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दुश्मन की अब वो आंख नहीं जो नजर उठाकर देख ले, कई अहम सौदों पर हो गए हैं आज हस्ताक्षर
शशिधर पाठक, नई दिल्ली
Updated Fri, 05 Oct 2018 05:45 PM IST
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vladimir putin, PM Modi
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भारत को परमाणु हमलों से लैस मिसाइल हमलों को रोकने की क्षमता मिलने का रास्ता साफ हो गया है। भारत ने रूस से पांच स्क्वाड्रान एस-400 मिसाइल प्रतिरक्षा प्रणाली लेने के सौदे पर दस्तखत कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच बनी सहमति के अनुसार यह मिसाइल प्रणाली मेक इन इंडिया कार्यक्रम के रहत रूस से भारत को मिलेगी। इसके अलावा दोनों देशों में अंतरिक्ष, विज्ञान एवं तकनीकी, परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में कई अहम सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। लेकिन इन सबमें सबसे अहम एस-400 मिसाइल प्रतिरक्षा प्रणाली पर बनी सहमति है। इसके मिलने के बाद दुश्मन की वो आंख नहीं होगी, जो भारत की तरफ नजर उठाकर देख भर ले।
क्या है एस-400 मिसाइल प्रतिरक्षा प्रणाली
भारत, रूस से पांच स्क्वाड्रान एस-400 प्रतिरक्षा प्रणाली लेगा। एक स्क्वाड्रान में दो लांचर होते हैं। रूस का यह काफी खतरनाक, बेहद सतर्क रहने वाला और चारों तरफ से आ रहे दुश्मन के वार (लड़ाकू विमान, क्रूज मिसाइल, रॉकेट, परमाणु मिसाइल आदि) पर करीब 600 किमी दूर से नजर रखने वाला प्रक्षेपा है। यह प्रक्षेपा 600 किमी दूर से नजर ही नहीं रखता बल्कि उसका पीछा करते हुए पलक झपकते ही 400 मीटर दूर ही ध्वस्त भी कर देता है। इसके कांफिगरेशन में मौजूद 48एन6 सीरीज की मिसाइलें शक्तिशाली रेडार और कमान नियंत्रण प्रणाली के सहयोग किसी भी परमाणु मिसाइल कम, मध्यम या ऊंची ऊचाई से उड़ते हुए विमान, रॉकेट, क्रूज मिसाइल को ध्वस्त कर सकती है।
इस तरह की प्रणाली अमेरिका भी विकसित करने में लगा है और रक्षा मंत्रालय के सूत्रों की माने तो इसके आने के बाद भारत चीन से लगती 4000 किसी सीमा की चुनौती और पाकिस्तान से मिल रही दोहरी चुनौती का सामना कर सकेगा। इस जमीन से हवा में मार करने वाली प्रतिरक्षी मिसाइल प्रणाली की एक विशेषता और भी है। यह जमीन पर लड़ रहे सैनिकों को लॉजिस्टिक सपोर्ट देने की प्रणाली को भी तबाह करने में सक्षम है। बताते हैं इस तरह की प्रणाली के होने के बाद पाकिस्तान की परमाणु हमले की गीदड़ भभकी का भी जवाब दिया जा सकेगा।
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क्या है एस-400 मिसाइल प्रतिरक्षा प्रणाली
भारत, रूस से पांच स्क्वाड्रान एस-400 प्रतिरक्षा प्रणाली लेगा। एक स्क्वाड्रान में दो लांचर होते हैं। रूस का यह काफी खतरनाक, बेहद सतर्क रहने वाला और चारों तरफ से आ रहे दुश्मन के वार (लड़ाकू विमान, क्रूज मिसाइल, रॉकेट, परमाणु मिसाइल आदि) पर करीब 600 किमी दूर से नजर रखने वाला प्रक्षेपा है। यह प्रक्षेपा 600 किमी दूर से नजर ही नहीं रखता बल्कि उसका पीछा करते हुए पलक झपकते ही 400 मीटर दूर ही ध्वस्त भी कर देता है। इसके कांफिगरेशन में मौजूद 48एन6 सीरीज की मिसाइलें शक्तिशाली रेडार और कमान नियंत्रण प्रणाली के सहयोग किसी भी परमाणु मिसाइल कम, मध्यम या ऊंची ऊचाई से उड़ते हुए विमान, रॉकेट, क्रूज मिसाइल को ध्वस्त कर सकती है।
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इस तरह की प्रणाली अमेरिका भी विकसित करने में लगा है और रक्षा मंत्रालय के सूत्रों की माने तो इसके आने के बाद भारत चीन से लगती 4000 किसी सीमा की चुनौती और पाकिस्तान से मिल रही दोहरी चुनौती का सामना कर सकेगा। इस जमीन से हवा में मार करने वाली प्रतिरक्षी मिसाइल प्रणाली की एक विशेषता और भी है। यह जमीन पर लड़ रहे सैनिकों को लॉजिस्टिक सपोर्ट देने की प्रणाली को भी तबाह करने में सक्षम है। बताते हैं इस तरह की प्रणाली के होने के बाद पाकिस्तान की परमाणु हमले की गीदड़ भभकी का भी जवाब दिया जा सकेगा।
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चीन के पास भी है एस-400
Vladimir Putin, PM Modi
चीन के पास भी एस-400 प्रतिरक्षा प्रणाली है। चीन ने इसे काफी पहले रूस से लिया था। हालांकि यह नहीं बताया जा सकता कि चीन ने इस मिसाइल प्रणाली में कौन सी मिसाइलों की तैनाती कर रखी है। रूस ने पहली बार इस मिसाइल प्रणाली 2007 में मास्को की रक्षा में तैनात किया था। इसके बाद इनका प्रदर्शन सीरिया के आसमान में किया। सिरिया में एस-400 ट्रायम्फ प्रणाली ही सीरिया के आसमान में मंडरा रहे रूस के लड़ाकू विमानों तथा जमीन पर तैनात रक्षा साजो-सामान को सुरक्षित रख रही थी। कैस्पियन सागर में मौजूद रूस के युद्धपोतों की सुरक्षा तथा युद्धपोतों से दागी गई मिसाइलों को भी सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया था।
भारत और रूस बढ़े दो कदम और आगे
भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मेहमान राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के बीच सहमति ने दोनों देशों के बीच सहयोग और विश्वास को नया आयाम दे दिया है। द्विपक्षी व्यापार को बढ़ाने, ऊर्जा सुरक्षा, परमाणु ऊर्जा, हाइड्रोकार्बन के क्षेत्र में सहयोग समेत कई क्षेत्रों में निकटता बढ़ाने पर सहमति बनी है। रूस दशकों से भारत का विश्वसनीय सामरिक साझीदार देश रहा है। रूस के राष्ट्रपति ने याद दिलाया कि उनके देश ने हमेशा भारत की सहायता की है और करता रहेगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी इसके लिए रूस का आभार व्यक्त किया और रिश्तों में मजबूती देने में भरपूर सहयोग का वादा किया।
भारत और रूस बढ़े दो कदम और आगे
भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मेहमान राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के बीच सहमति ने दोनों देशों के बीच सहयोग और विश्वास को नया आयाम दे दिया है। द्विपक्षी व्यापार को बढ़ाने, ऊर्जा सुरक्षा, परमाणु ऊर्जा, हाइड्रोकार्बन के क्षेत्र में सहयोग समेत कई क्षेत्रों में निकटता बढ़ाने पर सहमति बनी है। रूस दशकों से भारत का विश्वसनीय सामरिक साझीदार देश रहा है। रूस के राष्ट्रपति ने याद दिलाया कि उनके देश ने हमेशा भारत की सहायता की है और करता रहेगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी इसके लिए रूस का आभार व्यक्त किया और रिश्तों में मजबूती देने में भरपूर सहयोग का वादा किया।