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पीओके के शरणार्थियों के लिए 2000 करोड़ के पैकेज की तैयारी
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Updated Mon, 29 Aug 2016 04:54 AM IST
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- फोटो : file photo
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) और गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र का जिक्र छेड़ने के बाद पाकिस्तान को उसी के अंदाज में कूटनीतिक जवाब देने के लिए अब पीओके में शरणार्थियों के लिए 2000 करोड़ रुपये का पैकेज देने की तैयारी कर ली है। कश्मीर मामले पर अंतरराष्ट्रीयकरण की कोशिशों में जुटे पाकिस्तान के लिए मोदी सरकार का यह कदम बड़ा झटका साबित हो सकता है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि गृह मंत्रालय जल्द ही मंजूरी के लिए इस पैकेज का ब्योरा केंद्रीय कैबिनेट के समक्ष रख सकता है।
इस कूटनीतिक रणनीति को अमली जामा पहनाने केलिए सरकार ने देश में रह रहे ऐसे करीब 36,348 शरणार्थियों की पहचान भी कर ली है। पैकेज संबंधी मसौदा सितंबर महीने में केंद्रीय कैबिनेट के विचारार्थ पेश किए जाने की योजना है जिसकी मंजूरी के बाद प्रत्येक विस्थापित परिवार को 5.5 लाख रुपये दिए जाएंगे। अधिकारी ने बताया, ‘हमें उम्मीद है कि कैबिनेट से एक महीने के अंदर पैकेज को मंजूरी मिल जाएगी और लाभार्थियों में फंड बांट दिया जाएगा।’
ये सभी शरणार्थी पश्चिमी पाकिस्तान, खासकर ज्यादातर पीओके के हैं जो जम्मू, कठुआ और राजौरी जिलों के विभिन्न हिस्सों में बस गए हैं। हालांकि जम्मू-कश्मीर के संविधान की शर्तों के मुताबिक, ये सभी राज्य के स्थायी निवासी नहीं हो सकते। इसके अलावा सरकार बेंगलुरू में होने वाले प्रवासी भारतीय दिवस में पीओके के प्रतिनिधियों को आमंत्रित करने का मन बना रही है। विदेश मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक इस फैसले पर भी लगभग सहमति बन चुकी है।
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इस कूटनीतिक रणनीति को अमली जामा पहनाने केलिए सरकार ने देश में रह रहे ऐसे करीब 36,348 शरणार्थियों की पहचान भी कर ली है। पैकेज संबंधी मसौदा सितंबर महीने में केंद्रीय कैबिनेट के विचारार्थ पेश किए जाने की योजना है जिसकी मंजूरी के बाद प्रत्येक विस्थापित परिवार को 5.5 लाख रुपये दिए जाएंगे। अधिकारी ने बताया, ‘हमें उम्मीद है कि कैबिनेट से एक महीने के अंदर पैकेज को मंजूरी मिल जाएगी और लाभार्थियों में फंड बांट दिया जाएगा।’
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ये सभी शरणार्थी पश्चिमी पाकिस्तान, खासकर ज्यादातर पीओके के हैं जो जम्मू, कठुआ और राजौरी जिलों के विभिन्न हिस्सों में बस गए हैं। हालांकि जम्मू-कश्मीर के संविधान की शर्तों के मुताबिक, ये सभी राज्य के स्थायी निवासी नहीं हो सकते। इसके अलावा सरकार बेंगलुरू में होने वाले प्रवासी भारतीय दिवस में पीओके के प्रतिनिधियों को आमंत्रित करने का मन बना रही है। विदेश मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक इस फैसले पर भी लगभग सहमति बन चुकी है।
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प्रवासी भारतीय दिवस में पीओके के प्रतिनिधियों को बुलाने की है योजना
कश्मीर मामले में पाकिस्तान को उसके ही घर में घेरने की कूटनीतिक रणनीति के तहत भारत अब उसकी दुखती रग पर और मजबूती से हाथ रखने की तैयारी में हैं। गृह मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक देश के बंटवारे, वर्ष 1965 और 1971 के युद्ध के दौरान पीओके, गिलगित-बाल्टिस्तान से विस्थापितों के लिए सरकार ने 2000 करोड़ के पैकेज की रूपरेखा तैयार कर ली है।
ये सभी विस्थापित लोकसभा चुनाव में तो मतदान कर सकते हैं लेकिन जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में उन्हें वोट देने का अधिकार नहीं है। केंद्र सरकार अब विधानसभा चुनाव में भी उन्हें मताधिकार दिलाने के लिए भी राज्य सरकार को राजी करने में जुटी है। इसके अलावा प्रवासी दिवस पर पीओके के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किए जाने पर सरकार में मंथन का दौर पूरा हो गया है।
गौरतलब है कि पीओके और बलूचिस्तान में मानवाधिकारों के उल्लंघन संबंधी घटना का प्रधानमंत्री की ओर से सर्वदलीय बैठक के बाद स्वतंत्रता दिवस के भाषण में उल्लेख के बाद से ही सरकार इस मुद्दे पर पाकिस्तान को घेरने की लगातार मजबूत रणनीति तैयार कर रही है।
ये सभी विस्थापित लोकसभा चुनाव में तो मतदान कर सकते हैं लेकिन जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में उन्हें वोट देने का अधिकार नहीं है। केंद्र सरकार अब विधानसभा चुनाव में भी उन्हें मताधिकार दिलाने के लिए भी राज्य सरकार को राजी करने में जुटी है। इसके अलावा प्रवासी दिवस पर पीओके के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किए जाने पर सरकार में मंथन का दौर पूरा हो गया है।
गौरतलब है कि पीओके और बलूचिस्तान में मानवाधिकारों के उल्लंघन संबंधी घटना का प्रधानमंत्री की ओर से सर्वदलीय बैठक के बाद स्वतंत्रता दिवस के भाषण में उल्लेख के बाद से ही सरकार इस मुद्दे पर पाकिस्तान को घेरने की लगातार मजबूत रणनीति तैयार कर रही है।