पुणे के स्टार्टअप की खोज, भारतीय डॉक्टरों ने ढूंढा कैंसर का चरण पता लगाने का नया तरीका
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पुणे के स्टार्टअप के शोधकर्ताओं ने खून में मौजूद कैंसर सेल के आधार पर कैंसर का चरण पता करने का नया तरीका विकसित किया है। इनोवेशन एंड रिसर्च के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. जयंत खानडारे ने बताया, पहले ट्यूमर के आकार से कैंसर के चरण का आकलन किया जाता था। हमने यह स्थापित किया कि सिर और गले का कैंसर भी अन्य ठोस ट्यूमर की तरह प्रणालीगत तरीके से खून के जरिये फेफड़े, स्तन, गुदा आदि तक पहुंचता है। अभी तक माना जाता था कि सिर और गले का कैंसर अन्य हिस्सों में नहीं फैलता।
खानडारे ने बताया, मुंबई स्थित टाटा मेमोरियल अस्पताल में प्रमुख कैंसर विशेषज्ञ डॉ. पंकज चतुर्वेदी की मदद से इस तरीके का परीक्षण किया गया। हमारे शोध को अमेरिका के एसो. ऑफ कैंसर रिसर्च ने भी मान्यता दी है। अध्ययन के दौरान पाया कि कीमोथेरेपी कराने वाले मरीजों के खून में सीटीसी के स्तर पर इलाज नहीं कराने वाले मरीजों के मुकाबले 22 फीसदी की कमी आई है। जिन मरीजों में कैंसर आखिरी चरण में होता है, उनके खून में सीटीसी का स्तर 35 फीसदी, जबकि शुरुआती चरण में यह 15 फीसदी तक होता है। यह बताता है, सीटीसी का गले व कैंसर के चरण से सीधा संबंध है।
भारत में सबसे अधिक सिर और गले का कैंसर
देश में सबसे अधिक सिर और गले का कैंसर होता है। इनमें से 30 फीसदी से अधिक मामलों के पीछे तंबाकू और शराब का सेवन है। इंटरनेशनल एजेंसी फॉर कैंसर रिसर्च के मुताबिक भारत में हर साल 2.7 लाख नए कैंसर के मामले दर्ज होते हैं और 1.7 लाख लोगों की इस बीमारी से असमय मौत हो जाती है।