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जिससे है युद्ध का खतरा उसी के संग युद्धाभ्यास करने जा रहा है भारत

Sat, 25 Aug 2018 04:16 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 25 Aug 2018 04:16 PM IST
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India-Pak ready to maneuvers together between tension in relationships

जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा पर एक-दूसरे के खिलाफ मोर्चा संभालने वाले भारत और पाक के सैनिक पहली बार वैश्विक आतंकरोधी अभियान का हिस्सा बनकर रूस में साथ-साथ युद्धाभ्यास करने जा रहे हैं। रूस में चेल्याबिंस्क स्थित चेब्राकुल इलाके में पीस मिशन-2018 के बैनर तले शुक्रवार से यह युद्धाभ्यास शुरू हो चुका है। 24 अगस्त से रूस में शुरू इस बहुराष्ट्रीय अभ्यास में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) में शामिल आठ देश संयुक्त युद्धाभ्यास कर रहे हैं। इनमें भारत-पाक के अलावा रूस, चीन, उज्बेकिस्तान, तजाकिस्तान, किर्गिस्तान और कजाकिस्तान शामिल हैं। 

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3000 कुल सैनिकों में भारत के 200, पाक के 110, रूस के 1700 व चीन के 748 सैनिक भाग ले रहे हैं

2018 शांति मिशन के तहत उज्बेकिस्तान, तजाकिस्तान, किर्गिस्तान व कजाकिस्तान के 242 सैनिक पहुंचे


सेना के प्रवक्ता कर्नल अमन आनंद ने बताया, इस अभ्यास में एससीओ देशों को आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन चलाने का प्रशिक्षण मिलेगा जिसमें सेनाओं के बीच पेशेवर वार्ता, ऑपरेशंस में आपसी समझदारी, ज्वाइंट कमांड स्थापना, और आतंकी खतरों से निपटने को लेकर मॉक ड्रिल जैसे अभ्यास किए जाएंगे। एक अधिकारी के मुताबिक भारतीय सैनिकों ने इससे पहले कभी किसी ऐसे बहुराष्ट्रीय सैन्य युद्धाभ्यास में हिस्सा नहीं लिया है जिसमें पाकिस्तान भी साथ रहा हो। हालांकि दोनों देशों की सेना ने संयुक्त राष्ट्र मिशन में जरूर साथ-साथ काम किया है। भारत की तरफ से युद्धाभ्यास को भेजे गए कुल 200 सैनिकों में 167 थलसेना के और 33 वायुसेना के जवान शामिल हैं।
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पिछले साल दोकलम विवाद के चलते नहीं हुआ अभ्यास

इस साल मास्को में भारत और चीन भी संयुक्त युद्धाभ्यास कर रहे हैं। सितंबर माह में दोनों देश द्विपक्षीय संयुक्त सैन्य अभ्यास शुरू कर देंगे, लेकिन पिछले साल भारत-चीन के बीच दोकलम विवाद के चलते संयुक्त युद्धाभ्यास नहीं हो पाया था। भारत मानता है कि एससीओ सदस्य देश के रूप में वह इस इलाके में आतंकवाद के खिलाफ अभियान में अहम भूमिका निभा सकता है।
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एससीओ पर लगी पूरी दुनिया की निगाहें

एससीओ के आठ देशों को नाटो या विश्व के किसी भी बड़े वैश्विक संगठन के रूप में मान्यता मिल रही है। इसमें शामिल आठ सदस्य देश पूरी दुनिया की 40 फीसदी आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं। विश्व की कुल जीडीपी में इनकी 20 फीसदी हिस्सेदारी होने के कारण अमेरिका, यूरोप ब्रिटेन की निगाहें भी शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) पर लगी हुई हैं।

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