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टी-90 युद्धक टैंकों को तीसरी पीढ़ी की मिसाइलों से लैस करेगी सेना
एजेंसी/ नई दिल्ली
Updated Sun, 20 Aug 2017 06:06 PM IST
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अपनी आक्रमण क्षमता बढ़ाने के प्रयासों के तहत भारतीय सेना टी-90 युद्धक टैंकों को तीसरी पीढ़ी की मिसाइल प्रणाली से लैस करने की योजना पर काम कर रही है।
सेना के सूत्रों ने जानकारी दी कि वर्तमान में टी-90 टैंक लेजर गाइडिड आईएनवीएआर मिसाइल प्रणाली से लैस हैं और अब सेना ने इस प्रणाली की जगह इन युद्धक टैंकों को तीसरी पीढ़ी की मिसाइल प्रणाली से बदलने का फैसला लिया है।
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परियोजना से जुड़े एक दस्तावेज के मुताबिक, जिस प्रकार आईएनवीएआर मिसाइल प्रणाली के डिजाइन को सीमा व प्रवेश की गहराई (डीओपी) के संबंध में अधिकतम उपयोग कर लिया गया है, ऐसे में अगली पीढ़ी की मिसाइलों में इसे उन्नत क्षमता के साथ अपग्रेड करना जरूरी है। रूसी मूल के टी-90 टैंक भारतीय सेना की आक्रामक संरचनाओं का मुख्य आधार हैं।
सूत्रों के मुताबिक, तीसरी पीढ़ी की मिसाइलों को 800 से 850 मिमी के डीओपी प्राप्त करना चाहिए और दिन के साथ रात में भी 8 किलोमीटर की दूरी तक लक्ष्य को भेदने में सक्षम होना चाहिए।
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सेना के सूत्रों ने जानकारी दी कि वर्तमान में टी-90 टैंक लेजर गाइडिड आईएनवीएआर मिसाइल प्रणाली से लैस हैं और अब सेना ने इस प्रणाली की जगह इन युद्धक टैंकों को तीसरी पीढ़ी की मिसाइल प्रणाली से बदलने का फैसला लिया है।
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परियोजना से जुड़े एक दस्तावेज के मुताबिक, जिस प्रकार आईएनवीएआर मिसाइल प्रणाली के डिजाइन को सीमा व प्रवेश की गहराई (डीओपी) के संबंध में अधिकतम उपयोग कर लिया गया है, ऐसे में अगली पीढ़ी की मिसाइलों में इसे उन्नत क्षमता के साथ अपग्रेड करना जरूरी है। रूसी मूल के टी-90 टैंक भारतीय सेना की आक्रामक संरचनाओं का मुख्य आधार हैं।
सूत्रों के मुताबिक, तीसरी पीढ़ी की मिसाइलों को 800 से 850 मिमी के डीओपी प्राप्त करना चाहिए और दिन के साथ रात में भी 8 किलोमीटर की दूरी तक लक्ष्य को भेदने में सक्षम होना चाहिए।