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अच्छी खबरः 2040 तक अमेरीका को पछाड़ देगा भारत
बीबीसी हिंदी. कॉम के लिए
Updated Wed, 08 Feb 2017 02:54 PM IST
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2040 तक दुनिया बहुत अलग होगी। इतनी अलग कि अमेरीका दुनिया की दूसरी अर्थव्यवस्था नहीं रह जाएगा। उसकी जगह होगा - भारत। ये भविष्यवाणी की है अंतरराष्ट्रीय कन्सल्टेन्सी प्राइसवाटरहाउस कूपर्स (पीडब्ल्यूसी) ने। चीन होगा नंबर वन पीडब्ल्यूसी ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि दो दशक के भीतर केवल चीन ऐसा देश रहेगा जिसका सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) भारत से ज्यादा होगा।
रिपोर्ट के अनुसार 2017 से 2050 के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था औसतन औसतन 4.9% के विकास दर से आगे बढ़ेगी। इस हिसाब से विश्व अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी वर्तमान के 7% से बढ़कर 15% हो जाएगी। मगर इससे पहले 2040 में ही भारतीय अर्थव्यवस्था अमेरीका से आगे निकल जाएगी - ये कैसे संभव है? जबकि भारत में ग़रीबी का स्तर अभी भी बहुत ज्यादा समझा जाता है।
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रिपोर्ट के अनुसार 2017 से 2050 के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था औसतन औसतन 4.9% के विकास दर से आगे बढ़ेगी। इस हिसाब से विश्व अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी वर्तमान के 7% से बढ़कर 15% हो जाएगी। मगर इससे पहले 2040 में ही भारतीय अर्थव्यवस्था अमेरीका से आगे निकल जाएगी - ये कैसे संभव है? जबकि भारत में ग़रीबी का स्तर अभी भी बहुत ज्यादा समझा जाता है।
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विशाल आबादीका असर
एक हिसाब से सोचें तो जवाब बड़ा आसान है - भारत की विशाल आबादी खुद ही अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाएगी। भारत की आबादी अभी लगभग सवा अरब (1.25 अरब) है, जो अगले दो दशक में बढ़कर एक अरब साठ करोड़ (1.6 अरब) तक पहुँच जाएगी। ये 35 करोड़ की वृद्धि अभी की अमरीकी आबादी के बराबर है।
और इससे जो बाजार बनेगा, उससे अर्थव्यवस्था का आकार भी बढ़ेगा। मगर पीडब्ल्यूसी की रिपोर्ट का कहना है कि भारत के उस स्तर तक के विकास में आबादी का योगदान बहुत कम रहेगा। रिपोर्ट के अनुसार तकनीकी प्रगति के कारण जो उत्पादकता बढ़ेगी उसका योगदान ज्यादा बड़ा होगा।
और इससे जो बाजार बनेगा, उससे अर्थव्यवस्था का आकार भी बढ़ेगा। मगर पीडब्ल्यूसी की रिपोर्ट का कहना है कि भारत के उस स्तर तक के विकास में आबादी का योगदान बहुत कम रहेगा। रिपोर्ट के अनुसार तकनीकी प्रगति के कारण जो उत्पादकता बढ़ेगी उसका योगदान ज्यादा बड़ा होगा।
चीन और भारत
भारत जिस तेजी से तरक्की कर रहा है वो बहुत कुछ चीन की याद दिलाता है। दोनों ही देशों की अर्थव्यवस्थाएँ सरकारी नियंत्रणों के कारण लंबे समय तक सुस्त चाल से चलती रहीं, मगर 90 के दशक में दोनों ही ने तेजी पकड़ी। चीन एक बड़ी मैनुफैक्चरिंग महाशक्ति बन गया। और भारत सर्विसेज की दुनिया का सितारा, खासतौर से इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी की दुनिया में भारत का डंका बजने लगा।
कतंत्र की भूमिका
ऐसा कहा जाता है कि भारत और चीन की राजनीतिक व्यवस्थाओं के अंतर से भारत को चीन की तुलना में ज्यादा फायदा हो सकता है। कुछ वर्षों तक कहा जाता रहा कि चीन में जैसी निरंकुश सत्ता है, उससे सरकार बिना अधिक विरोध के बड़े काम करवा सकती है। उससे अलग भारत में संसदीय लोकतंत्र है, जिससे सहमति बनाना उतना आसान नहीं होगा। मगर नए दौर में जो विकास हो रहा है
वो बहुत कुछ लोगों के व्यक्तिगत प्रयासों पर निर्भर करता है। और भारत का शासन चूँकि कानून के राज और लोकतंत्र को महत्व देता है, इसलिए वहाँ निजी निवेशकों के लिए परिस्थितियाँ बेहतर हैं। इसलिए कई मानते हैं, कि अगले ऐपल का उदय, अर्थव्यवस्था में क्रांतिकारी परिवर्तन करनेवाली कंपनी, चीन की जगह भारत में होगा।
वो बहुत कुछ लोगों के व्यक्तिगत प्रयासों पर निर्भर करता है। और भारत का शासन चूँकि कानून के राज और लोकतंत्र को महत्व देता है, इसलिए वहाँ निजी निवेशकों के लिए परिस्थितियाँ बेहतर हैं। इसलिए कई मानते हैं, कि अगले ऐपल का उदय, अर्थव्यवस्था में क्रांतिकारी परिवर्तन करनेवाली कंपनी, चीन की जगह भारत में होगा।
मरीका की मुश्किलें
तो एक शताब्दी तक दुनिया की अर्थव्यवस्था पर राज करनेवाली अमरीकी अर्थव्यवस्था तीसरे नंबर पर कैसे पहुँच जाएगी? पिछली एक शताब्दी में अमेरीका जैसे देश भारत से छह गुना कम आबादी होने के बावजूद ज्यादा उत्पादन करते रहे। मगर समय बदलने के साथ जैसे-जैसे आधुनिकता आती गई, ये बदलने लगा, और एशियाई देश आगे निकलने लगे। पर ध्यान रखना होगा कि कई बार किसी अप्रत्याशित घटना से सब बदल जाता है।
60 के दशक में कई लोग कहा करते थे कि सोवियत संघ की अर्थव्यवस्था अमेरीका को पछाड़ देगी। फिर 80 के दशक में ऐसे भी दावे हुए कि जापान कुछ ही सालों में दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। मगर वित्तीय संकट ने पूरे 90 के दशक में जापानी अर्थव्यवस्था की रीढ़ तोड़ी, वहीं राजनीति बदलने से सोवियत संघ का ही विघटन हो गया। ऐसे में किसी बदलाव से 2040 की दुनिया की तस्वीर भी पीडब्ल्यूसी की रिपोर्ट में सुझाई गई तस्वीर से बिल्कुल अलग हो सकती है।
60 के दशक में कई लोग कहा करते थे कि सोवियत संघ की अर्थव्यवस्था अमेरीका को पछाड़ देगी। फिर 80 के दशक में ऐसे भी दावे हुए कि जापान कुछ ही सालों में दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। मगर वित्तीय संकट ने पूरे 90 के दशक में जापानी अर्थव्यवस्था की रीढ़ तोड़ी, वहीं राजनीति बदलने से सोवियत संघ का ही विघटन हो गया। ऐसे में किसी बदलाव से 2040 की दुनिया की तस्वीर भी पीडब्ल्यूसी की रिपोर्ट में सुझाई गई तस्वीर से बिल्कुल अलग हो सकती है।