फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Himachal Election: Why the Congress candidates himself became leader in this election

Himachal Election: खुद ही 'सेनापति' क्यों बन बैठे कांग्रेसी उम्मीदवार, ये प्रयोग हुआ सफल तो बदलेगा चुनावी रण

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Thu, 10 Nov 2022 11:19 PM IST
विज्ञापन
सार
Himachal Election: प्रदेश की 68 विधानसभा सीटों पर इस बार 412 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। पिछली बार यानी 2017 के चुनाव में प्रत्याशियों की संख्या लगभग 338 थी। भाजपा में कई नेता बागी हो चुके हैं। फतेहपुर से पूर्व सांसद कृपाल परमार, कुल्लू से राम सिंह व मंडी से प्रवीण शर्मा, भाजपा को नुकसान पहुंचा रहे हैं...
loader
Himachal Election: Why the Congress candidates himself became leader in this election
कांग्रेस और भाजपा में छिड़ा होर्डिंग वार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश चुनाव में इस बार दो अलग-अलग बातें देखने को मिल रही हैं। एक तरफ भाजपा है, जहां चुनाव की कमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं संभाल रहे हैं। वे आधा दर्जन से ज्यादा रैलियां कर चुके हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस पार्टी है, जिसके अधिकांश प्रत्याशी खुद को ही सेनापति मानकर चुनाव मैदान में डटे हैं। प्रियंका गांधी एवं दूसरे कांग्रेसी नेताओं की कुछ रैलियां हुई हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर चुनावी प्रचार की बात करें, तो उसमें भाजपा काफी आगे चल रही है। भले ही स्टार प्रचारकों की सूची में कांग्रेस पार्टी के भी 40 नाम हैं, लेकिन कई बड़े चेहरे 'पहाड़' तक नहीं पहुंच सके। नतीजा, कांग्रेसी उम्मीदवार, खुद को ही सेनापति मानकर चुनावी रण में कूद पड़े। हालांकि कई उम्मीदवार मान रहे हैं कि उनके पास दो अचूक हथियार हैं, जिनके बलबूते वे चुनाव में टक्कर दे पा रहे हैं। इनमें एक है 'रिवाज' और दूसरा 'ओपीएस'।




बागियों ने छुड़ाया दोनों पार्टियों का पसीना

अगर गुटबाजी की बात करें तो वह दोनों ही पार्टियों में देखने को मिल रही है। पिछले दिनों एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें कथित तौर पर यह दिखाया गया कि पीएम मोदी, भाजपा के बागी नेता कृपाल परमार को फोन कर रहे हैं। वे उन्हें समझा रहे हैं कि वह चुनाव न लड़ें। फोन कॉल में परमार को यह कहते हुए सुना जा रहा है कि नड्डा-जी ने 15 साल तक मेरा अपमान किया है। भाजपा या पीएम कार्यालय ने ऐसी किसी फोन कॉल की पुष्टि नहीं की। प्रदेश में लगभग डेढ़ दर्जन सीटों पर भाजपा को अपने बागियों की वजह से मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि कई सीटों पर असंतुष्ट नेताओं को समझाने बुझाने में पार्टी को सफलता भी मिली है। कांग्रेस में बगावत के चलते पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गंगू राम मुसाफिर, सुलाह के पूर्व एमएलए जगजीवन पाल, चौपाल के पूर्व विधायक डॉ सुभाष मंगलेट, ठियोग से विजय पाल खाची, आनी से परस राम और जयसिंहपुर से सुशील कौल को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित किया गया है।

भाजपा के लिए बड़ा जोखिम बन सकते हैं ये बागी

प्रदेश की 68 विधानसभा सीटों पर इस बार 412 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। पिछली बार यानी 2017 के चुनाव में प्रत्याशियों की संख्या लगभग 338 थी। भाजपा में कई नेता बागी हो चुके हैं। फतेहपुर से पूर्व सांसद कृपाल परमार, कुल्लू से राम सिंह व मंडी से प्रवीण शर्मा, भाजपा को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इनके अलावा नाचन से ज्ञान चंद, कांगड़ा से कुलभाष चौधरी, धर्मशाला से विपिन नैहरिया, बड़सर से संजीव शर्मा, हमीरपुर से नरेश दर्जी, मनाली से महेंद्र ठाकुर, भोरंज से पवन कुमार व रोहडू़ से राजेंद्र धीरटा भी पार्टी उम्मीदवार के लिए जोखिम बन गए हैं। चंबा से इंदिरा कपूर की गतिविधियां भी भाजपा के उम्मीदवार को नुकसान पहुंचा रही हैं।

कांग्रेस के बड़े स्टार प्रचारकों में केवल प्रियंका गांधी

प्रचारकों की सूची में सोनिया गांधी, पूर्व पीएम डॉ. मनमोहन सिंह व राहुल गांधी का नाम शामिल था। ये तीनों ही प्रचार के लिए नहीं पहुंच सके। वजह, सोनिया गांधी और डॉ. मनमोहन सिंह का स्वास्थ्य ठीक नहीं है। राहुल गांधी, 'भारत जोड़ो यात्रा' निकाल रहे हैं। शिमला के रिज मैदान पर उमानंद कहते हैं, देखिये प्रचार में तो भाजपा काफी आगे चल रही है। पीएम मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, जेपी नड्डा, योगी आदित्यनाथ और अनुराग ठाकुर समेत दर्जनों केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री, चुनाव प्रचार के लिए आ चुके हैं। दूसरी ओर कांग्रेस में प्रियंका गांधी और सचिन पायलट का नाम लोगों को याद है। हालांकि कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे सहित पार्टी के दो मुख्यमंत्री व कई वरिष्ठ नेता भी हिमाचल आए हैं। यहां तो कांग्रेस उम्मीदवार, खुद ही सेनापति बन बैठे हैं। उन्हें पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से ज्यादा कुछ लेना-देना नहीं है। उनके पास दो अचूक हथियार हैं। एक है, 'रिवाज' और दूसरा है 'ओपीएस'। कांग्रेस उम्मीदवारों को भरोसा है कि यही दो बातें उन्हें जीत तक पहुंचा सकती हैं।

रिवाज के लिए अहम है 'पुरानी पेंशन व्यवस्था'

शिमला में बोराराम और कसौली में ध्यान सिंह कहते हैं, चुनाव में 'पुरानी पेंशन व्यवस्था' ओपीएस का मुद्दा है। कांग्रेस उम्मीदवारों ने इस घर-घर तक पहुंचा दिया है। वजह, हिमाचल में लगभग हर चौथा व्यक्ति सरकारी कर्मचारी है। परिवार में से कोई न कोई तो जरूर सरकार, बोर्ड या निगम में काम कर रहा है। भाजपा कह रही है कि रिवाज टूटेगा। यानी पांच साल बाद भाजपा सरकार, दोबारा से आएगी। कांग्रेस पार्टी के बड़े नेता चुनाव प्रचार में नहीं आए। ये बात तो ठीक है। यहां पर पार्टी उम्मीदवारों को ओपीएस और रिवाज पर ही पूरा भरोसा है। ये दोनों बातें, कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवारों को फायदा पहुंचा सकती हैं। भितरघात या असंतुष्ट नेताओं की उपस्थिति के बावजूद पार्टी को इन्हीं दो बातों पर विश्वास है। दूसरी ओर भाजपा में भी गुटबाजी है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का गृह राज्य है। ये चुनाव, उनकी आगामी भूमिका तय कर सकता है। प्रदेश भाजपा की गुटबाजी के चलते ही पीएम मोदी ने यहां के चुनाव प्रचार की कमान अपने हाथों में ली है। उपचुनाव के नतीजों से पार्टी नेतृत्व बेखबर नहीं है। अगर यहां कांग्रेस का ये प्रयोग सफल होता है, तो पार्टी दूसरे राज्यों में भी इसी तरह के किसी मुद्दे को उठाकर सत्ता में आने का प्रयास कर सकती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed