फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   How will Muslims population increase then Hindus

किस हिसाब से मुसलमान, हिंदुओं से अधिक होंगे?

Tue, 21 Feb 2017 08:14 PM IST
राजेश प्रियदर्शी डिजिटल एडिटर / बीबीसी हिंदी
राजेश प्रियदर्शी डिजिटल एडिटर / बीबीसी हिंदी Updated Tue, 21 Feb 2017 08:14 PM IST
विज्ञापन
How will Muslims population increase then Hindus
"मुसलमानों के घर मुसलमान पैदा होते हैं और बाकियों के घर बच्चे", कुप्रचार से नाराज एक मुसलमान की कही ये बात याद आ गई। गृह राज्यमंत्री किरन रिजिजू ने चुनावी माहौल में वैसा ही कुछ कहा जैसा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेता अक्सर कहते रहे हैं,
विज्ञापन


उन्होंने ट्वीट किया, 'हिंदुओं की आबादी घट रही है और अल्पसंख्यक बढ़ रहे हैं।' हालाँकि रिजूजू का बयान अरूणाचल प्रदेश से जुड़ा है जहाँ पिछले कुछ सालों में ईसाई आबादी काफी तेजी से बढ़ी है जिसके बारे में वे चिंता जता रहे थे।
विज्ञापन


बहरहाल, जनगणना के सबसे ताजा आंकड़े बताते हैं कि भारत में हिंदुओं ही नहीं, मुसलमानों, ईसाइयों, बौद्धों, सिखों और जैनों यानी हर समुदाय की आबादी बढ़ने की दर घटी है।
विज्ञापन
विज्ञापन

मुसलमानों की आबादी

How will Muslims population increase then Hindus
कुल आबादी में गिरावट-बढ़ोतरी और उसके बढ़ने की दर में बदलाव, दो अलग-अलग चीजें हैं। मतलब ये कि भारत में हिंदू और मुसलमान सहित सभी समुदायों की आबादी बढ़ी है, लेकिन सभी समुदायों की जनसंख्या जिस रफ्तार से बढ़ रही थी उसमें कमी आई है। दिलचस्प और जरूरी सच ये भी है कि पिछले दस सालों में मुसलमानों की जनसंख्या में बढ़ोतरी की दर में, हिंदुओं के मुकाबले ज्यादा बड़ी कमी आई है।

जरा गौर करें, 2011 की गिनती के मुताबिक, हिंदुओं की जनसंख्या वृद्धि दर 16.76 प्रतिशत है जबकि 10 साल पहले ये दर 19.92 फीसद थी। अब इसी तुलना में मुसलमानों की आबादी बढ़ने की दर पर गौर करें जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुताबिक गहरी चिंता का कारण है, देश में पहले मुसलमानों की आबादी 29.5 प्रतिशत की दर से बढ़ रही थी जो अब गिरकर 24.6 फीसद हो गई है।

मतलब ये कि मुसलमानों की आबादी में बढ़ोतरी में तकरीबन पाँच प्रतिशत की गिरावट आई है जबकि हिंदू आबादी के बढ़ने की रफ्तार करीब तीन प्रतिशत गिरी है। ये बात बिल्कुल सच है कि परंपरागत तौर पर मुसलमानों की जनसंख्या वृद्धि दर हिंदुओं से अधिक रही है और आज भी 16.76 के मुकाबले 24.6 है लेकिन ये डर फैलाना या तो अज्ञान है या फिर षड्यंत्र कि मुसलमान आबादी 2035 तक हिंदुओं से अधिक हो जाएगी।
 

नफरत भी, नादानी भी

How will Muslims population increase then Hindus
हिंदू आबादी के बढ़ने की दर में गिरावट अगर मुसलमानों से कम है, और देश में लगभग 97 करोड़ हिंदू हैं तो किस गणित से तकरीबन 17 करोड़ मुसलमान उनसे आगे निकल जाएँगे? ये साबित करने की कोशिश करना कि मुसलमान जान-बूझकर आबादी बढ़ा रहे हैं या इसके पीछे कोई धार्मिक होड़ है कि वे हिंदुओं से आगे निकल जाएँ, ये नफरत भरी नादान सोच का नतीजा है।

वक्त-जरूरत के हिसाब से संघ से जुड़े लोग मुसलमानों की बढ़ती आबादी पर चिंता जताते हैं, कभी इसकी वजह मुसलमान औरतों का दस बच्चे पैदा करना बताया जाता है तो कभी बांग्लादेशी घुसपैठ। जनसंख्या का दबाव एक गंभीर समस्या है लेकिन संघ से जुड़े लोग सिर्फ मुसलमान आबादी को समस्या मानते हैं, तेजी से बढ़ती जनसंख्या को नहीं, अगर ऐसा होता तो बार-बार हिंदुओं को अधिक बच्चे पैदा करने की सलाह नहीं देते।

बांग्लादेशी घुसपैठ भी एक वास्तविक समस्या है लेकिन उसे रोकने की कोशिश से ज्यादा ध्यान उसका डर दिखाने पर दिया गया है। बिहार-उत्तर प्रदेश के हिंदुओं में आबादी बढ़ने की दर, केरल-तमिलनाडु के मुसलमानों की जनसंख्या वृद्धि दर से दोगुना तक अधिक है। तो क्या मान लिया जाए कि इन राज्यों के हिंदुओं ने साक्षी महाराजों की ज्यादा बच्चे पैदा करने की अपील पर अमल किया है?

मुसलमानों में कितना पिछड़ापन?

How will Muslims population increase then Hindus
केरल की मिसाल से साफ समझा जा सकता है, जहाँ दस सालों में मुसलमानों की आबादी सिर्फ 12.8 प्रतिशत बढ़ी, जो राष्ट्रीय औसत (17.7) से पाँच प्रतिशत कम, हिंदू जनसंख्या वृद्धि दर (16.7) से चार प्रतिशत कम और मुसलमानों की राष्ट्रीय वृद्धि दर (24.6) का तकरीबन आधा है। केरल के मुसलमान कम मुसलमान हैं? दरअसल, जनसंख्या में बढ़ोतरी की दर कई बातों पर निर्भर करती है जैसे महिलाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं की हालत और गर्भनिरोधक उपायों का हासिल होना, न कि धर्म पर।

सरकार की फाइलों में बंद नहीं, बल्कि ये खुला सच है कि मुसलमानों में पिछड़ापन है, शिक्षा और रोजगार का अभाव है जिसका सीधा संबंध जनसंख्या में बढ़ोतरी से है। खेती और हुनर के कामों में लगे परिवारों में ज्यादा बच्चे आम हैं क्योंकि जितने हाथ उतनी कमाई। ये समझने के लिए बहुत पढ़ा-लिखा होने की जरूरत नहीं कि देश में मुसलमानों की क्या हालत है? आठवीं क्लास की एनसीईआरटी की किताब 'सोशल एंड पॉलिटिकल लाइफ' का पेज नंबर 88 देखिए,

जो हिंदू और मुसलमानों की आर्थिक-शैक्षिक हालत का नजारा दिखाता है। देश के ज्यादातर मुसलमान कच्चे घरों में रहते हैं, उनमें साक्षरता की दर हिंदुओं से कम है, सरकारी नौकरियों में उनकी भागीदारी आबादी के अनुपात में बहुत कम है। आठवीं में पढ़ने वाले जानते हैं कि ये आकंड़े पिछड़ापन और उसके पीछे छिपी उपेक्षा को दिखाते हैं, ये सच बदलना जरा मुश्किल काम है। ज्यादा आसान होगा, किताब में बदलाव।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed