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देश में नौकरी की कमी के कारण समुद्री रास्ते से न्यूजीलैंड जा रहे थे भारतीय, अभी तक लापता है नाव

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली/कोच्चि Updated Sat, 26 Jan 2019 09:02 AM IST
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सार

  • 12 जनवरी को केरल से निकली थी नाव।
  • बीच समुद्र में ही नाव लापता हो गई।
  • नौकरी की तलाश में न्यूजीलैंड जा रहे थे भारतीय।

विस्तार

100-200 भारतीयों को न्यूजीलैंड ले जाने वाली नाव बीच समुद्र में ही लापता हो गई है। ये नाव 12 जनवरी को केरल के मुनामबाम हार्बर से निकली थी। इस नाव का अभी तक कुछ पता नहीं चल पाया है। इन्हीं लोगों में शामिल हैं प्रभु (30) नामक व्यक्ति की पत्नी और आठ साल की बेटी। प्रभु इस वक्त दक्षिण भारतीय पुलिस की कस्टडी में है। ये लोग दिल्ली में रहने वाला 50 लोगों का शरणार्थी समुदाय है। पुलिस और इनके रिश्तेदारों के अनुसार ये लोग अवैध तरीके से नौकरी के लिए न्यूजीलैंड के लिए निकले थे।
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प्रभु की पत्नी और बेटी समुद्र से जा रही नाव के गायब होने के बाद से ही लापता हैं। जिस रास्ते से ये लोग जा रहे थे, वह सबसे छोटा रास्ता माना जाता है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार नाव में गर्भवती महिलाओं समेत कई बच्चे भी शामिल हैं। ये लोग दिल्ली के मंदगीर इलाके में बेरोजगारी के कारण न्यूजीलैंड के लिए निकले थे। प्रभु की मां सुगना का कहना है कि सभी नौकरी और खाने के लिए वहां गए थे। इन्हें वादा किया गया था कि इन्हें न्यूजीलैंड में नौकरी दिलाई जाएगी। ऐसा पहली बार हो रहा है जब भारत से इतने अधिक लोग न्यूजीलैंड गए हों। इससे देश में पसरी बेरजगारी को लेकर गहरी चिंता का पता चलता है।
बेहद लंबा है रास्ता
जो भी प्रवासी न्यूजीलैंड जाते हैं उन्हें 7 हजार मील से भी अधिक का सफर तय करना पड़ता है। ये सफर दुनिया के सबसे बड़े समुद्रों से होकर गुजरता है। इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया के बीच चक्रवाती तूफान आना आम बात है। जो नाव के रास्ते में अकसर आते हैं। केरल की जांच टीम के एक अफसर ने लोगों की संख्या 100 बताई जबकि दूसरे अफसर में ये संख्या 200 बताई।

पुलिस ने 70 बैग बरामद कर लिए हैं, इसके अलावा पुलिस को 20 पहचान से संबंधित दस्तावेज भी मिले हैं, इन्हीं के आधार पर पुलिस प्रभु तक पहुंची थी। इस बात का भी पता नहीं चल पाया है कि वह नाव में क्यों सवार नहीं हुआ। इन बैगों से ड्राइ फ्रूट और कपड़े मिले हैं। इनसे लग रहा है कि ये लोग लंबी यात्रा के लिए निकले थे। 

तमिल समुदाय के बहुत से लोग मंदगीर में रह रहे हैं। ये लोग बहुसंख्यक सिंहली बौद्ध और अल्पसंख्यक तमिलों के बीच हुए गृह युद्ध के कारण श्रीलंका छोड़कर आ गए थे। ये इस वक्त दक्षिण भारत, उत्तर भारत और पूर्वी श्रीलंका में रह रहे हैं। भारतीय संसद से कुछ दूरी पर स्थित इलाके में इस समुदाय के लोग रहते हैं। जिन्हें बेहरोजगारी का सामना करना पड़ रहा है।

यहां के लोग सरकार के प्रति गुस्से में हैं और इनका कहना है कि अगर मौका मिला तो ये भी चले जाएंगे। सेंटर ऑफ मॉनिटेरियन इंडिया इकोनॉमी की रिपोर्ट के अनुसार देश में 11 मिलियन नौकरियां कम हुई हैं। जनगणना के अनुसार करीब 6 लाख लोग ऑस्ट्रेलिया में रहे हैं और एक लाख 55 हजार लोग न्यूजीलैंड में। जिनमें से अधिक संख्या में लोग अवैध तरीके से गए हैं। 
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