फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Haryana government wants Indus Valley renamed as Sarasvati civilisation

सरस्वती को 'जीवित' करने में जुटी खट्टर सरकार, बदलना चाह रही सिंधु घाटी का नाम

Thu, 02 Mar 2017 03:23 PM IST
amarujala.com- Presented by : अजय कुमार सिंह
amarujala.com- Presented by : अजय कुमार सिंह Updated Thu, 02 Mar 2017 03:23 PM IST
विज्ञापन
Haryana government wants Indus Valley renamed as Sarasvati civilisation
Manohar Lal Khattar

विज्ञापन

मनोहर लाल खट्टर की हरियाणा सरकार पौराणिक नदी सरस्वती को जीवित करने के लिए हर कदम उठा रही है। पिछले साल खट्टर सरकार ने सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड (एसएचडीबी) का गठन किया था। वहीं अब खबर है कि सरकार सिंधु नदी का नाम बदलकर सरस्वती नदी करना चाह रही है। सरकार का कहना है कि सिंधु घाटी को सरस्वती के नाम से जाना जाए। एक अंग्रेजी अखबार के मुताबिक, एसएचडीबी ने इसके लिए खट्टर सरकार को प्रस्ताव भेजा है। बोर्ड ने अपने प्रस्ताव में कहा है कि सरस्वती नदी कोई मिथक नहीं है, बल्कि अपने आप में एक वास्तविकता है।

अभी इस साल की शुरुआत ही में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्व में आयोजित हरियाणा सरस्वती हेरिटेज डेवलपमेंट बोर्ड (एचएसएसडीबी) की बैठक में किये गये प्रस्तावों में सिंधु घाटी सभ्यता का नाम बदलने के प्रस्ताव को भी शामिल किया गया है, जिसे सरकार के पास मंजूरी के लिए भेजा जायेगा। उसका कहना है कि यह दी अब केवल कल्पित कथा ही नहीं है, बल्कि यह वास्तविक रूप में विराजमान है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्व में हुई बोर्ड की बैठक के बाद हरियाणा में सरस्वती महोत्सव का आयोजन किया गया। इसके साथ ही, कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय में सरस्वती नदी को लेकर दो दिवसीय सम्मेलन का भी आयोजन किया गया।

विज्ञापन


सरकार के पास भेजे अपने प्रस्ताव में बोर्ड ने कहा है कि राज्य सरकार के ध्यान में लाते हुए यह बताना चाहेंगे कि अभी तक जिस सरस्वती नदी को कल्पित कथा के तौर पर देखा जाता था, वह वास्तविक रूप में विराजमान है। सरस्वती नदी की अवस्थिति को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों द्वारा प्रमाणित किया गया है। इसलिए हमारे देश की सिंधु घाटी सभ्यता का नाम बदलकर जल्द ही सरस्वती नदी सभ्यता के रूप में किया जाना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन


 हरियाणा के पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग की मुख्य सचिव सुमिता मिश्रा ने बताया कि बीते कई सालों में काफी मात्रा में हरियाणा में हड़प्पा संस्कृति के क्षेत्रों की खुदाई की गयी है। इसलिए अब सिंधु घाटी सभ्यता का नाम बदलकर सरस्वती-सिंधु सभ्यता किया जाना चाहिए।
 

 

सरकार का दावा- ऋग्वेद में सरस्वती नदी का नाम

Haryana government wants Indus Valley renamed as Sarasvati civilisation
फाइल फोटो - फोटो : social media

बता दें कि पिछले साल सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड (एसएचडीबी) का गठन कर खट्टर ने इस परियोजना को आगे बढ़ाया था और उन्होंने स्थल से संबंधित खुदाई के लिए 50 करोड़ रुपये भी स्वीकृत किये थे।  एसएचडीबी के एक प्रवक्ता के मुताबिक यह फैसला भी किया गया है कि एक नीति बनाई जायेगी और उन लोगों के लिए दंड का प्रावधान किया जायेगा जो लोग घरेलू दूषित जल और अशोधित जल नदी में बहायेंगे।

वन विभाग को भी निर्देशित किया गया है कि यह स्योंसर वन क्षेत्र में नदी के साथ एक जलाशय के निर्माण की एक योजना 31 अगस्त 2016 तक तैयार कर ले।

दरअसल पिछले साल मई में यमुनानगर के मुगलवाली गांव में कुछ जलवाही स्तरों के मिलने के बाद यह मान लिया गया कि ये सरस्वती नदी के भूमिगत जलमार्ग हैं। लोग उत्साहित हो गये, दावे होने लगे, उन्हें खारिज किया जाने लगा, भविष्य के लिए योजनाएं बनायी जाने लगी और इसके बाद सरस्वती से जुड़ी बहस तेज हो गई कि क्या यह किसी ग्लेशियर से निकला प्रवाह थी या मानसूनी धारा थी।

खबरों के मुताबिक वहां सबसे महत्वपूर्ण जलवाही स्तर की खोज एक मुसलमान मजदूर खलील ने की।  प्रेक्षकों का कहना है कि इससे पहले सरस्वती नदी, जिसका उल्लेख ऋग्वेद में है, के अवशेष कई जगहों पर पाये जा चुके हैं और यमुनानगर में आदि बद्री से जिस पहाड़ी से पानी निकलता दिखायी दिया, उसे घेर दिया गया। बाद में इस जगह को सरस्वती उद्गम स्थल का नाम दिया गया। इससे पहले कुरुक्षेत्र के भोर सैयदां गांव के पास भी एक सूखा नदीतल प्राप्त हुआ था।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed