मौजूदा वित्त वर्ष में 6.9% रह सकती है भारत की विकास दर
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मौजूदा वित्त वर्ष में भारत की जीडीपी विकास दर 6.9 फीसदी रहने की उम्मीद है। विकास दर के वित्त वर्ष 2017-18 में बेहतर होकर 7.2 फीसदी हो जाने की संभावना है। यह बात बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच (बोफाएमएल) की रिपोर्ट में कही गई। बोफाएमएल ने शोध पत्र में कहा कि इस अनुमान के पीछे नोटबंदी के प्रभाव हैं। आगे कहा कि भारत की यह विकास दर अभी भी अन्य ब्रिक्स देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) से ज्यादा है। मंगलवार को सरकार ने मौजूदा वित्त वर्ष में जीडीपी विकास दर के उम्मीद से ज्यादा 7.1 फीसदी रहने का अनुमान जताया था।
केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने अक्तूबर-दिसंबर (वह तिमाही जिसमें नोटबंदी हुई थी) के लिए विकास दर 7 फीसदी रहने का अनुमान जताया, जो दूसरी तिमाही में 7.4 फीसदी और पहली तिमाही में 7.2 फीसदी थी। बोफाएमएल ने कहा कि कर्ज दरों को घटाया जाना अर्थव्यवस्था में सुधार लाने के लिए जरूरी है और बैंकों द्वारा सितंबर तक ऋण दरों में 50-70 आधार अंकों की कटौती किए जाने की उम्मीद है। रिपोर्ट में कहा गया कि अर्थव्यवस्था में साइक्लिीकल रिकवरी के लिए सुधारों से ज्यादा ऋण दरें घटाए जाने की जरूरत है। सुधारों से लंबे समय तक बेहतर विकास दर मिल सकती है, लेकिन अभी मुख्य चुनौती विकास दर की मौजूदा क्षमता का वापस लाना है।