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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद बोले: हिंदू मंदिरों के प्रबंधन में दखल न दे सरकार, देखरेख का जिम्मा धर्माचार्यों का
Wed, 25 Sep 2024 10:03 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गंगटोक।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गंगटोक।
Published by: निर्मल कांत
Updated Wed, 25 Sep 2024 10:03 PM IST
सार
Sikkim: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि एक सरकार जो धर्म निरपेक्षता की शपथ लेकर आई है, कैसे हिंदू धार्मिक स्थलों के प्रबंधन को अपने नियंत्रण में ले सकती है? लड्डू विवाद के बाद यह काम धर्माचार्यों के लिए छोड़ देना चाहिए।
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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती
- फोटो : पीटीआई (फाइल)
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विस्तार
ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बुधवार को केंद्र और राज्य सरकारों से अनुरोध किया कि वे देशभर के हिंदू मंदिरों के प्रबंधन और धार्मिक मामलों में दखल न दें। उन्होंने कहा कि धर्माचार्यों को सभी मंदिरों की गतिविधियों की स्वतंत्रता से देखरेख करने दी जानी चाहिए। पत्रकारों से बात करते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि सरकारों को हिंदू मंदिरों के प्रबंधन और धार्मिक मामलों जैसे भोग, पूजा और उत्सव आदि में हस्तक्षेप करने से बचना चाहिए।
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उन्होंने आंध्र प्रदेश के तिरुपति बालाजी मंदिर में मिलावटी घी के लड्डू पर विवाद को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा, ये हो क्या रहा है? उन्होंने तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) के नेतृत्व वाली सरकार की ओर इशारा करते हुए कहा कि तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम के प्रबंधन में दखल देना उचित नहीं है।
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उन्होंने कहा कि ऐसी सरकारें जो धर्म निरपेक्षता की शपथ ले चुकी हैं, उनको हिंदू धार्मिक स्थलों के प्रबंधन में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, एक सरकार जो धर्म निरपेक्षता की शपथ लेकर आई है, कैसे हिंदू धार्मिक स्थलों के प्रबंधन को अपने नियंत्रण में ले सकती है? लड्डू विवाद के बाद यह काम धर्माचार्यों के लिए छोड़ देना चाहिए। यह बातें उन्होंने अपनी दो दिवसीय सिक्किम यात्रा के दौरान कहीं।
उन्होंने केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि गाय को एक जानवर के रूप में देखा जाता है, जबकि हिंदू श्रद्धालु इसे मां मानते हैं और इसकी पूजा करते हैं। उन्होंने कहा, इस सरकार के सत्ता में आने के बाद से गाय एक जानवर बन गई है। उन्होंने गायों की सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए देशभर में यात्रा करने का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह हिंदू संस्कृति और परंपरा का अभिन्न हिस्सा है, जिसके बारे में वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों को जागरूक रहना चाहिए।