{"_id":"69e03c2f340d939dd60f7818","slug":"iaea-grossi-iran-nuclear-program-deal-inspection-required-us-warning-ambitious-program-2026-04-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"IAEA: ईरानी परमाणु कार्यक्रम पर बोले आईएईए प्रमुख- तेहरान बेहद महत्वकांक्षी, भ्रम में न पड़े अमेरिका","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
IAEA: ईरानी परमाणु कार्यक्रम पर बोले आईएईए प्रमुख- तेहरान बेहद महत्वकांक्षी, भ्रम में न पड़े अमेरिका
Thu, 16 Apr 2026 07:02 AM IST
Nirmal Kant
एजेंसी, सियोल।
एजेंसी, सियोल।
Published by: Nirmal Kant
Updated Thu, 16 Apr 2026 07:02 AM IST
सार
IAEA: आईएईए प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सख्त और व्यापक जांच के बिना अमेरिका-ईरान समझौता संभव नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि बिना निरीक्षण और सत्यापन तंत्र के कोई भी समझौता केवल भ्रम साबित होगा। पढ़िए रिपोर्ट-
विज्ञापन
आईएईए के महानिदेशक मारियानो राफेल ग्रॉसी
- फोटो : एक्स/मारियानो राफेल ग्रॉसी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के महानिदेशक मारियानो राफेल ग्रॉसी ने कहा है कि पश्चिम एशिया में युद्ध खत्म करने के लिए अमेरिका-ईरान के बीच किसी संभावित समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम की जांच के लिए व्यापक उपाय शामिल किए जाने चाहिए। ग्रॉसी ने कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम की सख्त और विस्तृत जांच की व्यवस्था के बिना कोई भी समझौता सिर्फ एक भ्रम साबित होगा।
संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी एजेंसी के प्रमुख ने साफ कहा है कि आईएईए निरीक्षकों को इसके लिए यदि पूरी पहुंच नहीं मिलती, तो ऐसा समझौता वास्तविक नहीं होगा। सियोल में संवाददाताओं से बात करते हुए ग्रॉसी ने कहा, 'ईरान का परमाणु कार्यक्रम बहुत महत्वाकांक्षी और व्यापक है, इसलिए इन सभी पहलुओं के लिए आईएईए निरीक्षकों की उपस्थिति अनिवार्य होगी। उन्होंने कहा कि परमाणु प्रौद्योगिकी पर किसी भी समझौते के लिए 'बेहद विस्तृत सत्यापन तंत्र' की जरूरत होती है।
ईरान के परमाणु ठिकानों तक एजेंसी की पहुंच नहीं
इससे पहले फरवरी की अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की एक गोपनीय रिपोर्ट के अनुसार, जून में 12 दिनों के युद्ध के दौरान इस्राइल और अमेरिका द्वारा बमबारी किए गए परमाणु ठिकानों तक ईरान ने आईएईए को पहुंच नहीं दी। रिपोर्ट में कहा गया कि एजेंसी यह सत्यापित नहीं कर सकती कि ईरान ने संवर्धन से संबंधित सभी गतिविधियां बंद कर दी हैं या प्रभावित परमाणु सुविधाओं में ईरान के यूरेनियम भंडार का आकार कितना बड़ा है।
विज्ञापन
ईरान लंबे समय से अपने कार्यक्रम को शांतिपूर्ण बताता आया है। वहीं, आईएईए और पश्चिमी देशों का दावा है कि तेहरान के पास 2003 तक संगठित परमाणु हथियार कार्यक्रम था। आईएईए के अनुसार, ईरान के पास 60% तक संवर्धित 440.9 किलोग्राम यूरेनियम मौजूद है। ग्रॉसी ने कहा, ईरान अपने कार्यक्रम को हथियार बनाने की दिशा में ले जाता है, तो यह भंडार 10 परमाणु बम बनाने योग्य होगा।
ग्रॉसी ने बताया कि उत्तर कोरिया के परमाणु ठिकानों पर गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं। उनकी टिप्पणी उन विदेशी पर्यवेक्षकों के नजरिये से मेल खाती है, जो मानते हैं कि वर्ष 2019 में अमेरिका के साथ कूटनीति विफल होने के बाद से उत्तर कोरिया ने अपने मुख्य योंगब्योन परमाणु परिसर का विस्तार किया है और अतिरिक्त यूरेनियम संवर्धन केंद्र बनाने के लिए कदम उठाए हैं। पिछले सितंबर में, दक्षिण कोरिया के एकीकरण मंत्री चुंग डोंग-यंग ने कहा था कि उत्तर कोरिया चार यूरेनियम संवर्धन केंद्र संचालित कर रहा है और वे प्रतिदिन काम कर रहे हैं। घटनाक्रम से संकेत मिलता है कि आईएईए की कड़ी शर्तें अमेरिका-ईरान के बीच किसी संभावित समझौते को प्रभावित कर सकती हैं।
ये भी पढ़ें: पश्चिम एशिया: अमेरिकी नाकाबंदी से थम गई तेहरान की आर्थिक नब्ज, गोली चलाए बिना ईरान को घुटनों पर लाने की रणनीति
राफेल ग्रॉसी का यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि ईरान के साथ वार्ता का दूसरा दौर अगले दो दिनों में हो सकता है। ट्रंप प्रशासन ने कहा है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना युद्ध का एक प्रमुख लक्ष्य है। वहीं, ईरान पहले कह चुका है कि वह ऐसे हथियार नहीं बना रहा, लेकिन उसने अपने परमाणु कार्यक्रम पर किसी भी प्रतिबंध को अस्वीकार कर दिया है। पिछले सप्ताहांत पाकिस्तान में दोनों देशों के बीच वार्ता के पहले दौर में कोई समझौता नहीं हो सका था। व्हाइट हाउस ने कहा है कि ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाएं विवाद का मुख्य बिंदु रहीं। हालांकि, बंद कमरे में हुई वार्ता की संवेदनशीलता के कारण नाम न बताने की शर्त पर एक ईरानी राजनयिक अधिकारी ने इस बात से इनकार किया कि परमाणु महत्वाकांक्षाओं के कारण वार्ता विफल हुई।
विज्ञापन
संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी एजेंसी के प्रमुख ने साफ कहा है कि आईएईए निरीक्षकों को इसके लिए यदि पूरी पहुंच नहीं मिलती, तो ऐसा समझौता वास्तविक नहीं होगा। सियोल में संवाददाताओं से बात करते हुए ग्रॉसी ने कहा, 'ईरान का परमाणु कार्यक्रम बहुत महत्वाकांक्षी और व्यापक है, इसलिए इन सभी पहलुओं के लिए आईएईए निरीक्षकों की उपस्थिति अनिवार्य होगी। उन्होंने कहा कि परमाणु प्रौद्योगिकी पर किसी भी समझौते के लिए 'बेहद विस्तृत सत्यापन तंत्र' की जरूरत होती है।
विज्ञापन
ईरान के परमाणु ठिकानों तक एजेंसी की पहुंच नहीं
इससे पहले फरवरी की अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की एक गोपनीय रिपोर्ट के अनुसार, जून में 12 दिनों के युद्ध के दौरान इस्राइल और अमेरिका द्वारा बमबारी किए गए परमाणु ठिकानों तक ईरान ने आईएईए को पहुंच नहीं दी। रिपोर्ट में कहा गया कि एजेंसी यह सत्यापित नहीं कर सकती कि ईरान ने संवर्धन से संबंधित सभी गतिविधियां बंद कर दी हैं या प्रभावित परमाणु सुविधाओं में ईरान के यूरेनियम भंडार का आकार कितना बड़ा है।
विज्ञापन
ईरान लंबे समय से अपने कार्यक्रम को शांतिपूर्ण बताता आया है। वहीं, आईएईए और पश्चिमी देशों का दावा है कि तेहरान के पास 2003 तक संगठित परमाणु हथियार कार्यक्रम था। आईएईए के अनुसार, ईरान के पास 60% तक संवर्धित 440.9 किलोग्राम यूरेनियम मौजूद है। ग्रॉसी ने कहा, ईरान अपने कार्यक्रम को हथियार बनाने की दिशा में ले जाता है, तो यह भंडार 10 परमाणु बम बनाने योग्य होगा।
ग्रॉसी ने बताया कि उत्तर कोरिया के परमाणु ठिकानों पर गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं। उनकी टिप्पणी उन विदेशी पर्यवेक्षकों के नजरिये से मेल खाती है, जो मानते हैं कि वर्ष 2019 में अमेरिका के साथ कूटनीति विफल होने के बाद से उत्तर कोरिया ने अपने मुख्य योंगब्योन परमाणु परिसर का विस्तार किया है और अतिरिक्त यूरेनियम संवर्धन केंद्र बनाने के लिए कदम उठाए हैं। पिछले सितंबर में, दक्षिण कोरिया के एकीकरण मंत्री चुंग डोंग-यंग ने कहा था कि उत्तर कोरिया चार यूरेनियम संवर्धन केंद्र संचालित कर रहा है और वे प्रतिदिन काम कर रहे हैं। घटनाक्रम से संकेत मिलता है कि आईएईए की कड़ी शर्तें अमेरिका-ईरान के बीच किसी संभावित समझौते को प्रभावित कर सकती हैं।
ये भी पढ़ें: पश्चिम एशिया: अमेरिकी नाकाबंदी से थम गई तेहरान की आर्थिक नब्ज, गोली चलाए बिना ईरान को घुटनों पर लाने की रणनीति
राफेल ग्रॉसी का यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि ईरान के साथ वार्ता का दूसरा दौर अगले दो दिनों में हो सकता है। ट्रंप प्रशासन ने कहा है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना युद्ध का एक प्रमुख लक्ष्य है। वहीं, ईरान पहले कह चुका है कि वह ऐसे हथियार नहीं बना रहा, लेकिन उसने अपने परमाणु कार्यक्रम पर किसी भी प्रतिबंध को अस्वीकार कर दिया है। पिछले सप्ताहांत पाकिस्तान में दोनों देशों के बीच वार्ता के पहले दौर में कोई समझौता नहीं हो सका था। व्हाइट हाउस ने कहा है कि ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाएं विवाद का मुख्य बिंदु रहीं। हालांकि, बंद कमरे में हुई वार्ता की संवेदनशीलता के कारण नाम न बताने की शर्त पर एक ईरानी राजनयिक अधिकारी ने इस बात से इनकार किया कि परमाणु महत्वाकांक्षाओं के कारण वार्ता विफल हुई।
विज्ञापन
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन