{"_id":"5d255d648ebc3e6d0c339d3b","slug":"india-will-host-conference-of-party-seminar","type":"story","status":"publish","title_hn":"भारत करेगा ‘कॉप’ सम्मेलन की मेजबानी, ग्रेटर नोएडा में होगा आयोजन","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
भारत करेगा ‘कॉप’ सम्मेलन की मेजबानी, ग्रेटर नोएडा में होगा आयोजन
Wed, 10 Jul 2019 09:07 AM IST
आसिम खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: आसिम खान
Updated Wed, 10 Jul 2019 09:07 AM IST
विज्ञापन
- फोटो : Social Media
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कॉप (कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टी) सम्मेलन को भारत में कराने के लिए पर्यावरण मंत्रालय और संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के बीच एमओयू पर दस्तखत हो गए हैं। ग्रेटर नोएडा के एक्सपो सेंटर में 2 से 14 सिंतबर तक इसका आयोजन होगा। दुनियाभर में हर दिन क्षरण और मरुस्थल में तब्दील हो रही 23 हेक्टेयर भूमि को रोकने के लिए सम्मेलन में चिंतन होगा। इसका लक्ष्य 2030 तक बचाव के उपाय खोजना और उन्हें लागू कराकर समयबद्ध नतीजे हासिल करना है।
मंगलवार को यूएन की विशेष इकाई (यूएनसीडी) के प्रमुख इब्राहिम चाओ के साथ पर्यावरण मंत्रालय की बैठक हुई। इसमें सम्मेलन की कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया गया। पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि मरुस्थल की गहराती समस्या चिंता का विषय है और भारत भी इससे अछूता नहीं है। देश में करीब 29 फीसदी जमीन या तो क्षरित हो रही है या वह बंजर है।
उन्होंने बताया, भारत की कोशिश 2030 तक सिंचित जमीन बढ़ाने की है। हमारी 60 फीसदी खेती पूर्णत वर्षा जल पर आधारित है इसलिए इसके अधिकतम प्रबंधन के प्रयास हैं। कॉप-14 सम्मेलन पर्यावरण क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा।
विज्ञापन
इस मौके पर इब्राहिम चाओ ने कहा कि हम दिल्ली में पेरिस के वादे को आगे बढ़ाएंगे। अगले 25 से 30 साल में तेजी से मरु हो रही भूमि को बचाने के लिए पूरी दुनिया को मिलकर काम करना होगा। इसके लिए सम्मेलन में यूएन एक प्रस्ताव भी लेकर आ रहा है। उन्होंने कहा कि बंजर होती जमीन भारत की भी चिंता का विषय है। वह अपने प्रयासों से दुनिया को संदेश देकर महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकता है।
विज्ञापन
मंगलवार को यूएन की विशेष इकाई (यूएनसीडी) के प्रमुख इब्राहिम चाओ के साथ पर्यावरण मंत्रालय की बैठक हुई। इसमें सम्मेलन की कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया गया। पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि मरुस्थल की गहराती समस्या चिंता का विषय है और भारत भी इससे अछूता नहीं है। देश में करीब 29 फीसदी जमीन या तो क्षरित हो रही है या वह बंजर है।
विज्ञापन
उन्होंने बताया, भारत की कोशिश 2030 तक सिंचित जमीन बढ़ाने की है। हमारी 60 फीसदी खेती पूर्णत वर्षा जल पर आधारित है इसलिए इसके अधिकतम प्रबंधन के प्रयास हैं। कॉप-14 सम्मेलन पर्यावरण क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा।
विज्ञापन
इस मौके पर इब्राहिम चाओ ने कहा कि हम दिल्ली में पेरिस के वादे को आगे बढ़ाएंगे। अगले 25 से 30 साल में तेजी से मरु हो रही भूमि को बचाने के लिए पूरी दुनिया को मिलकर काम करना होगा। इसके लिए सम्मेलन में यूएन एक प्रस्ताव भी लेकर आ रहा है। उन्होंने कहा कि बंजर होती जमीन भारत की भी चिंता का विषय है। वह अपने प्रयासों से दुनिया को संदेश देकर महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकता है।