{"_id":"685a9e491d16187c030805b9","slug":"hate-speech-44-mps-signed-the-notice-to-remove-justice-shekhar-yadav-sibal-raised-questions-2025-06-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hate speech: न्यायमूर्ति शेखर यादव को हटाने संबंधी नोटिस पर 45 सांसदों ने किए हस्ताक्षर, सिब्बल ने उठाए सवाल","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Hate speech: न्यायमूर्ति शेखर यादव को हटाने संबंधी नोटिस पर 45 सांसदों ने किए हस्ताक्षर, सिब्बल ने उठाए सवाल
Tue, 24 Jun 2025 06:17 PM IST
राहुल कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Tue, 24 Jun 2025 06:17 PM IST
सार
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश शेखर यादव को कथित ‘घृणास्पद भाषण’ के चलते पद से हटाने के लिए लाए गए प्रस्ताव पर राज्यसभा सचिवालय ने 45 सांसदों के हस्ताक्षरों का सत्यापन कर लिया है। यह प्रस्ताव 13 दिसंबर 2024 को पेश किया गया था।
विज्ञापन
जस्टिस शेखर यादव।
- फोटो : अमर उजाला।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश शेखर यादव को कथित ‘घृणास्पद भाषण’ के चलते पद से हटाने के संबंध में प्रस्ताव लाने का नोटिस देने वाले 55 सांसदों में से 45 सदस्यों के हस्ताक्षर का सत्यापन हो गया है जबकि कपिल सिब्बल और आठ अन्य ने अब तक अपने हस्ताक्षरों का सत्यापन नहीं किया है।
विज्ञापन
प्रक्रिया में देरी पर सिब्बल ने उठाए सवाल
इस मामले को लेकर कपिल सिब्बल ने दावा किया है कि राज्यसभा सचिवालय से ऐसा कोई ईमेल नहीं मिला है, जिसमें पुष्टि की गई हो कि पिछले छह महीनों के दौरान उनके आधिकारिक ईमेल पर तीन बार नोटिस भेजा गया है। सिब्बल ने हस्ताक्षरों के सत्यापन की आवश्यकता और मार्च में देरी से प्रक्रिया शुरू करने में पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि इस संबंध में नोटिस 13 दिसंबर 2024 को प्रस्तुत किया गया था।
विज्ञापन
सूत्रों के अनुसार, पूर्व केंद्रीय मंत्री और अब निर्दलीय राज्यसभा सदस्य सिब्बल ने पिछले छह महीनों में अपने आधिकारिक ईमेल पर तीन बार अनुस्मारक भेजने के बाद भी अब तक राज्यसभा सचिवालय के समक्ष अपने हस्ताक्षर का सत्यापन नहीं कराया है। सिब्बल ने का कहना है, मैंने सभापति धनखड़ से कई बार मुलाकात की है, लेकिन उन्होंने न्यायमूर्ति यादव को हटाने के नोटिस पर मेरे हस्ताक्षरों के सत्यापन का मुद्दा कभी नहीं उठाया जबकि पूरी प्रक्रिया का प्रस्तुतकर्ता और आरंभकर्ता मैं ही हूं।
विज्ञापन
एक सासंद के दो हस्ताक्षरों के चलते उठा विवाद
बता दे कि शेखर यादव को हटाने के लिए 55 सांसदों ने प्रस्ताव के नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं, लेकिन उनमें से एक सदस्य सरफराज अहमद के हस्ताक्षर नोटिस पर दो बार हैं। राज्यसभा सूत्रों ने बताया कि झारखंड से झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के सांसद अहमद इस मुद्दे पर पहले ही राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ से मिल चुके हैं और इस बात की पुष्टि की है कि उन्होंने दो बार नहीं बल्कि केवल एक बार हस्ताक्षर किए हैं। अब सचिवालय जांच कर रहा है कि नोटिस पर उनके हस्ताक्षर दो बार कैसे दिखाई दे रहे हैं और क्या वे फर्जी हैं। सूत्रों की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, न्यायमूर्ति यादव को हटाने के लिए 55 विपक्षी सांसदों द्वारा प्रस्तुत नोटिस पर तारीख नहीं है और ये किसी को संबोधित नहीं है।
Supreme Court: 'न्याय का मजाक...', आदेश के बावजूद व्यक्ति को रिहा न करने पर कोर्ट ने जेल अधीक्षक को किया तलब
महाभियोग के लिए जरूरी यह संख्या
संविधान के अनुसार उच्च न्यायापालिका के किसी न्यायाधीश को सेवा से तभी हटाया जा सकता है जब संसद के दोनों सदनों द्वारा प्रस्ताव को वर्तमान सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से मंजूरी दे दी जाए। इसके बाद राष्ट्रपति को इसे मंजूरी देनी होती है। राज्यसभा में ऐसा प्रस्ताव तभी लाया जा सकता है जब 50 सदस्यों के हस्ताक्षर हों। लोकसभा के लिए 100 सदस्यों के हस्ताक्षर की जरूरत होती है।