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Gujarat: जासूसी के आरोप में पाकिस्तान की जेल में बिताए 28 साल, घर लौटा शख्स, सरकार से मांगी मदद

Wed, 31 Aug 2022 09:05 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 31 Aug 2022 09:05 PM IST
सार

यादव ने कहा, "जब भारतीयों को पकड़ा जाता है तो प्रताड़ित किया जाता है, उनका जीवन बर्बाद हो जाता है। वे कुछ भी याद नहीं कर पाते हैं, यहां तक कि अपना नाम भी। वे अपना नाम भूल गए होंगे, लेकिन वे सभी भारतीय हैं।"

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Gujarat man who spent 28 years in Pak jail returns home appeals for govt help
कुलदीप यादव - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

जासूसी के आरोप में पाकिस्तान की जेल में 28 साल से अधिक समय बिताने के बाद गुजरात लौटे एक व्यक्ति ने अपने परिवार के साथ मुलाकात की और भारत सरकार से पड़ोसी देश की जेलों में बंद अन्य हमवतन लोगों को वापस लाने में मदद करने की अपील की। 
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अहमदाबाद के कुलदीप यादव (59 वर्षीय) 25 अगस्त को घर लौटे और अपनी बहन और तीन भाइयों से मिले। उन्होंने सरकार से पुनर्वास में मदद करने का अनुरोध करने का अनुरोध करते हुए कहा कि उनके पास कुछ भी नहीं बचा है और वह हमेशा के लिए अपने भाई-बहनों पर निर्भर नहीं रह सकते हैं। 
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1994 में जासूसी के आरोप में किया गया था गिरफ्तार
उन्होंने बुधवार को कहा, "मैं अभी जो शर्ट पहन रहा हूं वह पाकिस्तान की है। मेरे पास अपने कपड़े भी नहीं हैं।" यादव को पाकिस्तानी अधिकारियों ने मार्च 1994 में जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया था और इस साल 22 अगस्त को उन्हें जेल से रिहा किया गया था। उन्होंने पंजाब में वाघा-अटारी सीमा के रास्ते भारत में प्रवेश किया। 
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भारतीय उच्चायोग से अपील- कैदियों को घर लाने में करें मदद
उन्होंने पाकिस्तान स्थित भारतीय उच्चायोग से अपील की कि वह पड़ोसी देश की जेलों में बंद भारतीयों की दुर्दशा को समझें और उन्हें घर वापस लाने में ममद करें। यादव ने कहा कि जेल में बंद कई भारतीयों ने अपना मानसिक संतुलन खो दिया है और पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा अत्यधिक यातना के कारण उन्हें उनका नाम भी याद नहीं है। ऐसे लोग सजा पूरी होने के बाद भी जेल में बंद हैं। 

भारत सरकार हमें स्वीकार नहीं करती, तो रिहाई मुश्किल हो जाती है..
उन्होंने कहा, "जब भी हमने पाकिस्तान सरकार औरजेल अधिकारियों से हमें रिहा करने का अनुरोध किया, तो वे केवल एक ही बात कहते थे कि भारत सरकार हमें स्वीकार नहीं करती है। जब भारत सरकार हमें स्वीकार नहीं करती है, तो रिहाई मुश्किल हो जाती है।"

यातना के कारण अपना नाम तक याद नहीं रख पाते कैदी
शहर के चांदखेड़ा इलाके में अपनी बहने के आवास पर पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने पाकिस्तान की जेलों में बंद भारतीयों की दुर्दशा के बारे में बात की। यादव ने कहा कि कई कैदी वहां के अधिकारियों के हाथों लंबी कैद और यातना के कारण असमान्य व्यवहार दिखाते हैं और उन्हें अपना नाम या पता याद रखने में कठिनाई होती है।

यादव ने कहा, "जब उन्हें पकड़ा जाता है तो प्रताड़ित किया जाता है, उनका जीवन बर्बाद हो जाता है। वे कुछ भी याद नहीं कर पाते हैं, यहां तक कि अपना नाम भी। वे अपना नाम भूल गए होंगे, लेकिन वे सभी भारतीय हैं और यहां की सरकार को उन्हें वापस लाने में मदद करनी चाहिए।"

भारतीय कैदियों के पास आधार कार्ड और पासपोर्ट
उन्होंने बबलू राम नाम के एक भारतीय कैदी के बारे में बात करते हुए कहा कि उनके पास उनका आधार कार्ड है। एक या दो भारतीयों के पास उनके पासपोर्ट भी थे। उन्होंने कहा, "भारत सरकार उनकी रिहाई की मांग करे क्योंकि वे देश के काम के लिए देशभक्ति के लिए वहां गए थे।"

'पाकिस्तानी कैदियों के बदले भारतीयों को रिहा करना चाहिए'
यादव ने कहा कि वह भाग्यशाली हैं कि उनके भाई और बहन घर वापस आने का इंतजार कर रहे थे। उन्होंने कहा, "मैं चाहता हूं कि वहां बंद सभी भारतीय कैदियों को अपने परिवार के सदस्यों के साथ फिर से मिलने की वहीं खुशी मिले जो मुझे आज मिली है। भारत सरकार को यहां जेल में बंद पाकिस्तानी कैदियों को पाकिस्तान में बंद भारतीयों के बदले रिहा करना चाहिए।"

'मैं अपने भाइयों और बहन पर कब तक निर्भर रहूंगा'
यादव ने आगे कहा कि उन्होंने अपना पूरा जीवन देश के लिए लगा दिया, लेकिन बदले में कुछ नहीं मिला। उन्होंने कहा, "मैं कब तक अपने भाइयों और बहन पर निर्भर रहूंगा? मैं सरकार से मेरे पुनर्वास में मदद करने की अपील करता हूं। यहां तक कि मेरे शरीर पर जो कमीज है, वह पाकिस्तान की है, मेरे पास अपने कपड़े भी नहीं हैं।"

कुलदीप यादव की बहन ने क्या कहा?
उनकी बहन रेखा यादव ने कहा कि वह एक दिन अपने भाई को देखने के लिए आश्वस्त थीं। उन्होंने कहा, "मुझे भगवान पर पूरा भरोसा था कि मेरा भाई घर लौट आएगा। आज मैं बहुत खुश हूं। मैंने उनके हाथ पर राखी बांधी और मैं बहुत खुश हूं। मुझे मेरा भाई एक लंबी तपस्या के बाद मिला है।"

रेखा यादव ने कहा कि उन्होंने और उनके बाई ने वर्षों से पत्रों का आदान-प्रदान किया, जिनमें से कुछ ही जेल में उनके पास पहुंचे, लेकिन कई पत्र नहीं पहुंचे। उन्होंने कहा, "पिछले कई सालों से पत्रों का आदान-प्रदान भी बंद हो गया था। हमें केवल उम्मीद थी कि सरकार हारे लिए कुछ करेगी।"

इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग ने यादव के परिवार के सदस्यों को 1 फरवरी 2007 को एक पत्र के माध्यम से सूचित किया था कि उन्हें लाहौर की कोट लखपत जेल में रखा गया है। 

पाकिस्तानी अधिकारियों ने तीन साल तक हिरासत में रखा
बाद के एक पत्र में यादव ने खुलासा किया था कि उन्हें 23 मार्च 1994 को पाकिस्तान के अधिकारियों ने पकड़ा था और तीन साल तक हिरासत में रखा था। उसके बाद एक सैन्य अदालत ने उन्हें जासूसी के आरोप में 25 साल जेल की सजा सुनाई और उन्हें 1996 में कोट लखपत जेल में स्थानांतरित कर दिया गया। 


गुजरात विश्वविद्यालय कानून स्नातक हैं कुलदीप यादव
यादव ने 1989 में यह कहते हुए घर छोड़ दिया था कि वह नई दिल्ली में नौकरी के लिए जा रहे हैं, लेकिन उन्होंने रोजगार की प्रकृति का उल्लेख नहीं किया था। बाद में परिवार का गुजरात विश्वविद्यालय से कानून स्नातक यादव से संपर्क टूट गया था। 
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