Heart Attack Risk: अचानक क्यों बढ़ रहे हैं हार्ट अटैक के मामले? ये यौगिक क्रियाएं बचाएंगी आकस्मिक हृदयाघात से
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विस्तार
बीते कुछ दिनों से लगातार ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं, जिसमें चलते-फिरते इंसान को हार्ट अटैक पड़ता है और फिर उसके बाद उसकी मृत्यु हो जाती है। अचानक दिखने वाली ऐसी घटनाओं को कोविड जैसी महामारी के साइड इफेक्ट से जोड़ कर देखा जा रहा है। हालांकि आधिकारिक तौर पर इसकी कोई वैज्ञानिक पुष्टि तो नहीं हुई है, लेकिन चिकित्सकों ने ऐसी घटनाओं को बीते कुछ सालों की तुलना में अचानक बढ़ा हुआ पाया है। चिकित्सक और विशेषज्ञों की सलाह के मुताबिक दिल की बीमारी वाले मरीजों को अपना विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है। दिल की बीमारी को कंट्रोल करने के लिए एलोपैथी के साथ-साथ यौगिक क्रियाएं अचानक पढ़ने वाले हार्टअटैक की संभावनाओं को न सिर्फ कम करती हैं, बल्कि दिल की बीमारियों को भी होने से रोकती हैं।
अखिल भारतीय योग शिक्षक महासंघ के प्रमुख योग गुरु मंगेश त्रिवेदी कहते हैं कि बीते कुछ दिनों में अचानक हार्ट अटैक से मरने वालों की संख्या बढ़ी है। वे कहते हैं कि पूरे देश में योग शिक्षक महासंघ के माध्यम से इस पर सर्वे कराया जा रहा है कि यौगिक क्रियाएं करने वालों को दिल की बीमारियों से कितनी मुक्ति मिल रही है। मंगेश कहते हैं कि अचानक हार्ट अटैक से बढ़ रही मौतों से निश्चित तौर पर चिंता बढ़ी है। यह चिकित्सा जगत में शोध का विषय भी है। लेकिन मंगेश त्रिवेदी कहते हैं कि कुछ यौगिक क्रियाएं ऐसी हैं जिनके लाभ हमेशा से देखने को मिले हैं। कोविड के बाद भी यौगिक क्रियाओं को करने वालों में न सिर्फ दिल की बीमारियों के खतरे कम हुए, बल्कि कोविड के दौरान उसके साइड इफेक्ट से ही लोगों को योग के माध्यम से निजात मिली थी। वे कहते हैं कुछ चुनिंदा प्राणायाम और योगासन करने से इस बीमारी से बचा जा सकता है।
प्राणायाम करने से कम होता है हृदय रोग
प्रणायाम से धमनियों पर दबाव कम हो जाता है, जिससे हृदय रोग की संभावना भी घट जाती है। हृदय रोगियों को प्राणायाम मध्यम व धीमी गति से ही करना चाहिए। कपालभाति एवं अनुलोम विलोम प्राणायाम का अभ्यास हृदय रोगियों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। प्राणायाम नियमित रूप से 20 से 25 मिनट तक करने से हार्ट अटैक का खतरा कम हो जाता है। शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है।
कपालभाति प्राणायाम
कपालभाति प्राणायाम से संपूर्ण स्वास्थ्य प्राप्त होता है। हृदय रोगों के लिए बेहद लाभकारी प्राणायाम है। परंतु हृदय रोगी इसे धीमी और मध्यम गति से करें। यह न केवल कोलस्ट्रॉल को कम करता है, बल्कि धमनी के अवरोध को दूर करने में मददगार है। इसके अतिरिक्त अपान वायु मुद्रा हृदय रोग में बेहद लाभकारी है।
अपान वायु मुद्रा
अपान वायु मुद्रा को मृतसंजीवनी मुद्रा भी कहा जाता है। यह बहुत लाभकारी मुद्रा है। यह हृदय रोग और शुगर दोनों में कार्य करती है। यह मुद्रा ब्लॉकेज भी खोलती है। इसका अभ्यास 15 मिनट से लेकर एक घंटे तक किया जा सकता है। अपान वायु मुद्रा करने के लिए दोनों हाथों को घुटने पर रखें, फिर तर्जनी उंगली और अनामिका उंगली को अंगूठे से छुएं तथा पहली और आखिरी उंगली को सीधा रखें। अपान वायु मुद्रा किसी भी समय किया जा सकता है।
इन योग क्रियाओं से बच सकेंगे दिल के गंभीर खतरों से
योगासन शरीर में प्राण की गति को बढ़ाता है। सूर्य नमस्कार को 10 से 12 बार अवश्य करें। यह एक कार्डियोवैस्कुलर अभ्यास है। इसके अलावा ये हार्ट के लिए बहुत ही लाभदायक है। त्रिकोणासन, उष्ट्रासन, सेतुबंधासन, नौकासन, गोमुखासन और भुजंगासन के नियमित अभ्यास से हार्ट अटैक से बचा जा सकता है। हृदय रोगियों की संख्या दिन पर बढ़ती ही जा रही है। आने वाले वर्षों में भारत में हृदय रोगियों की संख्या दुनिया में सबसे अधिक हो जाएगी। हृदय को अच्छा रखने के लिए सबसे महत्वपूर्ण है अपने आहार पर ध्यान देना। साथ ही शारीरिक व्यायाम और पर्याप्त नींद लेना भी जरूरी है।
कितने समय तक करें प्राणायाम
- कपालभाति प्राणायाम करने के लिए सिर्फ़ 20-20 राउंड के पांच सेट इससे ज़्यादा गर्मी के मौसम में नहीं करना है ।
- अनुलोम विलोम प्राणायाम पांच से लेकर के 15 मिनट तक कर सकते हैं।
- शीतली प्राणायाम 11 से लेकर के 21 बार कर सकते हैं।
- उच्च रक्तचाप से पीड़ित लोगों को भी भस्त्रिका प्राणायाम नहीं करना चाहिए।
- ॐ का उच्चारण 11 से 21 बार नियमित रूप से करना है।
योग प्रशिक्षिका योगिनी मीनाक्षी रुचि के अनुसार जो लोग हृदय संबंधी किसी गंभीर समस्या से ग्रस्त हैं, उन्हें योग्य मार्गदर्शन में अपनी क्षमता का ध्यान रखते हुए यौगिक क्रियाओं का अभ्यास करना चाहिए। ऐसे लोगों के लिए सूक्ष्म यौगिक व्यायाम बहुत कारगर होते हैं। इनके अतिरिक्त सिद्धासन, पद्मासन, ताड़ासन, गोमुखासन, वज्रासन, जानुशिरासन, मेरू वक्रासन, पवनमुक्तासन, मरकट आसन, तितली आसन, एक पाद उत्तानासन आदि सरल आसनों का अभ्यास करना चाहिए। योग गुरु मंगेश त्रिवेदी कहते हैं, जिन्हें हृदय संबंधी रोग नहीं है, उन्हें अपने हृदय को जीवनपर्यंत निरोग, स्वस्थ तथा सशक्त बनाए रखने के लिए निम्न यौगिक आसनों का अपनी क्षमतानुसार तथा योग्य मार्गदर्शन में अभ्यास करते रहना चाहिए। इनमें प्रमुख हैं सूर्य नमस्कार, शीर्षासन, सर्वांगासन, उत्थित पद्मासन, बक्रासन, पश्चिमोत्तानासन, सुप्त वज्रासन, अर्ध्यमत्स्येंद्रासन, त्रिकोणासन, नौकासन, हलासन, धनुरासन, भुजंगासन करने चाहिए।
नोट: किसी योग गुरु के निर्देशन में ही योग क्रियाओं का अभ्यास करें। किसी भी बीमारी से पीड़ित लोग योग क्रिया करने से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।