सरकार ने कॉलेजियम को वापस भेजीं दो हाईकोर्ट जजों के स्थानांतरण की फाइल
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सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा एक हाइकोर्ट चीफ जस्टिस और दो अन्य हाईकोर्ट जजों के स्थानांतरण की अनुशंसा की फाइल नरेंद्र मोदी सरकार ने कॉलेजियम को वापस भेज दी है।
उत्तराखंड के चीफ जस्टिस के एम जोसफ को आंध्र प्रदेश और तेलंगाना का चीफ जस्टिस, दिल्ली हाईकोर्ट के जज वाल्मीकि मेहता को भी आंध्र प्रदेश और तेलंगाना हाईकोर्ट भेजने और गुजरात हाईकोर्ट के जस्टिस एम आर शाह को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट भेजने की अनुशंसा सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की तरफ से की गई थी।
एक अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम त्रिपुरा के चीफ जस्टिस टी वैपेई को हैदराबाद हाइकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश बनाने की सिफारिश की थी। हालांकि वैपेई ने खुद भाषा की समस्या को लेकर हैदराबाद में अपने ट्रांसफर को लेकर अनिच्छा जाहिर की थी। उन्होंने कॉलेजियम से कहा कि वो नॉर्थ ईस्ट से हैं और इसी क्षेत्र में अपनी सेवाएं देना चाहते हैं। 21 सितंबर को उनकी नियुक्ति त्रिपुरा हाईकोर्ट में की गई थी।
क्या चाहती है केंद्र सरकार
पिछले साल तत्कालीन सीजेआई ठाकुर से मोदी सरकार ने आग्रह किया था कि कॉलेजियम की तरफ से जजों के तबादले की सिफारिशें रद्द कर दी जाएं। हालांकि टीएस ठाकुर ने केंद्र की किसी भी सिफारिश को स्वीकार नहीं किया।
2016 अगस्त में एक याचिका की सुनवाई के दौरान टीएस ठाकुर ने सरकार से जजों के ट्रांसफर की स्थिति की रिपोर्ट ही तलब की थी। इसमें उच्चतम न्यायालय ने जानना चाहा था कि जस्टिस मेहता जस्टिस शाह के तबादले से संबंधित सिफारिशों पर सरकार ने क्या किया। हालांकि सरकार की तरफ से इस मामले में कोई स्पष्टीकरण दाखिल नहीं किया गया।
जस्टिस जोसफ से संबंधित फाईल अभी भी केंद्र सरकार के पास लंबित हैं। सूत्रों ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि सरकार, जस्टिस मेहता और जस्टिस शाह का तबादला रद्द कराना चाहती है। जस्टिस मेहता को वह दिल्ली के आस-पास ही किसी उच्च न्यायालय में रखना चाहती है। वहीं दूसरी ओर जस्टिस शाह गुजरात हाईकोर्ट में दूसरे सबसे वरिष्ठ जज के तौर पर काम कर रहे हैं। सरकार को पता है कि मौजूदा चीफ जस्टिस के रिटायरमेंट के बाद शाह की गुजरात हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस के तौर पर नियुक्ति तय है। ऐसे में सरकार चाहती है कि तब उन्हें वहीं काम करने दिया जाए।