भारत और अमेरिका के बीच हुए कॉमकासा समझौते के यह हैं फायदे, चीन और पाकिस्तान की बढ़ी टेंशन
भारत और अमेरिका ने द कम्यूनिकेशंस कॉम्पैटिबिलिटी एंड सिक्योरिटी एग्रीमेंट (सीओएमसीएएसए) पर गुरुवार को हस्ताक्षर किए हैं। 2 प्लस 2 वार्ता में हुए इस अहम सामरिक समझौते के तहत भारत की पहुंच अब अमेरिका के अत्याधुनिक और संवेदनशील रक्षा तकनीकों तक हो जाएगी। इन रक्षा तकनीकों के जरिए भारत अपने पड़ोसी देशों जैसे कि चीन और पाकिस्तान पर कारगर नजर रख पाएगा। केवल इतना ही नहीं अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने कहा कि रूस से प्रस्तावित मिसाइल डिफेंस सिस्टम की खरीद पर उनका देश भारत पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाएगा। भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते सुरक्षा संबंधों और कॉमकासा समझौते से चीन का परेशान होना स्वाभाविक है। इस तरह से यह समझौता चीन के लिए परेशानी का सबब है।
1. कॉमकासा समझौते से भारत को अमेरिका जैसे हथियारों से लैस ड्रोन्स और उन्नत रक्षा तकनीक मिलेगी। एडवांस डिफेंस सिस्टम के जरिए भारत चीन पर नजर रख सकेगा।
2. कॉमकासा के जरिए भारत के सी130जे हरक्यूलिस लड़ाकू विमानों और नौसेना के पी81 जैसे एयरक्राफ्ट्स पर विशेष संचार प्रणाली स्थापित करने का रास्ता साफ हो जाएगा। जिससे वह सीधे अमेरिकी सेना से संपर्क स्थापित कर पाएंगे।
3. यदि अमेरिकी नौसेना ने चीन के किसी जहाज या पनडुब्बी का पता लगाया है तो वह भारतीय नौसेना को ना केवल उसकी गति और दिशा की सूचना देगी बल्कि उसका लाइव वीडियो भी भेज पाएगी।
4. इस समझौते के जरिए भारत चीन पर ही नहीं बल्कि पाकिस्तान पर भी कड़ी नजर रख सकेगा। यदि भारत अमेरिका से हथियारों से लैस ड्रोन्स खरीदता है तो दोनों देश अहम सूचनाओं को साझा कर सकेंगे। लाइव सैटेलाइट फीड के जरिए पाकिस्तान के किसी आतंकी प्रमुख की गतिविधियों पर नजर रखी जा सकेगी।
5. भारत अब अमेरिकी से अत्याधुनिक जासूसी उपकरणों और सी गार्डियंस जैसे आर्म्ड ड्रोन्स खरीद पाएगा। इससे जहां भारतीय सेना की जासूसी क्षमता बढ़ेगी वहीं चीन सहित पड़ोसियों की निगरानी की जा सकेगी। सबसे खास बात यह है कि अमेरिका अबतक केवल अपने नाटो सहयोगियों को सी गार्डियंस ड्रोन्स बेचता रहा है। भारत यह समझौता करने वाला पहला गैर-नाटो देश है।
6. अमेरिका के सी गार्डियंस ड्रोन्स को यदि भारतीय नौसेना खरीदती है तो इसमें अमेरिका के कुछ अत्याधुनिक और अति सुरक्षित संचार उपकरण फिट किए जाएंगे। यह उकरण आस-पास में किसी भी संदिग्ध हलचल को ट्रेस करके यह पता लगा सकते हैं कि यह किसी दुश्मन की है या दोस्त की। इस तकनीक का नाम आइडेंटिफिकेशन फ्रेंड ऑर फोय (आईएफएफ) है।