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गुजरात की दिवाली पत्रिका में बदलाव: वीएचपी ने जताई आपत्ति, हटी अजीज टंकारवी की कविता; क्यों मचा था बवाल?
Mon, 26 Oct 2026 08:45 AM IST
देवेश त्रिपाठी
पीटीआई, अहमदाबाद
पीटीआई, अहमदाबाद
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Mon, 26 Oct 2026 08:45 AM IST
सार
गुजरात सरकार की वार्षिक दिवाली पत्रिका के ऑनलाइन संस्करण में एक कविता को लेकर विवाद खड़ा हो गया। विश्व हिंदू परिषद ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को पत्र लिखकर कवि अजीज टंकारवी की रचना हटाने और इसे मंजूरी देने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की थी।
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वीएचपी की आपत्ति के बाद गुजरात की दिवाली पत्रिका में बदलाव
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
गुजरात सरकार ने अपनी वार्षिक दिवाली पत्रिका के ऑनलाइन संस्करण से एक कविता हटा दी है। विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने आरोप लगाया था कि कविता में भगवान राम और भक्ति संत मीराबाई को लेकर "आपत्तिजनक" संदर्भ दिए गए हैं। वीएचपी के एक नेता ने यह जानकारी दी।
कवि अजीज टंकारवी की इस कविता को राज्य के सूचना एवं प्रसारण विभाग की ओर से हर साल दिवाली पर प्रकाशित होने वाली पत्रिका 'गुजरात दीपोत्सवी अंक' के ऑनलाइन संस्करण से हटा दिया गया है। इसकी जगह कवि प्रकाश 'जलाल' की कविता 'जोइए' को शामिल किया गया है।
वीएचपी ने अधिकारियों पर की सख्त कार्रवाई की मांग
वीएचपी ने 23 अक्तूबर को मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को पत्र लिखकर कविता को तुरंत हटाने की मांग की थी। संगठन ने इसके लेखक और कविता को मंजूरी देने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की भी मांग की थी। गुजरात वीएचपी के प्रवक्ता हितेंद्रसिंह राजपूत ने पुष्टि की कि टंकारवी की कविता को बदल दिया गया है।
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राजपूत ने कहा, "हमें खुशी है कि राज्य सरकार ने हमारी मांग पर तुरंत कार्रवाई की और दिवाली पत्रिका से उस विवादित कविता को हटा दिया।" वीएचपी की अहमदाबाद क्षेत्र इकाई के सचिव अश्विन पटेल ने अपने पत्र में इस साल की पत्रिका के पृष्ठ 389 पर प्रकाशित कविता पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि इसमें भगवान राम और मीराबाई को लेकर आपत्तिजनक संदर्भ हैं, जिससे हिंदुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।
गुजराती दीपोत्सवी अंक के ऑनलाइन संस्करण को लेकर मचा था बवाल
संगठन ने कहा कि सरकारी प्रकाशन में ऐसी कविता को शामिल करना विशेष रूप से चिंताजनक है, क्योंकि दिवाली भगवान राम के 14 साल का वनवास पूरा करने के बाद अयोध्या लौटने से जुड़ा त्योहार है। वीएचपी ने कविता को मंजूरी देने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की। संगठन ने यह भी कहा कि सरकारी प्रकाशनों में किसी लेखक की रचना शामिल करने से पहले उसके पुराने लेखन की समीक्षा की जानी चाहिए।
इसके अलावा, संगठन ने मांग की कि भविष्य में सरकारी प्रकाशनों में ऐसे लेखकों की रचनाएं शामिल की जाएं, जिनका देश, धर्म और संस्कृति के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण हो। इस मामले पर प्रतिक्रिया जानने के लिए सूचना एवं प्रसारण विभाग के सचिव विक्रांत पांडेय से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। 'गुजरात दीपोत्सवी अंक' का ऑनलाइन संस्करण गुजरात सरकार के सूचना आयुक्तालय की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है।
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कवि अजीज टंकारवी की इस कविता को राज्य के सूचना एवं प्रसारण विभाग की ओर से हर साल दिवाली पर प्रकाशित होने वाली पत्रिका 'गुजरात दीपोत्सवी अंक' के ऑनलाइन संस्करण से हटा दिया गया है। इसकी जगह कवि प्रकाश 'जलाल' की कविता 'जोइए' को शामिल किया गया है।
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वीएचपी ने अधिकारियों पर की सख्त कार्रवाई की मांग
वीएचपी ने 23 अक्तूबर को मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को पत्र लिखकर कविता को तुरंत हटाने की मांग की थी। संगठन ने इसके लेखक और कविता को मंजूरी देने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की भी मांग की थी। गुजरात वीएचपी के प्रवक्ता हितेंद्रसिंह राजपूत ने पुष्टि की कि टंकारवी की कविता को बदल दिया गया है।
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राजपूत ने कहा, "हमें खुशी है कि राज्य सरकार ने हमारी मांग पर तुरंत कार्रवाई की और दिवाली पत्रिका से उस विवादित कविता को हटा दिया।" वीएचपी की अहमदाबाद क्षेत्र इकाई के सचिव अश्विन पटेल ने अपने पत्र में इस साल की पत्रिका के पृष्ठ 389 पर प्रकाशित कविता पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि इसमें भगवान राम और मीराबाई को लेकर आपत्तिजनक संदर्भ हैं, जिससे हिंदुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।
गुजराती दीपोत्सवी अंक के ऑनलाइन संस्करण को लेकर मचा था बवाल
संगठन ने कहा कि सरकारी प्रकाशन में ऐसी कविता को शामिल करना विशेष रूप से चिंताजनक है, क्योंकि दिवाली भगवान राम के 14 साल का वनवास पूरा करने के बाद अयोध्या लौटने से जुड़ा त्योहार है। वीएचपी ने कविता को मंजूरी देने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की। संगठन ने यह भी कहा कि सरकारी प्रकाशनों में किसी लेखक की रचना शामिल करने से पहले उसके पुराने लेखन की समीक्षा की जानी चाहिए।
इसके अलावा, संगठन ने मांग की कि भविष्य में सरकारी प्रकाशनों में ऐसे लेखकों की रचनाएं शामिल की जाएं, जिनका देश, धर्म और संस्कृति के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण हो। इस मामले पर प्रतिक्रिया जानने के लिए सूचना एवं प्रसारण विभाग के सचिव विक्रांत पांडेय से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। 'गुजरात दीपोत्सवी अंक' का ऑनलाइन संस्करण गुजरात सरकार के सूचना आयुक्तालय की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है।