6.75 से 7.50 फीसदी के बीच रह सकती है विकास दर: सुब्रमणियन
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मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमणियन का कहना है कि नोटबंदी के दबाव और वैश्विक स्तर पर हो रहे घटनाक्रमों के कारण वर्ष 2017-18 के लिए आर्थिक विकास दर 6.75 फीसदी से 7.50 फीसदी के बीच रह सकती है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि नोटबंदी का असर अस्थायी है।
वित्तमंत्री अरुण जेटली द्वारा मंगलवार को संसद में आर्थिक सर्वेक्षण पेश करने के बाद संवाददाताओं से बातचीत में सुब्रमणियन ने कहा कि नोटबंदी का असर अभी बना रहेगा। हालांकि उन्होंने कहा कि अगले एक-दो महीने में नकदी की स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है और उसके बाद आर्थिक गतिविधियों में भी तेजी आयेगी। लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था पर वैश्विक स्तर पर हो रहे घटनाक्रम का दबाव भी बना हुआ है।
उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में हो रही बढ़ोतरी के साथ ही कुछ देशों के संरक्षणवादी नीतियों का भी यहां की विकास दर पर असर हो सकता है। संतोष की बात यह है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था में सुधार की उम्मीद दिख रही है। उन्होंने कहा कि यदि वैश्विक विकास दर में एक फीसदी की बढोतरी होती है तो भारत से होने वाले निर्यात में तीन फीसदी की बढ़ोतरी होती है। कहने का मतलब यह है कि वैश्विक स्तर पर सुधार होने पर भारतीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिलेगा।
अस्थायी है नोटबंदी का असर
नोटबंदी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इसका लक्ष्य कालेधन पर हमला करना था। हालांकि इसका असर अर्थव्यवस्था पर पड़ा है लेकिन यह असर अस्थायी है। इससे हुए फायदे का जिक्र करते हुए सुब्रमणियन ने कहा कि इससे मकानों की कीमतों में गिरावट आएगी और लोगों को सस्ते मकान मिलेंगे।
नोटबंदी का सकल घरेलू उत्पाद -जीडीपी- की वृद्धि दर पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव पर उन्होंने कहा कि यह असर अस्थायी रहेगा। मार्च 2017 के आखिरी में या अप्रैल 2017 तक बाजार में नकदी की आपूर्ति के सामान्य स्तर पर पहुंच जाने की संभावना है।
इसके बाद अर्थव्यवस्था में फिर से सामान्य स्थिति बहाल हो जाएगी। उनका कहना है कि नोटबंदी से डिजिटलीकरण में वृद्धि हुई है, अपेक्षाकृत ज्यादा कर अनुपालन हो रहा है और अचल संपत्ति की कीमतों में कमी हो रही है। इन सबके सम्मिलित असर से कर राजस्व के संग्रह और जीडीपी दर दोनों में बढ़ोतरी होने की संभावना है।