{"_id":"5b04df6f4f1c1bd1408b7388","slug":"inmates-killed-their-fellow-prisoner-as-he-refused-to-serve-roohafza-to-group-of-convicts","type":"story","status":"publish","title_hn":"शरबत के लिए जेल में बवाल, कैदी ने साथी की पीट-पीटकर कर दी हत्या","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
शरबत के लिए जेल में बवाल, कैदी ने साथी की पीट-पीटकर कर दी हत्या
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 23 May 2018 10:10 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
तिहाड़ जेल में कुछ कैदियों ने मिलकर पहले तो एक कैदी की पिटाई की जिससे उसकी मौत हो गई। यह लड़ाई उस समय शुरू हुई जब पवन कुमार नाम के शख्स ने आरोपियों के एक समूह को शरबत देने से मना कर दिया। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को निर्देश दिए हैं कि वह तिहाड़ जेल के अंदर बंद विभिन्न कैदियों के साथ होने वाली मारपीट को लेकर जांच करे।
विज्ञापन
साथी कैदी को मारने का आरोपी किशन साल 2013 से हत्या के आरोप में बंद है। उसे इस बात का गुस्सा आया कि कुमार ने जेल के अंदर जारी उसकी सर्वोच्चता को मानने से इंकार कर दिया था और जैसा उसने आदेश दिया उसका पालन नहीं किया गया। कुमार हाल ही में चोरी के इल्जाम में न्यायिक हिरासत के बाद जेल के अंदर पहुंचा था।
विज्ञापन
इस मामले पर डीसीपी रोहिणी के रजनीश गुप्ता ने कहा, 'हमें अंबेडकर अस्पताल से कुमार की मौत की खबर मिली है। छानबीन में पता चला कि अंडर ट्रायल कैदी कुमार को किशन ने सोमवार रात को कुछ लाने के लिए कहा था। जब कुमार ने ऐसा करने से मना कर दिया तो किशन की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। इस मामले पर भारतीय दण्ड संहिता की धारा 302 के तहत किशन के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है।'
विज्ञापन
तिहाड़ जेल के एक प्रवक्ता ने बताया कि यह घटना लगभग सुबह 2.45 बजे की है। आरोपी ने पीड़ित के पेट में घूसे मारे क्योंकि उसने उसके आदेशानुसार रुहअफजा का एक ग्लास लाने से मना कर दिया था। इस परिस्थिति को तुरंत वार्डन ने नियंत्रित कर दिया था। पीड़ित को अस्पताल ले जाया गया जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
कुमार के परिवार का आरोप है कि उसे घेरने के बाद पीटा गया है। पीड़ित के भाई विष्णु ने कहा, 'उसके हाथ, पैरों और गले पर चोट के निशान थे। जिससे लग रहा था कि वह खुद को बचाने की कोशिश कर रहा था। वह पिछले तीन महीनों से जेल में था।' पिछले कुछ समय से केंद्रीय जेल में हिंसा की घटनाएं हुई हैं जिसके बाद हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए आदेश दिया था कि वह चीजों के सही करने के लिए जांच करे।