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बचपन में ही जिंदगी की सीख दे रही है 'इरा की कहानियां'

Fri, 10 Aug 2018 10:04 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 10 Aug 2018 10:04 AM IST
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 In childhood teaching lessons of life is 'stories of IRA'
इरा की कहानियां

बचपन बहुत ही निराला होता है। जिसमें दादी-नानी, बाबा- नाना अपने नाती पोतों को खूब सारी कहानियां, कविताएं सुनाते हैं और वो जिंदगी भर उन किस्से कहानियों में अपने जीने का सार ढूंढ लेते हैं और  गुदगुदाते हैं।

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 ये वही कहानियां और कविताएं हैं जो जिंदगी में आने वाली हर परेशानियों से निकलने का हौंसला भी देती हैं और जिंदगी जीने का सबब भी। डिजिटल युग में बच्चों की किस्से कहानियां तो लगभग गुम हो चुके हैं लेकिन प्रिंट में भी बच्चों की कहानियां और कविताओं का जैसे अकाल ही पड़ गया है। ऐसे में प्रणव की लिखी इरा की कहानियां अंधेरे कमरे में वो चिराग है जिसे बालमन बरबस पसंद करेगा। 12 चैप्टर में उन्होंने न केवल बच्चों को उनके मामा-मामी के प्यार के करीब लाने की कोशिश की है बल्कि बातों-बातों में कसरत की महत्ता को भी समझाया है।
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 इन दिनों छोटे-छोटे बच्चों में भी डिप्रेशन देखा जा रहा है ऐसे में उनकी दो कविताएं चौथे नंबर पर 'हर दिन खास है' और बारहवें नंबर पर 'हर पल है अनमोल ' बातों बातों में बच्चों को कई सीख दे जाती है। हर पल है अनमोल में प्रणव 'इरा' से कहते हैं,'ये जीवन है अनमोल बड़ा,हर पल का इसमें मोल बड़ा, वो ही आगे बढ़ पायेगा जो मेहनत से न कतराएगा'
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प्रणव आगे बच्ची को खेल-खेल में समझाते हैं वक्त का क्या है, कब ठहरा है, कभी ये अच्छा, कभी बुरा है, मेहनतकश इन्सां के आगे, मुश्किल वक्त भी कब टिकता है। अगर ये पंक्तियां आज उस बच्ची या बच्चे को याद रह जाती है तो अपने मुश्किल वक्त में इसे जरूर दुहराता है। जैसे आज भी बच्चे गाते हैं चंदा मामा दूर के पुए पकाएं पूर के ...आप खाएं थाली में मुन्नी को दे प्याली में। 


35 पन्नो की इस किताब में हर एक कविता न्नहे -मुन्ने के लिए उपयोगी साबित होने वाली है। प्रणव समाजशास्त्र में पढाई की है और एमबीए किया है। किताब इरा की कहानियां की एक और अच्छी बात है उसके आखिरी छह पन्ने जिसमें रंग भरने के लिए  चित्र भी दिए गए हैं। जिसे बच्चे बहुत पसंद करने वाले हैं। इस पुस्तक की कीमत 150 रुपये है और इसे नोशनप्रेस ने छापा है। 

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