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सुप्रीम कोर्ट ने कहा, गांवों में पैसा पहुंचाने के लिए क्या कर रही है सरकार

Fri, 02 Dec 2016 09:01 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 02 Dec 2016 09:01 PM IST
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Hearing over demonetisation at supreme court today

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से यह जानना चाहा है कि नोटबंदी के बाद ग्रामीण इलाकों में लोगों को हो रही असुविधा के मद्देनजर क्या कदम उठाए गए हैं। वास्तव में शीर्ष अदालत ने यह महसूस किया कि ग्रामीण इलाकों के अधिकतर लोग सहकारी बैंकों पर निर्भर रहते हैं। 

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चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र सरकार की ओर से पैरवी कर रहे अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी से पूछा कि ग्रामीण इलाकों में हो रही पेरशानी से कैसे निपटा जा रहा है। जवाब में अटॉर्नी जनरल ने कहा कि सरकार सहकारी बैंकों की स्थिति से भली भांति परिचित है। उन्होंने कहा कि सरकार इस बात से भी अवगत है कि सरकारी बैकों के मुकाबले सहकारी बैंकों में आधारभूत सहित सुविधाओं का अभाव है। 
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उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा दाखिल हलफनामे में एक पूरा अध्याय ही सहकारी बैंकों पर है। उन्होंने कहा कि सरकार ने जानबूझ कर इस पूरे ड्राइव से सहकारी बैंकों को अलग रखा हुआ है क्योंकि उनके पास फर्जी नोटों की पहचान के लिए विशेषज्ञ नहीं हैं। वहीं सहकारी बैंकों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील पी चिदंबरम ने सरकार के निर्णय पर सवाल उठाते हुए कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है।

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एक साथ हो सारे मामलों की सुनवाई

Hearing over demonetisation at supreme court today

वहीं विभिन्न हाईकोर्ट और निचली अदालतों में चल रहे मामलों को एक अदालत में सुनने के मसले पर पीठ ने कहा कि सभी पक्षकार साथ बैठकर लिस्ट तैयार करें कि कौन-कौन मामले को हाईकोर्ट में भेजा जाना चाहिए और कौन-कौन से मसले पर सुप्रीम कोर्ट को सुनवाई करनी चाहिए। 

अटॉर्नी जनरल ने पीठ को बताया नोटबंदी के विभिन्न पहलुओं को लेकर रोजाना याचिकाएं दायर की जा रही हैं ऐसे में एक साथ केरल, कोलकाता, जयपुर, मुंबई आदि में एक साथ मुकदमों पर कार्यवाही संभव नहीं है। इन सभी को किसी एक हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में सुना जाना चाहिए। वहीं याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने भी सुझाव दिया है कि हम सभी साथ बैठकर श्रेणी के हिसाब से याचिकाओं की सूची तैयार करेंगे। अगली सुनवाई सोमवार को होगी।

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