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Hindi News ›   India News ›   Inside Bengal Polls: IPS Duo Dominates Headlines, Keeps Violence in Check

Bengal Election Results: बंगाल चुनाव में सुर्खियों में बनी रही ये IPS जोड़ी, बाहर नहीं निकल सके 'उपद्रवी'

Mon, 04 May 2026 09:49 PM IST
Jitendra Bhardwaj Jitendra Bhardwaj
Updated Mon, 04 May 2026 09:49 PM IST
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Inside Bengal Polls: IPS Duo Dominates Headlines, Keeps Violence in Check
बंगाल चुनाव - फोटो : अमर उजाला

पश्चिम बंगाल में दो चरणों के शांतिपूर्वक मतदान के बाद सोमवार को नतीजे भी आ गए। चुनाव प्रचार के दौरान 'सीआरपीएफ' के दो शीर्ष आईपीएस अफसरों की जोड़ी ने खूब सुर्खियां बटोरी। हालांकि बाकी केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के अफसर भी बंगाल चुनाव में पहुंचे, लेकिन सीआरपीएफ डीजी जीपी सिंह और एसडीजी वितुल कुमार की जोड़ी, दो सप्ताह से ज्यादा दिन तक वहीं पर रही। दोनों अफसरों ने अपने जवानों और अफसरों के साथ मिलकर वोटरों के लिए भय मुक्त माहौल तैयार किया। कई बार ये जोड़ी सुबह से लेकर देर रात तक विभिन्न बूथों पर तैनात अपने जवानों से चर्चा करती हुई नजर आई। नतीजा, इस बार बंगाल चुनाव में उपद्रवियों ने बाहर निकलने से गुरेज किया। 

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बंगाल में शांतिपूर्ण एवं निष्पक्ष तरीके से चुनाव कराने के लिए पांच केंद्रीय बलों के दो लाख चालीस हजार जवानों को तैनात किया गया था। इनमें सबसे ज्यादा तैनाती सीआरपीएफ की रही है। वोटरों को भय मुक्त माहौल देने के लिए 4000 से ज्यादा क्यूआरटी (क्विक रिस्पांस टीमें) और 300 से ज्यादा बख्तरबंद वाहन भी तैनात किए गए। कोलकाता में मल्टी सीएपीएफ कंट्रोल रूम, राज्य पुलिस कंट्रोल रूम, खुफिया तंत्र और केंद्रीय बलों के अपने इंटेलिजेंस नेटवर्क ने भी सूचनाएं जुटाई। वोटरों को स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव का भरोसा दिलाने के लिए कंट्रोल रूम और क्यूआरटी के मोबाइल नंबर सार्वजनिक किए गए। 
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केंद्रीय बलों के एक अधिकारी के मुताबिक, बंगाल के चुनाव में जितने भी जवान तैनात किए गए, उन्होंने विभिन्न बलों के सदस्य बनकर नहीं, बल्कि 'वन इलेक्शन फोर्स' के तहत चुनावी ड्यूटी की है। हर जवान का एक ही मकसद रहा है कि वह स्वतंत्र, निष्पक्ष और भय मुक्त चुनाव प्रक्रिया सुनिश्चित करे। कोलकाता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में केंद्रीय बल सीआरपीएफ, बीएसएफ, सीआईएसएफ, एसएसबी और आईटीबीपी के महानिदेशक मौजूद रहे थे। बाकी बलों के महानिदेशकों के दौरे बहुत छोटे रहे हैं। वे एक दो दिन के लिए ही बंगाल में ठहरे हैं। दूसरी तरफ सीआरपीएफ डीजी जीपी सिंह और एसडीजी वितुल कुमार, लगातार वहीं पर डेरा डाले रहे। यहां तक कि सीआरपीएफ में सीधे नियुक्त राजपत्रित अधिकारी (डीएजीओ) के 56वें बैच के 46 प्रशिक्षुओं की पासिंग आउट परेड में भी ये दोनों अफसर शिरकत नहीं कर सके। 
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सीआरपीएफ डीजी जीपी सिंह और एसडीजी वितुल कुमार ने ग्राउंड पर रहकर जवानों का हौसला बढ़ाया। जवानों के साथ बातचीत की। हर क्षेत्र की परिस्थिति को समझा। साथ ही दोनों अधिकारियों ने आम जन से भी बातचीत की। उन्होंने लोगों को यह भरोसा दिलाया कि वे बिना किसी भय के मतदान करें। असामाजिक तत्वों को बूथ के निकट नहीं आने दिया जाएगा। ये दोनों अफसर, सीआरपीएफ की मार्क्समैन बुलेटप्रूफ बख्तरबंद वाहनों के साथ बंगाल की सड़कों पर चलते रहे। इससे बंगाल के मतदाताओं में विश्वास पनपा। नतीजा, दोनों चरणों में वोटरों ने रिकॉर्ड मतदान किया। 


मतदान के बाद गिनती होने तक, ये दोनों अफसर, काउंटिंग सेंटरों तक पहुंचे। वहां की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। बीएसएफ डीजी प्रवीण कुमार, एसएसबी डीजी संजय सिंघल, सीआईएसएफ डीजी प्रवीर रंजन और आईटीबीपी डीजी शत्रुजीत कूपर भी बंगाल में पहुंचे थे। इन अधिकारियों ने भी जवानों के साथ आम लोगों से बातचीत की। विभिन्न बलों के फ्लैग मार्च में हिस्सा लिया। सीआरपीएफ आईजी शलभ माथुर को चुनाव में पश्चिम बंगाल स्टेट पुलिस कोऑर्डिनेटर बनाया गया था। 



 

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