{"_id":"5b1ae1c04f1c1bb51e8b4de7","slug":"indigenous-version-of-bofors-dhanush-gun-passed-the-final-test","type":"story","status":"publish","title_hn":"बोफोर्स के स्वदेशी वर्जन धनुष तोप ने अंतिम परीक्षण पास किया, दागे 101 गोले","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
बोफोर्स के स्वदेशी वर्जन धनुष तोप ने अंतिम परीक्षण पास किया, दागे 101 गोले
एजेंसी, जबलपुर
Updated Sat, 09 Jun 2018 01:36 AM IST
विज्ञापन
धनुष
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बोफोर्स के स्वदेशी वर्जन धनुष तोप ने पोखरण में अपने अंतिम परीक्षण को पास कर लिया है। इसी के साथ तोप ने भारतीय सेना में शामिल होने का रास्ता भी साफ कर लिया। गन कैरेज फैक्ट्री के सीनियर जनरल मैनेजर एसके सिंह ने शुक्रवार को यह जानकारी साझा की। उनके मुताबिक, अपने अंतिम परीक्षण में छह धनुष तोपों ने 2 से 6 जून के बीच कुल 300 गोले निशाने पर दागे। हर तोप ने बराबर 50-50 गोले दागे। इसी के साथ इसका अंतिम परीक्षण पूरा कर लिया गया। धनुष 155एमएम X 45एमएम की आर्टिलरी गन यानी तोप है और इसे देसी बोफोर्स कहा जाता है।
सिंह ने जानकारी दी कि 7 जून को छह तोपों ने (एक बार और एक लक्ष्य पर) 101 राउंड दागे। उन्होंने आगे बताया कि 2011 से शुरु हुए धनुष के निर्माण का काम 2014 में पूरा हो गया था उसके बाद लगातार 4 सालों से इसका परीक्षण जारी था। हमारी फैक्ट्री द्वारा निर्मित की गई 12 धनुष तोपों में से करीब 4200 राउंड फायर किए गए। परीक्षण में सब कुछ सही पाया गया। इस तोप का ठंडी से ठंडी जगह सिक्किम व लेह और गर्म से गर्म जगह बालासोर, बबीना और पोखरण में परीक्षण किया गया। ठंड, बरसात और गर्मी के अलग-अलग वातावरण मे भी इसकी जांच की गई।
विज्ञापन
सिंह ने जानकारी दी कि 7 जून को छह तोपों ने (एक बार और एक लक्ष्य पर) 101 राउंड दागे। उन्होंने आगे बताया कि 2011 से शुरु हुए धनुष के निर्माण का काम 2014 में पूरा हो गया था उसके बाद लगातार 4 सालों से इसका परीक्षण जारी था। हमारी फैक्ट्री द्वारा निर्मित की गई 12 धनुष तोपों में से करीब 4200 राउंड फायर किए गए। परीक्षण में सब कुछ सही पाया गया। इस तोप का ठंडी से ठंडी जगह सिक्किम व लेह और गर्म से गर्म जगह बालासोर, बबीना और पोखरण में परीक्षण किया गया। ठंड, बरसात और गर्मी के अलग-अलग वातावरण मे भी इसकी जांच की गई।
विज्ञापन