सेंसर के दायरे से परे डिजिटल मनोरंजन, जमकर परोसी जा रही अश्लीलता
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इसी के साथ एक नई शब्दावली ने जन्म लिया जिसे हम वेबीसोड (वेब एपिसोड) कहने लगे हैं। आल्ट बालाजी, हॉट स्टार, अमेजन वीडियो, सोनी लाइव, नेटफ्लिक्स, वूट-हूट जैसे ऑनलाइन स्ट्रीमिंग एप्स के बारे में आपने सुना होगा और हो सकता है कि आपके किसी परिचित के मोबाइल में यह डाउनलोड भी हों।
जिसे देखते हुए अक्सर युवा कहीं घर के किसी कोने में, बसों में, मेट्रो में और ट्रेन में दिख रहे हैं। ये वही एप है जिसने युवाओं को मोबाइल का एडिक्ट बना दिया है। लेकिन ये स्मार्ट मोबाइल की ही स्मार्टनेस ही है कि इसने कल तक छोटे पर्दे को डाउन मार्केट कहने वाले तक को सात इंच मोबाइल में पहुंचा दिया है।
इनमें टीवी सीरियल और फिल्में बनाने वाली बॉलीवुड की एकता कपूर से लेकर करन जौहर, मेघना गुलजार, दिबाकर बैनर्जी, अनुराग कश्यप, राम गोपाल वर्मा जैसे नाम प्रमुखता से लिए जा सकते हैं। वेब की दुनिया में बॉलीवुड की दुनिया के निर्माता-निर्देशक ही नहीं बल्कि अभिनेता और अभिनेत्रियों के बड़े नाम भी शामिल हैं। जिनमें इरफान खान, नवाजुद्दीन सिद्दीकी, राधिका आप्टे, ऋचा चड्ढा, मनीषा कोइराला प्रमुख हैं।
पिछले दिनों चार निर्माता निर्देशकों की फिल्म आई लस्ट स्टोरीज और एल्ट बालाजी की गंदी बात। जिस तरह से दोनों फिल्मों का नाम मिलता जुलता है उसी तरह फिल्म की स्टोरीज भी काफी मिलती जुलती है जिसने वेब सीरीज की दुनिया में विवाद को जन्म दे दिया है।
ये वेब की ही पॉपुलैरिटी है कि फिल्म डायरेक्टर एक दूसरे पर कांसेप्ट चोरी के आरोप भी लगाने लगे हैं। पिछले दिनों ट्विटर पर लस्ट स्टोरीज और गंदी बात के लिए ट्वीट वार देखने को मिली। जिसमें यह आरोप भी लगा कि नेटफ्लिक्स ने एल्ट बालाजी का कांसेप्ट चुराया है। गंदी बात 10 एपीसोड की ऐसी सीरीज है जिसे पहले एपीसोड से ही दर्शकों ने खूब पसंद किया, और जब फिल्म और सीरीज की तुलना की गई तो दोनों में काफी एकरूपता देखने को मिली।
जिसके बाद एल्ट बालाजी ने अपने ट्वीटर हैंडल पर लिखा तुम करो तो लस्ट स्टोरीज और हम करें तो गंदी बात। मजेदार बात यह है कि वेब की पूरी दुनिया महिला, अंडरवर्ल्ड, हिंसा, अपराध के इर्द गिर्द ही घूमती नजर आ रही है। लस्ट स्टोरीज में जहां चार अलग अलग कहानियां जहां शहर की महिला के ही चारों ओर घूम रही है वहीं गंदी बात में यह कहानी गांव की महिला और उनकी हकीकत दिखाने की कोशिश है।
चार निर्माता निर्देशकों करन जौहर, मेघना गुलजार, दिबाकर बनर्जी और अनुराग कश्यप की वेब फिल्म आई 'लस्ट स्टोरीज' को विदेशी कंपनी नेटफ्लिक्स ऐप पर लांच किया। वहीं बालाजी फिल्मस् की एकता कपूर ने अपने ही एप पर वेब सीरीज पेश की है।
फिल्म और सीरीज दोनों की बात करें तो दोनों ने जम कर अश्लीलता परोसी है। वेब की यह अकेली फिल्म नहीं है जो जमकर अश्लीलता परोस रही हैं और युवाओं को आकर्षित कर रहीं हैं। इससे पहेल भी हॉरर फिल्मों के निर्माता राम गोपाल वर्मा की गन एंड थाइज, टीवीएफ, बेक्ड, फ्लेम और लाइफ, इनसाइड एज, डैमेज्ड, माफिया, दीपिका डबल डी शामिल हैं..में इस तरह के कंटेट पेश करते रहे हैं।
सेंसर बोर्ड की कैंची से गुजर चुके ये निर्माता निर्देशक वेब सीरीज के जरिए धड़ल्ले से अपने संदेश लोगों तक पहुंचा रहे हैं। सेंसर बोर्ड की पैनी नजर को देखते हुए कई प्रोडयूसर और डायरेक्टर अब ऑनलाइन ट्रैफिक को ध्यान में रखकर वेब सीरीज बना रहे हैं। और बहुत कम समय में ज्यादा दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित किया है। इन्हें देखने के बाद दर्शकों का कहना है कि ऐसी वेब सीरीज सीधे सपाट शब्दों में दर्शकों तक अपना मैसेज पहुंचा रही हैं।
लेकिन इन सबके बीच कुछ ऐसे कलाकार भी हैं जो इस अश्लीलता को समाज के लिए खराब मानते हैं। राम गोपाल वर्मा ने अपनी फिल्म गन्स एंड थाइस वेब सीरीज के 6 मिनट का ट्रेलर अमिताभ बच्चन को दिखाया था तब वह इस ट्रेलर को देख कर अंचभित रह गए थे और उन्होंने वर्मा से सीधे तौर पर कहा था कि ये सीन सीरीज से हटाएं। अगर मान लिया जाए कि उन्होंने हटा दिया था तब भी उस सीरीज में कैंची चलाने वाले कई सीन मौजूद थे।
वेब की दुनिया के जानकार बताते हैं कि जब भी कोई नई चीज आती है तो उसे युवाओं तक पहुंचाने के लिए आकर्षक, भड़काऊ और अश्लील चीजें परोसते हैं। उदाहरण के तौर पर जब डॉट कॉम आया तो अधिकतर मीडिया हाउस ने पेज व्यूज और लोगों को आकर्षित करने के लिए अश्लीलता परोसी लेकिन जब बाजार में प्रतियोगिता शुरू हुई तो उन्होंने अपना रुख क्रिएटिव चीजों और पठनीय सामग्री की ओर मोड़ा। कुछ ऐसा ही हाल इन दिनों वेब सीरीज और मूवीज का भी है।
बड़े निर्माता निर्देशक से लेकर अभिनेता अभिनेत्री तक वेब पर काम कर रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण फिल्मों में कम लागत और हर क्लिक पर कमाई है। चूंकि फीचर फिल्मों में सेंसर बोर्ड की कैंची चलती है इसलिए ये बड़े कलाकार वेब पर जम कर प्रयोग कर रहे हैं। अश्लीलता भी जम कर परोस रहे हैं। चूंकि मोबाइल फोन व्यक्तिगत होता है, उसपर आप क्या देख-सुन और पढ़ रहे हैं उसपर नजर रखना बस की बात नहीं