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Finance Ministry: अब व्यापारियों को मिलेगी राहत, सरकार ने कस्टम आकलन की समय सीमा तय करने का प्रस्ताव रखा
Sun, 02 Feb 2025 10:40 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: पवन पांडेय
Updated Sun, 02 Feb 2025 10:40 PM IST
सार
वित्त मंत्रालय ने बजट में कहा कि अब आयात और निर्यात खेपों के अनंतिम आकलन को दो साल के भीतर पूरा करना अनिवार्य होगा, जिसे एक साल और बढ़ाया जा सकता है। अभी तक 1962 के कस्टम कानून में इस प्रक्रिया के लिए कोई निश्चित समय सीमा नहीं थी, जिससे कारोबारियों को देरी और असमंजस का सामना करना पड़ता था।
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वित्त मंत्रालय (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : X / @DDNewslive
विस्तार
सरकार ने व्यापारियों की अनिश्चितता और लागत को कम करने के लिए कस्टम मूल्यांकन की प्रक्रिया को तय समय में पूरा करने का प्रस्ताव रखा है। वित्त मंत्रालय ने बजट में कहा कि अब आयात और निर्यात खेपों के अनंतिम आकलन को दो साल के भीतर पूरा करना अनिवार्य होगा, जिसे एक साल और बढ़ाया जा सकता है। अभी तक 1962 के कस्टम कानून में इस प्रक्रिया के लिए कोई निश्चित समय सीमा नहीं थी, जिससे कारोबारियों को देरी और असमंजस का सामना करना पड़ता था।
इस नए नियम से क्या बदलेगा?
दो साल की समय सीमा: अनंतिम आकलन को अब दो साल में पूरा करना अनिवार्य होगा, जिसे ज़रूरत पड़ने पर एक साल और बढ़ाया जा सकता है।
पुराने मामलों पर भी लागू होगा नियम: जो मामले पहले से लंबित हैं, उनके लिए समय सीमा 2025 के वित्त विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने की तारीख से गिनी जाएगी।
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन के डायरेक्टर जनरल अजय सहाय ने इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि इससे व्यापारियों को वित्तीय योजना बनाने में आसानी होगी और उनका नकदी प्रवाह बेहतर होगा।
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नए नियमों से कारोबारियों को क्या फायदा होगा?
अस्पष्टता खत्म होगी – व्यापारियों को पहले से पता होगा कि उनके मामले का निपटारा अधिकतम तीन साल में हो जाएगा।
तेजी से रिफंड मिलेगा – मूल्यांकन जल्दी पूरा होने से व्यापारियों को रिफंड में देरी नहीं होगी।
अंतरराष्ट्रीय मानकों के करीब पहुंचेगा भारत – इस फैसले से भारत में व्यापार करना आसान होगा और विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने में मदद मिलेगी।
हस्तशिल्प निर्यातकों को बड़ी राहत
सरकार ने कारोबारियों को स्वेच्छा से कस्टम ड्यूटी और ब्याज भरने का विकल्प दिया है, जिससे उन्हें जुर्माने से बचने का मौका मिलेगा। हालांकि, यह सुविधा तब नहीं मिलेगी जब पहले से ऑडिट या जांच शुरू हो चुकी हो। सरकार ने हस्तशिल्प निर्यातकों को राहत देते हुए ड्यूटी-फ्री कच्चे माल से बने उत्पादों को निर्यात करने की समय सीमा 6 महीने से बढ़ाकर 1 साल कर दी है, जिसे 3 महीने और बढ़ाया जा सकता है। इसके साथ ही आयात नियमों में ढील दी गई है, जिसमें आयात किए गए कच्चे माल के उपयोग की समय सीमा अब 6 महीने से बढ़ाकर 1 साल कर दी गई है। वहीं आयातकों को अब हर महीने की बजाय तिमाही विवरण देना होगा, जिससे अनुपालन आसान होगा। सरकार का यह कदम भारत के व्यापार को सरल और सुगम बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव ला सकता है। इससे न केवल निर्यातकों और आयातकों को राहत मिलेगी, बल्कि भारत की व्यापार सुगमता रैंकिंग में भी सुधार हो सकता है।
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इस नए नियम से क्या बदलेगा?
दो साल की समय सीमा: अनंतिम आकलन को अब दो साल में पूरा करना अनिवार्य होगा, जिसे ज़रूरत पड़ने पर एक साल और बढ़ाया जा सकता है।
पुराने मामलों पर भी लागू होगा नियम: जो मामले पहले से लंबित हैं, उनके लिए समय सीमा 2025 के वित्त विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने की तारीख से गिनी जाएगी।
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फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन के डायरेक्टर जनरल अजय सहाय ने इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि इससे व्यापारियों को वित्तीय योजना बनाने में आसानी होगी और उनका नकदी प्रवाह बेहतर होगा।
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नए नियमों से कारोबारियों को क्या फायदा होगा?
अस्पष्टता खत्म होगी – व्यापारियों को पहले से पता होगा कि उनके मामले का निपटारा अधिकतम तीन साल में हो जाएगा।
तेजी से रिफंड मिलेगा – मूल्यांकन जल्दी पूरा होने से व्यापारियों को रिफंड में देरी नहीं होगी।
अंतरराष्ट्रीय मानकों के करीब पहुंचेगा भारत – इस फैसले से भारत में व्यापार करना आसान होगा और विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने में मदद मिलेगी।
हस्तशिल्प निर्यातकों को बड़ी राहत
सरकार ने कारोबारियों को स्वेच्छा से कस्टम ड्यूटी और ब्याज भरने का विकल्प दिया है, जिससे उन्हें जुर्माने से बचने का मौका मिलेगा। हालांकि, यह सुविधा तब नहीं मिलेगी जब पहले से ऑडिट या जांच शुरू हो चुकी हो। सरकार ने हस्तशिल्प निर्यातकों को राहत देते हुए ड्यूटी-फ्री कच्चे माल से बने उत्पादों को निर्यात करने की समय सीमा 6 महीने से बढ़ाकर 1 साल कर दी है, जिसे 3 महीने और बढ़ाया जा सकता है। इसके साथ ही आयात नियमों में ढील दी गई है, जिसमें आयात किए गए कच्चे माल के उपयोग की समय सीमा अब 6 महीने से बढ़ाकर 1 साल कर दी गई है। वहीं आयातकों को अब हर महीने की बजाय तिमाही विवरण देना होगा, जिससे अनुपालन आसान होगा। सरकार का यह कदम भारत के व्यापार को सरल और सुगम बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव ला सकता है। इससे न केवल निर्यातकों और आयातकों को राहत मिलेगी, बल्कि भारत की व्यापार सुगमता रैंकिंग में भी सुधार हो सकता है।