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1998 में उत्तर प्रदेश में बनी थी महाराष्ट्र जैसी स्थिति, सुप्रीम कोर्ट ने दिया था ये फैसला

Mon, 25 Nov 2019 09:04 AM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Mon, 25 Nov 2019 09:04 AM IST
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In 1998 SC ordered floor test in UP when governor sacked Kalyan Singh and appoint Jagdambika Pal
कल्याण सिंह-जगदंबिका पाल (फआइल फोटो) - फोटो : PTI

महाराष्ट्र में जारी सियासी संघर्ष पर विराम लगाने के लिए बहुमत परीक्षाण करवाना एक विकल्प हो सकता है क्योंकि इससे परेशानियों का हल मिलने की उम्मीद है। कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना लगातार कह रही है कि उनके पास सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत है और नवनियुक्त सरकार अल्पमत में हैं। शनिवार को सभी को चौंकाते हुए देवेंद्र फडणवीस ने दोबारा राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली। वहीं भाजपा की विरोधी पार्टी एनसीपी के वरिष्ठ नेता अजित पवार ने उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।

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महाराष्ट्र के सियासी ड्रामे पर सोमवार को उच्चतम न्यायालय अपना फैसला सुनाने वाला है। इसी बीच हम आपको याद दिलाते हैं 1998 की वो घटना जब उत्तर प्रदेश में इसी तरह की स्थिति बनी थी और शीर्ष अदालत ने बहुमत परीक्षण कराने का आदेश दिया था। उस समय राज्यपाल रोमेश भंडारी ने कल्याण सिंह को मुख्यमंत्री पद से बर्खास्त कर दिया था और कांग्रेस नेता जगदंबिका पाल को उनकी जगह मुख्यमंत्री नियुक्त किया गया था।
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1998 में जगदंबिका पाल वर्सेज भारतीय संघ और अन्य मामले में उच्चतम न्यायालय ने बहुमत परीक्षण का आदेश दिया। जिसमें कल्याण सिंह के समर्थन में 225 और जगदंबिका पाल को 196 वोट मिले। स्पीकर के आचरण की बहुत आलोचना हुई थी क्योंकि उन्होंने 12 सदस्यों को दल-बदल कानून के तहत अयोग्य ठहराए जाने के मामले में दिए अपने फैसले को रद्द कर दिया था।

हालांकि जब 12 सदस्यों ने कल्याण सिंह के समर्थन में वोट किया और उनके वोटो को अंत में उन्हें घटाया गया तब भी सिंह के पास सदन में पूर्ण बहुमत था। इससे पहले कल्याण सिंह के बहुमत परीक्षण के ऑफर को राज्यपाल ने पहले खारिज कर दिया था। हालांकि वह दोबारा राज्य के मुख्यमंत्री बने। 

राज्यपाल के पास है विशेषाधिकार

यदि एक से ज्यादा लोग सरकार बनाने का दावा करते हैं और बहुमत स्पष्ट नहीं होता है तो राज्यपाल यह देखने के लिए एक विशेष सत्र बुला सकते हैं। ताकि यह देखा जा सके कि किसके पास बहुमत है। कुछ विधायक अनुपस्थित हो सकते हैं या वोट न देना स्वीकार कर सकते हैं। 

ऐसी स्थिति में बहुमत की गणना वर्तमान और मतदान के आधार पर की जाती है। महाराष्ट्र की वर्तमान स्थिति में फडणवीस पहले ही मुख्यमंत्री और अजित पवार उप-मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ले चुके हैं। वहीं कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना ने उनके खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया है।

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