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सेना प्रमुख रावत बोले, भारतीय सशस्त्र बल बेहद अनुशासित और धर्मनिरपेक्ष
Fri, 27 Dec 2019 09:25 PM IST
संदीप भट्ट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: संदीप भट्ट
Updated Fri, 27 Dec 2019 09:25 PM IST
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सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत
- फोटो : ANI
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सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने शुक्रवार को कहा कि सशस्त्र बल मानवाधिकार कानूनों का अत्यधिक सम्मान करते हैं। वे न केवल देशवासियों के मानवाधिकारों की रक्षा करते हैं बल्कि दुश्मनों के अधिकारों की रक्षा करते हैं।
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जनरल रावत मानव अधिकार भवन में ‘युद्धकाल और युद्धबंदियों के मानवाधिकारों का संरक्षण’ विषय पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के प्रशिक्षुओं और वरिष्ठ अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे।
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एक बयान में जनरल रावत के हवाले से बताया गया कि भारतीय सशस्त्र बल बेहद अनुशासित हैं और वे मानवाधिकार कानूनों और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों का अत्यधिक सम्मान करते हैं। वे बेहद धर्मनिरपेक्ष हैं। भारतीय सशस्त्र बल न केवल अपने लोगों के मानवाधिकारों का संरक्षण सुनिश्चित करते हैं, बल्कि युद्धबंदियों के साथ भी जिनेवा संधि के अनुसार व्यवहार करते हैं।
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Chief of the Army Staff General Bipin Rawat: The driving ethos of the Indian armed forces is “Insaniyat”( Humanity) and “Sharafat”( Decency). They are extremely secular. The challenge is the changing war fare tactics with the advent of technology. https://t.co/zpqlnIVrb5
— ANI (@ANI) December 27, 2019
बता दें कि जनरल बिपिन रावत संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों पर टिप्पणी करते हुए गुरुवार को कहा कि यदि नेता हमारे शहरों में आगजनी और हिंसा के लिए विश्वविद्यालयों और कॉलेज के छात्रों सहित जनता को उकसाते हैं, तो यह नेतृत्व नहीं है।
सेना प्रमुख ने कहा था कि नेता जनता के बीच से उभरते हैं, नेता ऐसे नहीं होते जो भीड़ को अनुचित दिशा में ले जाएं।’उन्होंने कहा था कि नेता वह होते हैं, जो लोगों को सही दिशा में ले जाते हैं। उनके इस बयान पर विपक्षी नेताओं ने उनकी जमकर आलोचना की और उनके बयान को राजनीति से प्रेरित बताया।