8 नवंबर के बाद डिजिटल लेनदेन किया है, तो मिल सकता है ईनाम
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इलेक्ट्रॉनिक लेन-देन को बढ़ावा देने की योजना के तहत नीति आयोग ने डिजिटल माध्यम से भुगतान करने या लेने वाले व्यक्तियों के लिए साप्ताहिक और मासिक लक्की ड्रॉ के जरिये पुरस्कार देने का प्रस्ताव रखा है।
आयोग की विज्ञप्ति के अनुसार, नीति आयोग ने डिजिटल लेन-देन पर पुरस्कार के लिए भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) से एक नई योजना शुरू करने का अनुरोध किया है। सूत्रों के मुताबिक, डिजिटल भुगतान के सभी माध्यमों पर पुरस्कार के लिए सालाना 125 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव है।
जल्द ही इस योजना की रूपरेखा घोषित की जाएगी। इस योजना के तहत सभी दुकानदार और उपभोक्ता ईनाम के हकदार होंगे और गरीबों, मध्य वर्ग तथा छोटे कारोबारियों को पुरस्कृत करने पर अधिक जोर रहेगा। हालांकि जिन लोगों ने नोटबंदी की घोषणा यानी 8 नवंबर के बाद इलेक्ट्रॉनिक लेन-देन किया है, वही लोग इस योजना में शामिल किए जाएंगे।
विज्ञप्ति में कहा गया है कि इस योजना के तहत पुरस्कार राशि दो चरणों में दी जाएगी। साप्ताहिक लक्की ड्रॉ के तहत एक सप्ताह के अंदर किए गए लेन-देन की आईडी का ड्रा निकाला जाएगा और इसकी रूपरेखा को अंतिम रूप देने के बाद से ही पुरस्कारों की घोषणा हर हफ्ते की जाएगी। तिमाही ड्रा योजना के तहत आकर्षक पुरस्कार देने का प्रस्ताव रखा गया है। ड्रा की घोषणा एनपीसीआई द्वारा की जाएगी।
केंद्र, भारतीय रिजर्व बैंक और नाबार्ड देंगे 500 करोड़
पुरस्कार राशि के लिए केंद्र, भारतीय रिजर्व बैंक और नाबार्ड से 500 करोड़ रुपये जुटाए जाएंगे। देश में ऑनलाइन भुगतान, मोबाइल बैंकिंग, ई-वॉलेट, डेबिट कार्ड आदि से इलेक्ट्रॉनिक लेन-देन किया जा सकता है।
विज्ञप्ति में कहा गया है कि अफ्रीका में केन्या जैसा विकासशील देश जब ई-ट्रांजेक्शन कर सकता है तो भारत में तो 65 प्रतिशत आबादी 35 साल से कम उम्र के युवाओं की है और यहां यह व्यवस्था क्यों नहीं हो सकती। नीति आयोग की यह घोषणा वित्त मंत्रालय की ओर से ई-ट्रांजेक्शन पर कई प्रोत्साहन की घोषणा के एक दिन बाद ही की गई है।
देश के सभी नागरिक यदि संकल्प करें तो अरबों-खरबों के नोटों के नीचे दबा देश का अर्थतंत्र जल्द ही बाहर निकल आएगा और विकसित देशों में शुमार हो जाएगा। इस सपने को पूरा करने के लिए ई-पेमेंट को बढ़ावा देना, ई-वॉलट और मोबाइल बैंकिंग के प्रचलन को बढ़ाना, डिजिटल से समाज को डिजि-धन की ओर ले जाना अनिवार्य हो गया है।