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इरोम शर्मिला ने 16 साल बाद तोड़ा अनशन, अब सीएम बनने की ख्वाहिश

Tue, 09 Aug 2016 07:33 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 09 Aug 2016 07:33 PM IST
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Irom sharmila will finish her hunger strike today
- फोटो : bbc

 

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मानवाधिकार कार्यकर्ता इरोम शर्मिला ने मंगलवार को 16 साल बाद अनशन तोड़ दिया। उन्होंने शहद चखकर अनशन तोड़ा। इस मौके पर वह बेहद भावुक हो गईं और रोने लगीं। अनशन तोड़ने के बाद उन्होंने कहा कि वह मणिपुर की सीएम बनकर लोगों की सेवा करना चाहती हैं। 42 साल की इरोम ने वर्ष 2000 में सशस्‍त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम के खिलाफ अनशन शुरू किया था। 5 नवंबर सन 2000 वो आखिरी दिन था जब इरोम ने खाने का स्वाद चखा था। इंफाल के मालोम गांव में 10 लोगों के मारे जाने के बाद इरोम ने तब तक खाना न खाने की कसम खाई थी जब तक कि ये कानून खत्म नहीं कर दिया जाता। इरोम ने अभी अपने परिवार तक से अपने फैसले के बारे में बात नहीं की है। मानवाधिकार कार्यकर्ता बबूल लोइटोंगबम उन चंद लोगों में से हैं जो अस्पताल में नजरबंद शर्मिला से उनके नए फैसले के बारे में उनसे थोड़ी बहुत बात कर पाए।

वो बताते हैं, "इरोम को सुबह अस्पताल से 15 मिनट के लिए बाहर आने देते हैं ताकि उन्हें धूप मिल सके। उसी 15 मिनट में कुछ दिन पहले मैं भी अस्पताल पहुंचा, इरोम ने बताया कि वो चाहती तो उसी दिन भूख हड़ताल खत्म कर सकती थीं।"

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अस्पताल में भर्ती शर्मिला को 15 मिनट के लिए नसीब होती थी धूप

Irom sharmila will finish her hunger strike today

"लेकिन वो सबको समय देना चाहती थीं ताकि जान सकें कि लोग उनके फैसले पर क्या राय देते हैं। तभी गार्ड ने कहा 15 मिनट का समय खत्म हुआ।" बबलू ने बताया, "इरोम ने जाते-जाते भावुक होकर बस इतना कहा कि देखो यही मेरा अस्तित्व है, एक क़ैदी का। तुम लोग समझ सकते होगे कि मैं कैसे जी रही हूं।"

पिछले 16 सालों से इरोम को हर 15 दिन पर इंफाल अस्पताल के जेल वार्ड से कोर्ट ले जाया जाता है, जज उनसे पूछते हैं: क्या वो भूख हड़ताल तोड़ंगी? हर बार उनका जवाब होता था नहीं, लेकिन आज ऐसा नहीं होगा। जज को जवाब देने के बाद वो अपनी भूख हड़ताल तोड़ने का इरादा रखती हैं।

हालांकि उनकी लड़ाई में बरसों से उनका साथ दे रही मोमोन लाइमा जैसी महिलाएं इरोम के फैसले से खफा हैं। वो कहती हैं, "इरोम शर्मिला ने हमसे एक बार भी बात नहीं की भूख हड़ताल तोड़ने का फैसला करने से पहले। ये दुर्भाग्यपूर्ण है, मणिपुर के लिए, हमारे लिए। हम तो उनकी मां की तरह हैं। हमने बरसों से उसका साथ दिया। वो बहुत असाधारण हैं लेकिन अचानक ये फैसला क्यों?"

मणिपुर यूनिवर्सिटी की छात्राओं ने किया याद

Irom sharmila will finish her hunger strike today

शहर में मीडियावालों, कार्यकर्ताओं की भीड़ है पर फिर भी एक अजीब सा सन्नाटा है। इसी सन्नाटे में इरोम के लिए आवाज़ें भी सुनाई दे जाती हैं। मणिपुर विश्वविद्वालय की कुछ छात्राओं ने अपनी बात रखते हुए कहा, 16 साल बहुत लंबा वक़्त होता है।

"आख़िर इरोम की भी कुछ ख्वाहिशें होंगी, हमें एक दिन अच्छा खाना न मिले तो हम शिकायत करने लगती हैं। इरोम क्यों न चुनाव लड़े, क्यों न शादी करें?" ख़ैर आज का दिन इरोम के लिए बड़ा बदलाव लेकर आएगा। हमेशा उनके नाक से लगी रहने वाली नली की अब उनको शायद ज़रूरत नहीं होगी। जब भी वो रिहा होंगी तो धूप लेने के लिए उन्हें अस्पताल से मोहलत में मिले 15 मिनटों का इंतजार नहीं करना होगा। वो अपनों से कोर्ट के साये से परे मिल सकेंगी।

इन अपनों में उनकी मां शामिल होंगी या नहीं ये किसी को मालूम नहीं। इरोम की मां ने अफ़्सपा खत्म न होने तक बेटी से न मिलने की कसम जो खाई हुई है।

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