{"_id":"5c141cbabdec2253f10a2516","slug":"high-court-restraint-on-order-to-make-public-list-of-bank-defaulters","type":"story","status":"publish","title_hn":"बैंक डिफाल्टरों की सूची सार्वजनिक करने के आदेश पर हाईकोर्ट की रोक","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
बैंक डिफाल्टरों की सूची सार्वजनिक करने के आदेश पर हाईकोर्ट की रोक
Sat, 15 Dec 2018 02:42 AM IST
गौरव द्विवेदी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: गौरव द्विवेदी
Updated Sat, 15 Dec 2018 02:42 AM IST
विज्ञापन
Bombay High Court
- फोटो : Bombay High Court
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को जानबूझ कर कर्ज नहीं लौटाने वाले डिफाल्टरों की सूची सार्वजनिक करने संबंधी केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी। बता दें कि सीआईसी ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को सूची नहीं जारी करने पर कारण बताओ नोटिस भेजा था। उच्च न्यायालय ने आरबीआई की दलील सुनने के बाद उक्त आदेश दिया।
विज्ञापन
हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति बी. पी. धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति सारंग कोतवाल की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के बाद सीआईसी की ओर से आरबीआई के गवर्नर को जारी कारण बताओ नोटिस पर भी रोक लगा दी। मामले की सुनवाई के दौरान आरबीआई के वरिष्ठ अधिवक्ता व्यंकटेश धोण्ड ने कहा कि सीआईसी ने आरबीआई का पक्ष सुने बिना ही अपना आदेश जारी कर दिया है।
विज्ञापन
आरबीआई की ओर से कहा गया कि केंद्रीय सूचना आयोग ने जो आदेश दिया है वह देश की अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदेह हो सकता है, इसलिए सीआईसी के आदेश और कारण बताओ नोटिस पर रोक लगाई जाए। दलील सुनने के बाद खंडपीठ ने सीआईसी को नोटिस जारी किया और उसके आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी। अब खंडपीठ में मामले की अगली सुनवाई 10 अप्रैल को होगी।
विज्ञापन
सीआईसी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन नहीं करने के लिए नोटिस जारी करके कहा था कि पहले चरण में आरबीआई उन डिफाल्टरों की सूची जारी करे जिन्होंने एक हजार करोड़ तक के कर्ज जान बूझकर नहीं चुकाए हैं। इसके बाद 500 करोड़ रुपए तक का कर्ज नहीं लौटाने वालों की सूची सौंपी जाए। इस नोटिस के बाद आरबीआई ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।