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दरोगा भर्ती मामला: सामान्य श्रेणी में आरक्षित कोटे का चयन रद्द करना सही: हाईकोर्ट

Sat, 30 Jul 2016 06:02 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, इलाहाबाद
ब्यूरो/ अमर उजाला, इलाहाबाद Updated Sat, 30 Jul 2016 06:02 AM IST
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High Court continues stay on selection of reserved quota in general category
इलाहाबाद उच्च न्यायालय - फोटो : PTI

यूपी में नागरिक पुलिस और पीएसी में 4010 सबइंस्पेक्टर तथा प्लाटून कमाडेंट की भर्ती में विशेष आरक्षित वर्ग (महिला, एक्स सर्विस मैन और सेनानी आश्रित) को सामान्य वर्ग की सीटों में नियुक्ति देने का निर्णय रद्द करने संबंधी आदेश को हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सही करार दिया है। एकल न्यायपीठ के इस आदेश को चुनौती देने वाली प्रदेश सरकार की विशेष अपील को खारिज करते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश वीके शुक्ला और न्यायमूर्ति यूसी श्रीवास्तव की खंडपीठ ने प्रदेश सरकार को आदेश के अनुसार रिजल्ट में तत्काल संशोधन करने का आदेश दिया है।

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कोर्ट ने माना कि विशेष आरक्षित वर्ग को मिलने वाला क्षैतिज आरक्षण का लाभ उस वर्ग विशेष के लिए आरक्षित सीटों में ही दिए जाने का नियम है। ऐसा न करके सरकार ने आरक्षण नियमों का उल्लंघन किया है जिससे आरक्षण 50 प्रतिशत से बढ़कर 77 प्रतिशत तक पहुंच गया जो असंवैधानिक है।
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एकल पीठ ने गलत आरक्षण लागू करने के लिए प्रत्येक याची के हिसाब से 10 हजार रुपये सरकार पर हर्जाना लगाया था, साथ ही अधिकारियों द्वारा की गई मनमानी पर प्रतिकूल टिप्पणी की थी। खंडपीठ ने हर्जाने और टिप्पणी वाले आदेश के हिस्से को रद्द कर दिया है। विशेष अपील का अधिवक्ता सीमांत सिंह ने विरोध किया। अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी, वरिष्ठ अधिवक्ता पीएस पटवालिया, जीके सिंह आदि पक्षकारों की ओर से बहस की।

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27 प्रतिशत आरक्षित सीटों में ही चयन दिया जाएगा

High Court continues stay on selection of reserved quota in general category
आशीष कुमार पांडेय और ने 24 अन्य, प्रमोद कुमार व अन्य तथा मुनेंद्र प्रताप सिंह की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सुनीत कुमार ने 16 मार्च 2016 को सामान्य की सीटों पर विशेष आरक्षित वर्ग को दिया गया क्षैतिज आरक्षण रद्द कर दिया था। प्रदेश सरकार ने इसके खिलाफ विशेष अपील दाखिल की थी। एकल न्यायपीठ के आदेश को गलत करार देते हुए रद्द करने की मांग की गई। खंडपीठ ने सरकार की दलील को अस्वीकार करते हुए कहा कि एकल पीठ के फैसले में कोई त्रुटि नहीं है।

कोर्ट ने निर्देश दिया है कि विशेष आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को श्रेणीवार समायोजित किया जाए। इसका अर्थ है कि यदि विशेष श्रेणी का अभ्यर्थी ओबीसी है तो उसे ओबीसी कोटे के 27 प्रतिशत आरक्षित सीटों में ही चयन दिया जाएगा। आरक्षण उस वर्ग की मेरिट में नीचे से लागू किया जाएगा। इससे पूर्व में चयनित किए गए कुछ अभ्यर्थी बाहर हो जाएंगे और विशेष आरक्षित अभ्यर्थी अपने कोटे में स्थान पाएगा।

उल्लेखनीय है कि 19 मई 2011 को सिविल पुलिस में 3698 सबइंस्पेक्टर और पीएसी में 312 प्लाटून कमांडरों के पद पर भर्ती का विज्ञापन जारी हुआ। परिणाम जारी होने पर पता चला कि विशेष आरक्षित वर्ग को उनकी श्रेणियों में नियुक्ति देने के बजाए सामान्य की 50 प्रतिशत सीटों पर नियुक्ति दे दी गई। ओबीसी की 173 और एससी की 10 महिला अभ्यर्थियों को सामान्य वर्ग की सीटों में नियुक्ति दे दी गई। ऐसा करने में 50 प्रतिशत खुले चयन के सिद्धांत का पालन नहीं हुआ। अधिवक्ता सीमांत सिंह का कहना था कि यह आरक्षण नियमावली और इंदिरा साहनी केस में सुप्रीम के निर्णय का खुला उल्लंघन है।
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