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चीन की धमकी को किया दरकिनार, कदम पीछे नहीं खींचेगा भारत

Wed, 05 Jul 2017 03:27 AM IST
अमर उजाला/ ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला/ ब्यूरो, नई दिल्ली Updated Wed, 05 Jul 2017 03:27 AM IST
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india will not go back on china threatened
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चीन की उकसाने वाली कार्रवाई और बयानों के बावजूद भारत दोकलम पठार पर अपने पुराने रुख से पीछे नहीं हटेगा। विवाद टालने के लिए कूटनीतिक पहल के दौरान भारत ने चीन को अपने रुख से लगातार अवगत कराया है। संबंधों में आई तल्खी के बीच अपने समुद्री सीमा पर चीनी पनडुब्बियों की उपस्थिति से भी भारत सतर्क है। 

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दोकलम पर कब्जा कर भारत पर युद्ध की स्थिति में बढ़त लेने की चीनी रणनीति के कारण दोनों देशों के बीच बीते तीन हफ्ते से जारी तनाव और लंबा खिंच सकता है। चीन जहां अपने अड़ियल रुख पर अडिग रहने के साथ बार-बार युद्ध की संभावना जता रहा है। वहीं भारत ने भी कदम पीछे न खींचने का साफ-साफ संदेश चीन को दे दिया है।
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इस बीच अपनी समुद्री सीमा में चीनी पनडुब्बियों की कई बार हुई घुसपैठ के बाद भारत और सतर्क हो गया है। भड़काऊ बयानबाजी, युद्ध की धमकी और उकसाने वाली कार्रवाईयां दरअसल चीन की भारत के साथ-साथ भूटान पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है।
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सूत्रों के मुताबिक, भारत ने चुंबी घाटी में किसी प्रकार का परिवर्तन, निर्माण कार्य करने से पहले भारत, चीन और भूटान के बीच सहमति बनाने संबंधी साल 2012 के समझौते की याद दिलाई है। कूटनीतिक पहल के दौरान यह भी साफ कर दिया है कि भारत इस मामले में भूटान का साथ देता रहेगा, इसके अलावा वह दोकलम पहाड़ से संबंधित किसी भी जगह पर किसी प्रकार के निर्माण की इजाजत नहीं देगा।

मोदी जिनपिंग मुलाकात पर है नजर

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india-china - फोटो : AFP
भारत की निगाह फिलहाल जर्मनी के हैम्बर्ग में होने जा रहे जी-20 देशों की बैठक पर है। यहां जी-20 से इतर होने वाली ब्रिक्स देशों की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात संभव है। हालांकि इस संबंध में दोनों देशों की ओर से अभी कोई संकेत नहीं दिया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जिनपिंग-मोदी के बीच बातचीत हुई तो विवाद का हल निकल सकता है। विशेषज्ञ वर्ष 2014 में चीनी राष्ट्रपति के भारत दौरे की याद दिला रहे हैं। तब चीनी सेना ने लद्दाख के चुमार इलाके में घुसपैठ कर डेरा डाल दिया था।

हालांकि जब पीएम मोदी ने जिनपिंग से इस सिलसिले में बात की तो इसके कुछ समय बाद चीनी सेना वापस लौट गई थी। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि भविष्य में विवाद बढ़ेगा या घटेगा यह चीन के भावी रुख पर निर्भर करेगा।
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