क्या सांसद निधि योजना रोकने से कोरोना महामारी से लड़ने में मिलेगी मदद?
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अप्रैल महीने की शुरुआत में केंद्र सरकार ने सांसद निधि योजना पर रोक लगाने का एलान किया था। केंद्र सरकार की तरफ से सांसद निधि की राशि को कोविड-19 से लड़ने के लिए इस्तेमाल किए जाने पर जोर दिया गया।
केंद्र सरकार के एलान के बाद उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने भी एक साल के लिए विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास योजना को रद्द करने का फैसला लिया। इस फैसले के बाद राज्य सरकार अब अतिरिक्त 1,500 करोड़ रुपये की राशि कोरोना वायरस से लड़ने में इस्तेमाल करेगी।
सांसद निधि योजना क्या है?
सांसद निधि योजना केंद्र सरकार की तरफ से चलाई गई स्कीम है जिसके तहत सांसद (राज्यसभा, लोकसभा या मनोनीत) अपने संसदीय क्षेत्र में विकास कार्य कराता है। केंद्र सरकार की तरफ से हर सांसद को सालाना पांच करो़ड़ की राशि मुहैया कराई जाती है।
केंद्र की तरह राज्य भी अपने विधायकों को स्थानीय क्षेत्र विकास योजना के तहत राशि प्रदान करते हैं। राज्यों की बात करें तो दिल्ली में विधायकों को सबसे ज्यादा प्रदान की जाती है जो कि दस करोड़ सालाना है।
जबकि पंजाब और केरल यह राशि पांच करोड़ सालाना है, असम, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, कर्नाटक में यह राशि दो करोड़ सालाना और उत्तर प्रदेश में यह राशि दो करोड़ से हाल ही में बढ़कर तीन करोड़ प्रति विधायक सालाना हुई है।
योजना पर रोक लगाने से कितनी मदद मिलेगी?
सांसद निधि योजना पर रोक लगाने से केंद्र सरकार को कोविड-19 से लड़ने के लिए 7,800 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि मिलेगी। अगर तुलना की जाए तो ये राशि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत गरीबों के लिए लाए गए राहत पैकेज 1.70 लाख करोड़ रुपये का सिर्फ 4.5 फीसद है।
इस फैसले पर विपक्ष पार्टी के सांसदों ने मजबूती से प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी ने इस फैसले को जनता के प्रतिनिधियों के साथ अन्याय बताया। वहीं आरजेडी के सांसद मनोज झा ने कहा कि सांसद निधि योजना की राशि में बदलाव से प्रशासन का केंद्रीकरण हो सकता है।
कैसे काम करती है सांसद निधि योजना?
इस योजना के तहत सांसद या विधायक को उनके अकाउंट में विकास राशि नहीं मिलती है। केंद्र सरकार इस राशि को सीधा स्थानीय अधिकारियों के खाते में ट्रांसफर करती है। सांसद या विधायक गाइडलाइंस के तहत अपने स्थानीय क्षेत्र में विकास कार्य करा सकता है।
योजना के तहत सांसद सड़क निर्माण, स्कूल की इमारत जैसे विकासशील काम कराता है। पिछले महीने सरकार ने सांसद निधि योजना से पर्सनल प्रोटेक्शन इक्विपमेंट और कोरोना वायरस टेस्टिंग किट खरीदने की भी अनुमति दी थी।
वहीं विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास योजना अलग अलग राज्य के गाइडलाइंस के तहत इस्तेमाल में लाई जाती है। उदाहरण के लिए दिल्ली के विधायक डेंगू और मच्छरों को मारने और सीसीटीवी कैमरा लगाने के लिए इस निधि का इस्तेमाल कर सकते हैं।
सांसद या विधायक के विकास कार्यों का विवरण देने के बाद उस जगह के स्थानीय अधिकारी आर्थिक, तकनीकी और प्रशासनिक नियमों के तहत कार्य करते हैं।
इस योजना की शुरुआत कब हुई?
पूर्व प्रधानमंत्री पी वी नरसिम्हा राव ने लोकसभा में 23 दिसंबर 1993 में योजना का एलान किया था। उन्होंने कहा कि यह फैसला अलग पार्टियों के सांसदों की अपील पर लिया गया है। यह फैसला तब लिया गया जब पी वी नरसिम्हा राव की अल्पमत सरकार में काफी उथल-पुथल चल रहा था।
उस साल मई में भारत के इतिहास में देश की लोकसभा के सामने पहली बार हाईकोर्ट के जज जस्टिस वी रामास्वामी के खिलाफ महाअभियोग का आरोप लगा था। ऐसी घनाओं से कुछ समीक्षकों का कहना हुआ कि सांसद निधि योजना अल्पमत सरकार का सांसदों को शांत कराने का तरीका था। साल दर साल इस योजना को राज्य सरकारों ने भी इस्तेमाल में लिया।
कब तक चलेगी सांसद निधि योजना?
केंद्र सरकार ने इसे 27 साल तक चलाने का फैसला किया था। योजना का बजट सरकार के वित्त के जरिए बनाया जाता है, इसलिए जब तक सरकार चाहती है तब तक योजना चलती रहेगी। 2018 में आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमिटी ने योजना को 14वें वित्त कमीशन यानि कि 31 मार्च 2020 तक चलाने की अनुमति दी थी।
हालांकि बिहार राज्य में इस योजना पर 2010 में विराम लगा दिया गया था जिसे 2014 के आम चुनाव से पहले दोबारा शुरू किया गया था।
सांसद निधि योजना से कितना फायदा?
2018 में योजना को निरंतर करने की स्वीकृति दी गई। सरकार का मानना है कि योजना के तहत देश की जनता को साफ पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा, साफ-सफाई और सड़क निर्माण जैसे लाभ मिलेंगे।
2017 में योजना के तहत 45,000 करोड़ के 19 लाख प्रोजेक्ट किए गए थे। जिसमें से 82 फीसद प्रोजेक्ट ग्रामीण इलाकों और बाकी के बचे प्रोजेक्ट शहरी या अर्द्ध शहरी इलाकों के लिए बनाए गए थे।