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नया खतरा: आतंकवाद के दौर की विस्फोट तकनीक इस्तेमाल कर रहे हैं नौसिखिये आतंकी 

Sat, 25 Dec 2021 08:48 PM IST
Amit Mandal जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली। 
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली।  Published by: Amit Mandal Updated Sat, 25 Dec 2021 08:48 PM IST
सार

एक्सपर्ट के मुताबिक, कम क्षमता वाले विस्फोटक जैसे पोटाशियम, चारकोल, आर्गेनिक सल्फाइड, नाइट्रेट और ब्लैक पाउडर आदि से आईईडी और टिफिन बम तैयार कर लिए जाते हैं।

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IED Blast: terrorists are using blast techniques of the era of terrorism
आईईडी धमाका (file photo) - फोटो : ANI

विस्तार

देश में आतंकी संगठनों और माओवादियों के सामने नई भर्ती का संकट खड़ा हो गया है। कश्मीर, पंजाब, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों या उत्तर पूर्व में जितने भी राष्ट्र विरोधी समूह सक्रिय हैं, अब वे सीधे तौर पर सुरक्षा बलों के साथ टकराने से बचने लगे हैं। अगर कहीं पर एंबुश (घात लगाकर हमला करना) होता है तो भी उसमें विस्फोटकों का ही अधिक इस्तेमाल होता है। सीधी मुठभेड़ में उन्हें सुरक्षा बलों के हाथों भारी नुकसान उठाना पड़ता है। इसके चलते अब ये संगठन पंजाब की मिलिटेंसी के दौर की विस्फोट तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। देश में छह सौ से अधिक ब्लास्ट मामलों की जांच कर चुके एक अनुभवी बैलिस्टिक एक्सपर्ट कहते हैं कि नौसिखिये आतंकी आजकल 'आईईडी/टिफिन' बम का इस्तेमाल करने लगे हैं। नक्सल में तो बच्चों के जरिए ऐसे विस्फोट कराए जा रहे हैं। लुधियाना ब्लास्ट में 'कंबिनेशन/आरडीएक्स' के संकेत मिल रहे हैं। अगर जांच इसी थ्योरी पर आगे बढ़ती है तो निश्चित तौर पर यह भारतीय सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ी चुनौती है।

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खत्म हो रहा मुठभेड़ का दौर 
मौजूदा समय में भी सरकार के साथ अटैच एक प्रख्यात बैलिस्टिक एक्सपर्ट ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अब मुठभेड़ का दौर खत्म हो रहा है। जब सौ मील दूर बैठकर विस्फोट किया जा सकता है तो आतंकी, सुरक्षा बलों के सामने मरने के लिए क्यों आएंगे। विस्फोट करना आसान काम नहीं है। इसमें टाइमिंग बहुत अहम प्वाइंट है। अगर विस्फोट तैयार करने वाले व्यक्ति एक्सपर्ट हैं तो ही वह सुरक्षित तरीके से ब्लास्ट कर सकता है। अन्यथा, उसके खुद इसकी चपेट में आने के आसार बने रहते हैं। अस्सी और नब्बे के दशक में भी आतंकी, पाकिस्तान या अफगानिस्तान से विस्फोटक तैयार करने की ट्रेनिंग लेकर आते रहे हैं। कश्मीर और पंजाब में आज भी पाकिस्तान से ट्रेनिंग लेकर आए आतंकी मौजूद हैं। 
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उच्च विस्फोटक आरडीएक्स/पीईटीएन आसानी से नहीं मिलते हैं। कम क्षमता वाले विस्फोटक जैसे पोटाशियम, चारकोल, आर्गेनिक सल्फाइड, नाइट्रेट और ब्लैक पाउडर आदि से आईईडी और टिफिन बम तैयार कर लिए जाते हैं। पीडब्लूडी एवं माइनिंग जैसे विभाग तो जिलेटिन स्टिक का इस्तेमाल करते रहे हैं। इसकी मदद से इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस 'आईईडी', टिफिन बम और दूसरे तरह के प्रेशर बमों को तैयार किया जा सकता है। आतंकी व नक्सली, यही तरीका प्रयोग में ला रहे हैं। बतौर बैलिस्टिक एक्सपर्ट, टिफिन बम तो बहुत पुराना तरीका है। पंजाब में मिलिटेंसी के दौर में टिफिन बम बहुत बड़े स्तर पर प्रयोग किए गए थे। साइकिल के करियर पर टिफिन लटका लेते थे। किसी को शक नहीं होता था। दुकान, पार्किंग या टारगेट स्थल पर साइकिल खड़ी कर देते थे। रिमोट या टाइमर से ब्लास्ट हो जाता था। 
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ड्राई बैटरी सेल का इस्तेमाल कर रहे हैं आतंकी
मौजूदा दौर में ऐसे ब्लास्ट तैयार करने के लिए आतंकियों के पास कंटेनर, केमिकल, डेटोनेटर, इनिशिएटर और वायर सब कुछ होता है। केवल उन्हें ट्रेंड होना चाहिए। कुछ मामलों की जांच में सामने आया है कि आतंकी संगठन, डेटोनेटर को पावर देने के लिए ड्राई बैटरी सेल का इस्तेमाल कर रहे हैं। स्पेशल डेटोनेटर भी आने लगा है। कश्मीर में विस्फोट के केस की जांच में सामने आया है कि स्पेशल डेटोनेटर में घड़ी का सेल लगाया जा रहा है। अगर ज्यादा वोल्टेज की जरूरत है तो वहां तीन चार सेल जोड़ देते हैं। मार्केट में स्विच आसानी से उपलब्ध हो जाता है। आतंकवाद के दौर आतंकी बहुत ट्रेंड होते थे। सेल का इस्तेमाल बहुत सावधानी से करते थे। आजकल आतंकियों को टारगेट मिल रहा है, मगर ट्रेनिंग के अभाव में वे मार खा जाते हैं। ब्लास्ट के लिए मोबाइल फोन व कॉर्डलेस फोन का इस्तेमाल होता रहा है।

ब्लास्ट की घटना में टाइमिंग एक बड़ा फैक्टर
बैलिस्टिक एक्सपर्ट के अनुसार, ब्लास्ट की घटना में टाइमिंग एक बड़ा फैक्टर होता है। अगर ये ठीक नहीं रहा तो विस्फोट करने वाला खुद भी मारा जाता है। आतंकी, आजकल 1.95 डेस्क टाइमर का इस्तेमाल कर रहे हैं। मगर इन सबके लिए ट्रेनिंग आवश्यक है। एबीसीडी स्विच की जगह पर दूसरी टर्म आ गई है। अगर एक्सपर्ट नहीं है तो टाइम आगे पीछे हो जाता है। समय पर ब्लास्ट नहीं होता। ये सब सुरक्षा बलों के लिए बड़ी चुनौती है। अगर छोटे छोटे आतंकी संगठन, स्लीपर सेल और नक्सली, देश में आसानी से उपलब्ध पदार्थों से 'आईईडी', 'टिफिन' बम और दूसरे विस्फोटक तैयार करने लगे तो निश्चित तौर पर ये एक बड़ा खतरा होगा।


लुधियाना ब्लास्ट के बारे में बैलिस्टिक एक्सपर्ट का कहना है कि ये कंबिनेशन ब्लास्ट है। आरडीएक्स/ब्लैक पाउडर का इस्तेमाल हुआ है, ऐसी संभावना नजर आ रही है। इसमें केवल कम क्षमता वाले पदार्थ नहीं थे, बल्कि हाई एक्सप्लोसिव भी थे। जांच रिपोर्ट आने से पहले ज्यादा कुछ कहना ठीक नहीं होगा। बता दें कि लुधियाना कोर्ट परिसर में हुए ब्लास्ट में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हुए हैं।

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