जानिए, सरकार के खर्चे पर किस तरह 'मौज' उड़ाते हैं कश्मीर के अलगाववादी
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कश्मीर में लगातार जारी हिंसा और सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के दौरे की नाकामी के पीछे अलगाववादियों की बड़ी भूमिका सामने आने के बाद सरकार ने उनके खिलाफ सख्ती का मूड बना लिया है। इसके लिए सरकार सबसे पहले उन्हें मिलने वाली सुविधाओं पर लगाम लगाने वाली है।
उन सुविधाओं पर जिसके सहारे ये अलगाववादी देशभर में वीआईपी ट्रीटमेंट पाते हैं और सरकारी पैसे पर देश विदेश में मौज उड़ाते हैं। लोगों को शायद ही इस बात का अंदाजा होगा कि जो सुविधाएं देश में बड़े बड़े नेताओं को नहीं मिल पाती वो सरकार ने कश्मीर में इन अलगाववादियों को दे रखी हैं। एक अनुमान के अनुसार पिछले छह सालों में ही सरकार ने अलगाववादियों की आवभगत में 600 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च कर दिए।
यानि औसतन सालाना 100 करोड़ रुपये से ज्यादा केंद्र और राज्य सरकार अलगाववादियों के ऐशो आराम पर खर्च करती है जिसमें से बड़ी रकम इनके आने जाने, होटलों में ठहरने और सुरक्षा व्यवस्था पर खर्च की जाती है। आइए आपको बताते हैं कैसे अलगाववादियों के ऐशो आराम पर पानी की तरह पैसा बहाती हैं सरकारें।
अलगाववादियों की सुरक्षा पर खर्च होते हैं हर साल 100 करोड़
एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट के अनुसार 2010 से 2016 तक केंद्र और राज्य सरकार ने हुर्रियत कान्फ्रेंस के अध्यक्ष सैयद अली शाह गिलानी, यासीन मलिक और मीर वाइज उमर फारुख जैसे अलगाववादी नेताओं पर 600 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए।
यह खर्चा पिछले छह सालों में अलगाववादियों के होटलों का बिल भरने, उनके देश विदेश के दौरों का खर्चा उठाने और उनकी गाड़ियों में तेल और रख रखाव के लिए खर्च किए गए।
अलगाववादियों की सुरक्षा में सरकार मोटी रकम खर्च करती है। सरकार की ओर से जेड सिक्योरिटी पाने वाले मीर वाइज उमर फारुख और सैयद अली शाह गिलानी जैसे नेताओं की सुरक्षा में भी सरकार का काफी खर्चा होता है।
जानकारी के अनुसार प्रमुख अलगाववादी नेताओं की सुरक्षा में सालभर लगभग 1500 सुरक्षाकर्मी रहते हैं। 2010 से 2015 तक कश्मीर में अलगाववादियों के घर की सुरक्षा के लिए 18 हजार से ज्यादा पुलिसकर्मियों को तैनात किया जा चुका है।
अलगाववादियों की सुविधा का 90 फीसदी खर्च उठाती है केंद्र सरकार
इनकी सैलरी और तमाम खर्चों के तौर पर पिछले पांच सालों में ही सरकार को 309 करोड़ रुपये खर्च करने पड़े। इसके अलावा अलगाववादियों को मिले पीएसओ (निजी सुरक्षा अधिकारी) पर भी सरकार ने 150 करोड़ से ज्यादा खर्च किया है।
उमर फारुख जैसे नेता की सुरक्षा में तो हर समय 20-24 के करीब सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से राज्य सरकार को विशेष सुरक्षा संबंधी खर्चों के लिए पिछले पांच सालों में 7200 करोड़ से ज्यादा खर्च किए गए हैं।
इसी मद से राज्य सरकार अलगाववादियों को दी जाने वाली सुविधाओं में पैसा खर्च करती है। जानकारी के अनुसार जम्मू कश्मीर के कुल 22 जिलों में सरकार ने 669 राजनीतिक और गैर राजनीतिक लोगों को विशेष सुरक्षा दे रखी है।
इनमें से 294 लोग गैर सूचीकृत हैं। सूत्रों के अनुसार इन्हीं गैर सूचीकृत लोगों में अलगाववादियों का नाम शामिल किया गया है। खास बात ये है कि इस सूची के तमाम लोगों पर सरकार कुल मिलाकर जितना खर्च करती है उससे ज्यादा खर्चा गिने चुने अलगाववादियों पर ही हो जाता है।
अलगाववादियों पर लगाम कसने की तैयारी में मोदी सरकार
जानकारी के अनुसार 1989 से अब तक अलगाववादियों की सुरक्षा में ही सरकार 7 हजार करोड़ से ज्यादा खर्च कर चुकी है। इसके अलावा अलगाववादी नेताओं के इलाज पर भी सरकार मोटा खर्च करती है।
सूत्रों के अनुसार अपनी बीमारी के चलते कई बार विदेश में इलाज कराने वाले सैयद अली शाह गिलानी का सारा खर्चा सरकार ने ही वहन किया है। खास बात ये है कि अलगाववादियों की मौज मस्ती पर खर्च होने वाली इस रकम का ज्यादातर हिस्सा केंद्र सरकार के जिम्मे ही पड़ता है।
जानकारों की मानें तो अलगाववादियों पर इतनी बड़ी रकम खर्च करने के पीछे सरकारों का यही मकसद रहा है कि वे केंद्र और राज्य सरकारों से सामंजस्य बनाकर चलते रहें। तमाम सरकारों की मंशा कश्मीर घाटी में विरोधी धडों का नेतृत्व करने वाले अलगाववादियों को जैसे तैसे थामे रखने की रही है जिससे वो विरोध की चिंगारी को और हवा न दें।
लेकिन कश्मीर में वर्तमान में लगातार बिगड़ते हालातों के बीच मौजूदा सरकार ने इस परिपाटी को तोड़ने की तैयारी कर ली है। जल्द ही इन अलगाववादियों को मिलने वाली सुविधाओं को एक झटके में ही बंद किया जा सकता है। प्रधानमंत्री मोदी ने भी इसके लिए अपनी सहमति दे दी है।