार शाम को एटीएस अधिकारी रामोदिया बंधुओं को राजकोट के नजदीक उस धार्मिक स्थल पर ले गए, जिसको दोनों विस्फोट से उड़ाने की
साजिश रच रहे थे। इसके साथ ही दोनों को शहर के कई स्थानों पर ले जाया गया। उस पटाखे की दुकान पर भी उन्हें ले जाया गया जहां से दोनों ने बारूद खरीदा था।
उधर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की टीम एटीएस के साथ संयुक्त जांच के लिए मंगलवार को अहमदाबाद पहुंच गई। वहीं एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड ने मंगलवार शाम को वसीम
और नईम को लेकर अहमदाबाद पहुंची।
एटीएस और पुलिस के सहायक आयुक्त बीएच चावड़ा ने इस बात की पुष्टि की कि एनआईए की टीम यहां पहुंच चुकी है। ये एटीएस के
साथ मिलकर आईएस के दोनों संदिग्धों से संयुक्त पूछताछ करेगी। गौरतलब है कि सोमवार को एक कोर्ट ने दोनों को 12 दिन की रिमांड पर एटीएस को सौंप दिया था।
उनका बयान दर्ज किया। हालांकि डीएसपी ने पूछताछ का ब्योरा नहीं दिया।
अधिकारियों ने कहा कि सोमवार शाम को एटीएस अधिकारी रामोदिया बंधुओं को राजकोट के नजदीक उस धार्मिक स्थल पर ले गए, जिसको दोनों विस्फोट से उड़ाने की
साजिश रच रहे थे। इसके साथ ही दोनों को शहर के कई स्थानों पर ले जाया गया। उस पटाखे की दुकान पर भी उन्हें ले जाया गया जहां से दोनों ने बारूद खरीदा था।
उधर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की टीम एटीएस के साथ संयुक्त जांच के लिए मंगलवार को अहमदाबाद पहुंच गई। वहीं एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड ने मंगलवार शाम को वसीम
और नईम को लेकर अहमदाबाद पहुंची।
एटीएस और पुलिस के सहायक आयुक्त बीएच चावड़ा ने इस बात की पुष्टि की कि एनआईए की टीम यहां पहुंच चुकी है। ये एटीएस के
साथ मिलकर आईएस के दोनों संदिग्धों से संयुक्त पूछताछ करेगी। गौरतलब है कि सोमवार को एक कोर्ट ने दोनों को 12 दिन की रिमांड पर एटीएस को सौंप दिया था।