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ड्रैगन की सलाह- चीन-पाक आर्थिक गलियारे में शामिल होकर लाभ उठाए भारत

Fri, 23 Dec 2016 03:38 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Fri, 23 Dec 2016 03:38 PM IST
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India should join CPEC to ease tensions with Pakistan and boost growth

एक दिन पहले चीन ने भारत को दलाई लामा मामले पर झिड़की दी थी। चीन ने दलाई लामा के हाल ही में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मिलने पर नाखुशी जताई थी। अब ड्रैगन भारत का हिमायती बन हमदर्दी जता रहा है और सलाह दे रहा है कि भारत को पाकिस्तान के साथ दुश्मनी खत्म कर चीन-पाक आर्थिक गलियारे का लाभ उठाना चाहिए। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स लिखा है सीपीईसी के जरिए भारत-पाक संबंधों में फिर से मधुरता आ सकती है। 

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चीन और पाकिस्तान के बीत करीब 46 बिलियन डॉलर से आर्थिक गलियारा तैयार किया गया है। अखबार में लिखा गया है कि भारत को इस मध्य एशियाई देशों के साथ मिलकर इस प्रोजेक्ट लाभ उठाना चाहिए। 
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अभी नहीं तो कभी नहीं!

चीन ने भारत को सलाह देने के साथ-साथ इस बात से आगाह भी किया है कि भारत के लिए पाक से शांति संबंध स्थापित करने और सीपीईसी के जरिए आर्थिक लाभ उठाने का का इससे बढ़िया मौका फिर नहीं मिलेगा।
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दरअसल, चीन ने भारत को इस संबंध में सलाह पाकिस्तान के उस मशविरे के बाद दी है जिसमें पाक सेना के शीर्ष जनरल ने बीते मंगलवार को एक बयान जारी कर चीन-पाक आर्थिक गलियारे में शामिल होने का प्रस्ताव भारत के सामने रखा था।

चीन की मानें तो भारत इस मौके का फायदा उठा सकता है। भारत को इसमें देरी नहीं करनी चाहिए, इससे पहले कि पाक में भारत विरोधी आवाजें बुलंद होने लगें।

'भारत-पाक के तनावपूर्ण संबंधों का फायदा नहीं उठाना चाहता चीन'

India should join CPEC to ease tensions with Pakistan and boost growth

चीन ने कहा कि भारत-पाक के तनावपूर्ण संबंधों का वह फायदा नहीं उठाना चाहता है। सीपीईसी पाकिस्तान के कब्जे वाले इलाके से होकर गुजरता है, इसलिए भारत इसमें शामिल होकर आर्थिक लाभ उठा सकता है। चीन ने कहा कि आर्थिक आधार ही दोनों देशों में शांति के लिए सबसे मुफीद होगा है। इसके साथ-साथ भारत ईरान, अफगानिस्तान और अन्य मध्य एशियाई देशों के साथ इस गलियारे का लाभ ले सकता है।

अखबार ने हाल ही में ब्रिटेन की जीडीपी से आगे निकली भारत की जीडीपी का भी हवाला दिया है। अखबार ने लिखा है कि भारत की जीडीपी का ब्रिटेन की जीडीपी से आगे निकलना एक शुभ संकेत है। भारत तेजी उभरती अर्थव्यवस्था के साथ-साथ वैश्विक उत्पाद में भी तेजी से योगदान दे रहा है, इसलिए भारत को क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण और नए खुले अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों से निर्यात उन्मुख अर्थव्यवस्था का निर्माण करने के लिए आगे आना होगा।

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