ईरान ने ट्रंप का बिना शर्त वार्ता का प्रस्ताव ठुकराया
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी से बिना शर्त मुलाकात के प्रस्ताव को ईरानी नेताओं व सैन्य कमांडरों ने ठुकरा दिया है। उन्होंने ट्रंप की कथनी और करनी में अंतर का आरोप लगाते हुए इस संभावित मुलाकात को सपना बताया और कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति का 2015 में हुआ परमाणु समझौता तोड़ना गैर कानूनी फैसला रहा है।
ईरान के विदेश मंत्री जावेद जरीफ ने ट्वीट किया कि तेहरान से बातचीत खत्म करने के लिए अमेरिका खुद जिम्मेदार है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड (सेना) के प्रमुख ने भी इस प्रस्ताव को ठुकराते हुए कहा कि हम उत्तर कोरिया नहीं हैं जो ट्रंप का प्रस्ताव स्वीकार कर लें।
उन्होंने यह तक कह डाला कि ट्रंप के बाद के अमेरिकी राष्ट्रपतियों को भी मुलाकात का दिन देखना नसीब नहीं होगा। ईरान रणनीतिक परिषद के मुखिया कमाल खराजी ने अमेरिका द्वारा वादा तोड़ने पर कहा कि उसके साथ वार्ता का कोई मतलब नहीं है।
नए सिरे से वार्ता के लिए ईरान पर दबाव डालने वाले ट्रंप के इस कदम ने देश में कट्टरपंथियों और उदारवादियों को एकजुट कर दिया है। ईरानी संसद के डिप्टी स्पीकर अली मोटाहारी ने कहा कि अब अमेरिका से बातचीत करना अपना मजाक बनवाने जैसा होगा। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका ने खुद को परमाणु समझौते से बाहर नहीं किया होता तो वार्ता की संभावनाएं बनी रह सकती थीं।
ईरान नहीं छोड़ेगा तेल निर्यात का अधिकार : रूहानी
मंगलवार को जिस वक्त ट्रंप ने ईरान से बिना शर्त बातचीत का प्रस्ताव रखा उसी वक्त ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ब्रिटिश राजदूत से मुलाकात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ईरान नहीं चाहता है कि क्षेत्र में तनाव हो लेकिन हम अपने तेल निर्यात करने के अधिकार को आसानी से छोड़ने वाले नहीं हैं। उन्होंने कुछ वरिष्ठ अधिकारियों से यह तक कहा है कि यदि अमेरिका हमारा तेल निर्यात रोकने की कोशिश करेगा तो हम होर्मुज जलसंधि (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) से दूसरे देशों के तेल जहाजों पर भी रोक लगा सकते हैं।