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सरकार ने कॉलेजियम को वापस भेजीं दो हाईकोर्ट जजों के स्थानांतरण की फाइल

Tue, 28 Feb 2017 04:59 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 28 Feb 2017 04:59 PM IST
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government sent back  High Court judges transfer file to the collegium
सुप्रीम - फोटो : SELF

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा एक हाइकोर्ट चीफ जस्टिस और दो अन्य हाईकोर्ट जजों के स्थानांतरण की अनुशंसा की फाइल नरेंद्र मोदी सरकार ने कॉलेजियम को वापस भेज दी है।

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उत्तराखंड के चीफ जस्टिस के एम जोसफ को आंध्र प्रदेश और तेलंगाना का चीफ जस्टिस, दिल्ली हाईकोर्ट के जज वाल्मीकि मेहता को भी आंध्र प्रदेश और तेलंगाना हाईकोर्ट भेजने और गुजरात हाईकोर्ट के जस्टिस एम आर शाह को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट भेजने की अनुशंसा सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की तरफ से की गई थी।
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एक अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम त्रिपुरा के चीफ जस्टिस टी वैपेई को हैदराबाद हाइकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश बनाने की सिफारिश की थी। हालांकि वैपेई ने खुद भाषा की समस्या को लेकर हैदराबाद में अपने ट्रांसफर को लेकर अनिच्छा जाहिर की थी। उन्होंने कॉलेजियम से कहा कि वो नॉर्थ ईस्ट से हैं और इसी क्षेत्र में अपनी सेवाएं देना चाहते हैं। 21 सितंबर को उनकी नियुक्ति त्रिपुरा हाईकोर्ट में की गई थी। 

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क्या चाहती है केंद्र सरकार

government sent back  High Court judges transfer file to the collegium

पिछले साल तत्कालीन सीजेआई ठाकुर से मोदी सरकार ने आग्रह किया था कि कॉलेजियम की तरफ से जजों के तबादले की सिफारिशें रद्द कर दी जाएं। हालांकि टीएस ठाकुर ने केंद्र की किसी भी सिफारिश को स्वीकार नहीं किया।

2016 अगस्त में एक याचिका की सुनवाई के दौरान टीएस ठाकुर ने सरकार से जजों के ट्रांसफर की स्थिति की रिपोर्ट ही तलब की थी। इसमें उच्चतम न्यायालय ने जानना चाहा था कि जस्टिस मेहता जस्टिस शाह के तबादले से संबंधित सिफारिशों पर सरकार ने क्या किया। हालांकि सरकार की तरफ से इस मामले में कोई स्पष्टीकरण दाखिल नहीं किया गया।

जस्टिस जोसफ से संबंधित फाईल अभी भी केंद्र सरकार के पास लंबित हैं। सूत्रों ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि सरकार, जस्टिस मेहता और जस्टिस शाह का तबादला रद्द कराना चाहती है। जस्टिस मेहता को वह दिल्ली के आस-पास ही किसी उच्च न्यायालय में रखना चाहती है। वहीं दूसरी ओर जस्टिस शाह गुजरात हाईकोर्ट में दूसरे सबसे वरिष्ठ जज के तौर पर काम कर रहे हैं। सरकार को पता है कि मौजूदा चीफ जस्टिस के रिटायरमेंट के बाद शाह की गुजरात हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस के तौर पर नियुक्ति तय है। ऐसे में सरकार चाहती है कि तब उन्हें वहीं काम करने दिया जाए।

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