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अब दिल की धड़कन से बनेगी बिजली: बैटरी रहित होगा पेसमेकर, वैज्ञानिकों ने तैयार की सूक्ष्म जनरेटरों की जाली
Mon, 26 Oct 2026 06:59 AM IST
शिवम गर्ग
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: शिवम गर्ग
Updated Mon, 26 Oct 2026 06:59 AM IST
सार
वैज्ञानिकों ने प्रयोगशाला में विकसित मानव हृदय ऊतक में सूक्ष्म विद्युत जनरेटरों की जाली बनाई है। यह तकनीक भविष्य में बैटरी रहित पेसमेकर की उम्मीद जगा सकती है।
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क्या बिना बैटरी चलेगा पेसमेकर?
- फोटो : Amar Ujala Graphics
विस्तार
मानव हृदय की हर धड़कन को बिजली में बदलकर चिकित्सा उपकरणों को ऊर्जा देने की दिशा में वैज्ञानिकों ने नई उम्मीद जगाई है। अमेरिका के मैसाचुसेट्स एमहर्स्ट विश्वविद्यालय के इंजीनियरों ने प्रयोगशाला में विकसित मानव हृदय ऊतक के भीतर सूक्ष्म विद्युत जनरेटरों की जाली तैयार की है। ऊतक के धड़कने पर इन जनरेटरों ने विद्युत संकेत पैदा किए। यह तकनीक भविष्य में पेसमेकर और दूसरे प्रत्यारोपित चिकित्सा उपकरणों के लिए बैटरी पर निर्भरता कम करने का रास्ता खोल सकती है।
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हालांकि, अभी इसका परीक्षण केवल प्रयोगशाला में विकसित ऊतक पर हुआ है। यह शोध विज्ञान पत्रिका साइंस एडवांसेज में प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं ने प्लास्टिक की बेहद पतली पट्टियों से एक जाली बनाई, जिसमें सीसा जिरकोनेट टाइटेनेट (पीजेडटी) नामक सिरेमिक पदार्थ की 64 सूक्ष्म पट्टियां लगाई गईं।
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यह पदार्थ मुड़ने पर विद्युत वोल्टेज पैदा करता है। जाली का आकार लगभग 7 गुणा 8 मिलीमीटर है और इसका करीब 78 प्रतिशत हिस्सा खाली रखा गया है, ताकि जीवित ऊतक इसमें विकसित हो सके।
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वोल्टेज बढ़कर 450 से 750 मिलीवोल्ट पहुंचा
शुरुआती डिजाइन में प्रत्येक जनरेटर से प्रति धड़कन लगभग 9 मिलीवोल्ट का संकेत मिला। इसके बाद वैज्ञानिकों ने जनरेटर वाले हिस्से में परतों की मोटाई बढ़ाकर डिजाइन में बदलाव किया। इससे अनुमानित वोल्टेज बढ़कर 450 से 750 मिलीवोल्ट तक पहुंच गया। इस तकनीक की खासियत केवल बिजली पैदा करना नहीं है। धड़कन के साथ विद्युत संकेत उत्पन्न होने से जाली भविष्य में हृदय की धड़कन पर नजर रखने वाले सेंसर के रूप में भी काम कर सकती है। इसके लिए अलग बैटरी की जरूरत कम करने की संभावना है।
सर्जरी अब भी बड़ी चुनौती
पेसमेकर, मस्तिष्क को विद्युत संकेत देने वाले उपकरण और कॉक्लियर इम्प्लांट जैसे चिकित्सा उपकरणों को ऊर्जा देने के लिए बैटरी की जरूरत होती है। बैटरी का आकार, सीमित क्षमता और उसे बदलने के लिए संभावित सर्जरी बड़ी चुनौतियां हैं। इस शोध से बहुत उम्मीदें जगी हैं।