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Mission Covid Suraksha: ओमिक्रॉन पर लगेगी लगाम, एमआरएनए-आधारित वैक्सीन को ड्रग कंट्रोलर ने दी मंजूरी
Tue, 20 Jun 2023 05:36 PM IST
देव कश्यप
पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: देव कश्यप
Updated Tue, 20 Jun 2023 05:36 PM IST
सार
एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि GEMCOVAC-OM जेननोवा बायो फार्मास्युटिकल्स द्वारा स्वदेशी प्लेटफॉर्म तकनीक का उपयोग करके विकसित किया गया ओमिक्रॉन विशिष्ट एनआरएनए आधारित बूस्टर वैक्सीन है। इसे विकसित करने में बायोटेक्नोलॉजी विभाग ने भी सहयोग किया है।
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एनआरएनए वैक्सीन (सांकेतिक तस्वीर)।
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
बायोटेक्नोलॉजी विभाग ने मंगलवार को बताया कि भारत के ड्रग कंट्रोलर ने मिशन कोविड सुरक्षा के तहत जेननोवा बायोफार्मास्युटिकल्स (Gennova Biopharmaceuticals) द्वारा विकसित ओमिक्रॉन-विशिष्ट एमआरएनए-आधारित बूस्टर वैक्सीन को आपातकालीन उपयोग के लिए अनुमति दे दी है। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि बायोटेक्नोलॉजी विभाग (डीबीटी) ने जेननोवा के एमआरएनए-आधारित अगली पीढ़ी के वैक्सीन निर्माण की अवधारणा के प्रमाण से लेकर वुहान स्ट्रेन (Wuhan strain) के खिलाफ विकसित प्रोटोटाइप वैक्सीन के पहले चरण के क्लिनिकल ट्रायल तक विकसित करने में मदद की थी।
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बयान में कहा गया है कि जेमकोवैक-ओएम (GEMCOVAC-OM) जेननोवा बायोफार्मास्युटिकल्स द्वारा स्वदेशी प्लेटफॉर्म तकनीक का उपयोग करके विकसित किया गया ओमिक्रॉन विशिष्ट एनआरएनए आधारित बूस्टर वैक्सीन है। इसे विकसित करने में बायोटेक्नोलॉजी विभाग ने भी सहयोग किया है।
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जेननोवा बायोफार्मास्युटिकल्स लिमिटेड के सीईओ संजय सिंह ने कहा, जेमकोवैक-ओएम को भारत के औषधि महानियंत्रक कार्यालय (DCGI) के कार्यालय से आपातकालीन उपयोग की अनुमति मिलना कोरोना महामारी के लिए तैयार तकनीक को शुरू करने, आगे बढ़ाने और सक्षम करने के हमारे प्रयासों का प्रमाण है।
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जेमकोवैक-ओएम एक थर्मोस्टेबल वैक्सीन है जिसे अल्ट्रा-कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता नहीं होती है, जिससे इसे पूरे भारत में लगाना आसान है। यह टीका स्टोरेज के दौरान 2-8 डिग्री सेल्सियस पर भी स्थिर रहता है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत में 2-8 डिग्री सेल्सियस पर टीकों को रखने के लिए बुनियादी ढांचा आज भी मौजूद है और यह नवाचार (Innovation) मौजूदा स्थापित आपूर्ति-श्रृंखला के बुनियादी ढांचे के अनुरूप है। टीके को परिवहन और भंडारण के लिए अति-निम्न तापमान की आवश्यकता नहीं है।
सुई रहित इंजेक्शन (Needle-Free Injection) डिवाइस प्रणाली का उपयोग करके इस टीके को दिया जा सकता है। बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंस काउंसिल (बीआईआरएसी) में डीबीटी की समर्पित मिशन इंप्लीमेंटेशन यूनिट द्वारा भारतीय कोविड-19 वैक्सीन डेवलपमेंट मिशन 'मिशन कोविड सुरक्षा' के तहत इस परियोजना का समर्थन किया गया था, ताकि आगे के क्लिनिकल विकास और प्रोटोटाइप वैक्सीन को बढ़ाया जा सके। इस वैक्सीन को पिछले साल जून में आपातकालीन उपयोग की अनुमति मिली थी।
बायोटेक्नोलॉजी विभाग के सचिव राजेश एस गोखले और बीआईआरएसी (BIRAC) के अध्यक्ष ने कहा कि जेमकोवैक-ओएम को एमआरएनए-आधारित रोग एग्नॉस्टिक प्लेटफॉर्म तकनीक का उपयोग करके विकसित किया गया है, जिसका उपयोग अपेक्षाकृत कम समय में अन्य टीके बनाने के लिए किया जा सकता है। भारत ने अब इस रैपिड-डिजीज-एग्नोस्टिक प्लेटफॉर्म तकनीक का उपयोग करके कोविड-19 से लड़ने के लिए दो एमआरएनए टीके विकसित किए हैं।