कृषि उत्पादन में चीन, अमेरिका से पिछे है भारत
- कृषि उत्पादन बढ़ाने की तमाम कवायदों में भारत नाकाम
- चीन की तरह अनाज उगलने में भारत नाकाम
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कृषि उत्पादन बढ़ाने की तमाम कवायदों के बावजूद भारत की खेती अमेरिका और चीन की तरह अनाज उगलने में नाकाम रही है। देश में सर्वाधिक अन्न उपजाने के मामले में अमेरिका की धरती ही अव्वल है। यहां का औसत अन्न उपज प्रति हेक्टेयर 7000 कि.ग्रा. से भरी ज्यादा है।
तो चीन की धरती भी अनाज उगाने में भारत से आगे हैं। चीन का औसत अनाज उत्पादन प्रति हेक्टेयर 5800 कि.ग्रा. से ज्यादा है। जबकि भारत में अनाज का उत्पादन प्रति हेक्टेयर 3000 कि.ग्रा. से भी कम है। ऐसे में जब देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उत्पादन बढ़ाना जरूरी हो गया है।
केंद्र सरकार ने कृषि उत्पादन बढ़ाने और उसे अमेरिका व चीन सरीखा बनाने के तमाम दावे किए हैं। आम बजट में वित्त मंत्री ने कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए सिंचाई सरीखे बुनियादी सुविधाओं को मजबूत बनाने पर जोर दिया है। मगर ये उत्पादन बढ़ाने में कितनी कारगर होगी इसको लेकर सवाल अभी से उठने लगे हैं।
देश के जाने-माने कृषि अर्थशास्त्री देवेंद्र शर्मा की राय अलग है
शर्मा का कहना है कि कृषि उत्पादन बढ़ाने से पहले किसानों की आय बढ़ानी जरूरी है। पंजाब के कृषि हालातों की दलील देते हुए उनका कहना है कि उत्पादन बढ़ाने से ज्यादा किसानों की आय सुनिश्चित करना जरूरी है।
उनका कहना है कि आय सुनिश्चित न होने की वजह से ही किसानों देश में किसानों के आत्म हत्या के मामले बढ़े हैं। जबकि कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह का कहना है कि सिंचाई झमता के विस्तार से देश के अनाज उत्पादन में निशि्चित ही बढ़ोत्तरी होगी।
उन्होंने कहा कि सिंचाई ही नहीं, खेती में तकनीक के बेहत्तर उपयोग पर जोर, भूमि की सेहत में सुधार, मनरेगा और रोजगार बढ़ाने के लिए सरकार के जरिए किए गए तमाम प्रयासों से देश का अनाज उत्पादन बढ़ेगा।
तो कृषि उत्पादन बढ़ाने के पक्ष में कृषि मशीनरी और विनिर्माता संघ ने सरकार से ऐसे कृषि उपकरण उपलब्ध कराने की मांग की है जोकि टिकाऊ, हल्के और सस्ते हों। उनकी बनावट कार्य विशेष को ध्यान में रखकर की गई हो। लेकिन इतना तो तय है कि भारत का कृषि उत्पादन अमेरिका और चीन के करीब ले जाने के लिए देश की खेती को अभी लंबा समय लगेगा।