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भारत भी चाहता है बातचीत करना, बशर्ते- पाकिस्तान पहले आतंक पर लगाम तो कसे

Fri, 21 Sep 2018 11:46 AM IST
शशिधर पाठक, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, नई दिल्ली Updated Fri, 21 Sep 2018 11:46 AM IST
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India also wants to negotiate provided that-Pakistan has to stop cross border terror
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भारत पाकिस्तान से मधुर रिश्ते और बातचीत चाहता है। विदेश मंत्रालय के उच्चपदस्थ सूत्र बताते हैं कि यह मंशा केवल पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की ही नहीं है, भारत की भी है। सूत्र बताते हैं कि कुछ इसी तरह के मजमून के साथ पाकिस्तान को भारत की तरफ से जवाबी पत्र दिए जाने की उम्मीद है, लेकिन इस पत्र में पाकिस्तान को उसके द्वारा किए गए वादे की भी याद दिलाई जाएगी। पाकिस्तान सीमापार की आतंकी घुसपैठ और अपनी जमीन से चल रहे आतंकी संगठनों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करे तो भारत बातचीत के लिए तैयार है। 

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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान का यह पत्र प्रधानमंत्री मोदी द्वारा उन्हें भेजे गए संदेश के बाद आया है। प्रधानमंत्री मोदी ने इमरान खान के प्रधानमंत्री बनने पर उन्हें शुभकामना संदेश भेजा था जिसमें उन्होंने दोनों देशों के बीच में अर्थपूर्ण (परिणाम देने वाली) तथा ठोस रिश्ते की इच्छा जताई थी। प्रधानमंत्री की इस इच्छा का सम्मान करते हुए पीएम इमरान खान ने पत्र लिखा है। 
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इमरान खान ने विश्व समुदाय को यह संदेश देने की कोशिश की है कि उनका देश भारत के साथ अच्छे रिश्तों का पक्षधर है। इसके लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक से इतर दोनों देशों के विदेश मंत्रियों (शाह महमूद कुरैशी और सुषमा स्वराज) के बीच बैठक की संभावना पर जोर दिया है और दोनों देशों के बीच में पिछले करीब तीन साल से ठप पड़ी विदेश सचिव स्तरीय वार्ता को बहाल करने का आग्रह किया है।
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भारत ने प्रधानमंत्री इमरान खान की पहली बात मान ली है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी से भेंट करेंगी। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच में तमाम मुद्दों पर चर्चा की संभावना है। इसमें करतारपुर साहिब कॉरिडोर का भी मुद्दा शामिल रहेगा। 

लेकिन विदेश सचिव स्तरीय वार्ता

भारत का साफतौर पर मानना है कि विदेश सचिव स्तरीय समग्र वार्ता की बहाली प्रक्रिया के पहले पाकिस्तान को कुछ ठोस कदम उठाने होंगे। सीमापार से होने वाली घुसपैठ और अपनी जमीन से चलने वाले आतंकी संगठनों पर प्रभावी और विश्वसनीय कार्रवाई करनी होगी। पठानकोट वायुसैनिक अड्डे पर आतंकी हमले के सूत्रधार आतंकी संगठनों पर ठोस कार्रवाई तथा मुंबई में 2008 में हुए आतंकी हमले के गुनहगारों को कानूनी के शीखंचे में लाना होगा।

विदेश मंत्रालय सूत्रों के अनुसार हमारी नीति में कोई बदलाव नहीं आया है। भारत हमेशा से पड़ोसी देशों से अच्छे रिश्तों का पक्षधर रहा है। नई दिल्ली शांतिपूर्ण, खुशहाल और स्थायी पाकिस्तान का पक्षधर है। भारत ने लगातार पाकिस्तान के साथ मधुर और शांतिपूर्ण रिश्ते का प्रयास किया है, लेकिन आतंकवाद और वार्ता दोनों को साथ-साथ नहीं चलाया जा सकता।

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शांति की यह पहल क्यों?

पाकिस्तान के ऊपर भारत के साथ शांति वार्ता करने का अंतरराष्ट्रीय दबाव है। अमेरिका ने आतंकवाद पर ठोस कार्रवाई का दबाव बढ़ाया है और पाकिस्तान को दी जानेवाली आर्थिक सहायता पर लगातार कैंची चला रहा है। 

पाकिस्तान और भारत के आपसी रिश्ते हमेशा संवेदनशील रहे हैं। दोनों देशों में चुनाव के बाद नई सरकार के सत्ता में आने के बाद रिश्तों की कूटनीतिक पिच पर नई शुरुआत होती रही है। 

भारत में अगले साल लोकसभा के चुनाव प्रस्तावित हैं। भारत-पाकिस्तान के बीच संबंध दोस्ताना रिश्ते, कश्मीर में आतंकवाद, अस्थिर वातावरण भी एक बड़ा मुद्दा है। दोनों देशों के बीच सौहार्दपूर्ण वातावरण, सीमापार की आतंकी घुसपैठ का रुकना और शांति न केवल जम्मू-कश्मीर राज्य में शांति को स्थिरता को बढ़ावा देगी, बल्कि देश के आंतरिक चुनाव के लिहाज से भी अहम रहेगा। 

भारत और पाकिस्तान दोनों अंतरराष्ट्रीय समुदाय को लगातार बातचीत, शांति प्रक्रिया और रिश्ते में स्थायित्व का प्रयास करने का संदेश देते रहना चाहते हैं। इसी क्रम में 2014 में लोकसभा चुनाव संपन्न होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ समेत सभी दक्षेस देशों के शिखर नेताओं को आमंत्रित किया था। वे आए भी थे। प्रधानमंत्री की सलाह पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने हार्ट ऑफ एशिया की बैठक से इतर पाकिस्तान में रिश्तों को पटरी पर लाने की नई नींव रख आई थीं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद अन प्रेसीडेंटेड तरीके से सभी प्रोटोकॉल तोड़ते हुए नवाज शरीफ का निमंत्रण कुबूल किया और सीधे उनके पारिवारिक समारोह में पहुंच गए थे। लेकिन पठानकोट वायुसैनिक अड्डे पर आतंकी हमले ने सभी प्रयासों पर पानी फेर दिया। 

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