फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   india will make missile just like sudarshan chakra

सुदर्शन चक्र जैसी मिसाइल बनाएगा भारत, पूरी हुई तैयारी

Fri, 20 Jan 2017 04:27 AM IST
टीम डिजिटल/अमर् उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर् उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 20 Jan 2017 04:27 AM IST
विज्ञापन
india will make missile just like sudarshan chakra
Brahmos
भारत अपनी सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस की मारक क्षमता और गति में इजाफा करने के साथ ही महाभारत के सुदर्शन चक्र जैसी मिसाइल बनाने पर काम करेगा। मिसाइल तकनीक नियंत्रण व्यवस्था का सदस्य बनने के बाद भारत ने इसकी तैयारी कर ली है। 
विज्ञापन


अमर उजाला से विशेष बातचीत में ब्रह्मोस के चीफ कंट्रोलर आरएंडडी, ब्रह्मोस एरोस्पेस के सीईओ और एमडी सुधीर कुमार मिश्रा ने यह जानकारी दी। मिश्रा बृहस्पतिवार को यहां एनआईटी में आयोजित चार दिवसीय टेक स्पर्धा के उद्घाटन कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे थे।
विज्ञापन


 मिश्रा ने कहा कि भारत और दुनिया के पास अभी तक ऐसी मिसाइलें हैं, जो लक्ष्य पर प्रहार कर वहीं समाप्त हो जाती हैं, लेकिन भारत ठीक वैसी मिसाइल बनाना चाहता है, जैसे सुदर्शन चक्र दुश्मन पर वार कर वापस लौट आता था। यानी भारत लक्ष्य भेद कर लौटने वाली मिसाइल पर काम करने की तैयारी कर रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


 मिश्रा ने बताया कि भारत अपनी क्षमता के दम पर ही ब्रह्मोस की गति और मारक क्षमता में इजाफा करने में भी सक्षम है। अभी ब्रह्मोस की मारक क्षमता 300 किमी है और स्पीड 2.08 मैक। एक मैक का अर्थ होता है ध्वनि के बराबर की गति। ताजा योजना के अनुसार मिसाइल की गति 5 मैक तक करने की योजना है और इस पर अगले दो से तीन साल में काम पूरा होने की उम्मीद है। मिश्रा ने बताया कि मिसाइल 10 मीटर तक नीचे आ सकती है और इतनी देर में दुश्मन टारगेट का मुस्तैद रहना तो दूर अंतिम प्रार्थना करने का भी वक्त नहीं मिलता। मिश्रा ने इस बेहतरीन मिसाइल को तैयार करने का श्रेय डा. एपीजे अब्दुल कलाम को दिया।

टी ब्रेक में आया था ब्रह्मोस का आइडिया

india will make missile just like sudarshan chakra
ब्रम्होस - फोटो : ..

सुधीर कुमार मिश्रा के मुताबिक कलाम साहब 1993 में एक मीटिंग में मास्को गए थे। टी ब्रेक के समय उनकी नजर एक कमरे में रखी अधूरी मिसाइल पर गई। पूछा तो पता चला है कि यूएसएसआर के समय में मिसाइल की रूपरेखा तैयार हुई, लेकिन संयुक्त रशिया टूटने के बाद प्रोजेक्ट अधूरा रह गया। तब उन्होंने रूस के साथ मिलकर योजना पर काम करने की इच्छा जाहिर की थी। 1998 में समझौते के बाद इस पर सफलता मिली।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed