{"_id":"592e166c4f1c1b432bbdaa6b","slug":"government-remembers-rs-70-crore-aerostat","type":"story","status":"publish","title_hn":"सरकार को याद आया कबाड़ में पड़ा 70 करोड़ का ‘एयरोस्टेट’ ","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
सरकार को याद आया कबाड़ में पड़ा 70 करोड़ का ‘एयरोस्टेट’
हेमंत रस्तोगी/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 31 May 2017 06:33 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कॉमनवेल्थ गेम्स के उद्घाटन-समापन समारोह के आकर्षण का केंद्र और 70 करोड़ की भारी भरकम लागत के चलते विवादों में रहा एयरोस्टेट सरकार को याद आ गया है। जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम के तहखाने में साढ़े छह सालों से कबाड़ में पड़े इस विशालकाय गुब्बारे को एक बार फिर से खड़ा करने को कमर कसी गई है।
खेल मंत्रालय जल्द ही इस एयरोस्टेट को सप्लाई करने वाली कंपनी को बुलाकर इसके हालात का जायजा लेने जा रही है। मंत्रालय यह जानना चाहता है कि इसे जोड़कर फिर से खड़ा करने पर कितना खर्च आएगा।
सुरेश कलमाडी की ओर से इतनी बड़ी लागत पर आस्ट्रेलियाई कंपनी से इस एयरोस्टेट को खरीदे जाने के बाद उन पर चौतरफा हमला हुआ था। हालांकि यही एयरोस्टेट खेलों के उद्घाटन और समापन समारोह में आकर्षण का केंद्र बिंदु रहा।
विज्ञापन
एयरोस्टेट के चलते ही दुनिया भर में इस खेल के दोनों समारोहों को खासी सराहना मिली। समारोह के दौरान एयरोस्टेट पर दर्शाई गई झांकियों ने जबरदस्त सुर्खियां बटोरी थीं। लेकिन समारोह में वाहवाही लूटने के बाद यह एयरोस्टेट सफेद हाथी बन गया।
इसके कई टुकड़े कर कंटेनर में बंद करके नेहरू स्टेडियम के तहखाने में डाल दिया गया। तब से यह वहीं पड़ा जंक खा रहा है। हालांकि कॉमनवेल्थ खेलों के बाद इसे डीआरडीओ को देने का फैसला लिया गया, लेकिन उसने भी इसे लेने में रुचि नहीं दिखाई।खेल मंत्री विजय गोयल ने इस एयरोस्टेट के उपयोग की योजना बनाई है, जिस पर मंत्रालय ने काम शुरू कर दिया है।
नेहरू स्टेडियम या कनाट प्लेस में लगाने की योजना
मंत्रालय की योजना है कि एयरोस्टेट को ऐतिहासिक धरोहर के रूप में इस्तेमाल किया जाए। उसकी योजना है कि इसे या तो दिल्ली के दिल कनाट प्लेस के सेंट्रल पार्क में खड़ा किया या फिर इसे जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में ही लोगों के देखने के लिए लगाया जाए।
कनाट प्लेस में एयरोस्टेट को लगाकर इस पर कंपनियों को विज्ञापन दिखाने के लिए आमंत्रित किया जा सकता है। अगर इस पर एनडीएमसी से बात नहीं बनी तो फिर से इसे नेहरू स्टेडियम में ही स्थापित किया जाएगा।
विज्ञापन
खेल मंत्रालय जल्द ही इस एयरोस्टेट को सप्लाई करने वाली कंपनी को बुलाकर इसके हालात का जायजा लेने जा रही है। मंत्रालय यह जानना चाहता है कि इसे जोड़कर फिर से खड़ा करने पर कितना खर्च आएगा।
विज्ञापन
सुरेश कलमाडी की ओर से इतनी बड़ी लागत पर आस्ट्रेलियाई कंपनी से इस एयरोस्टेट को खरीदे जाने के बाद उन पर चौतरफा हमला हुआ था। हालांकि यही एयरोस्टेट खेलों के उद्घाटन और समापन समारोह में आकर्षण का केंद्र बिंदु रहा।
विज्ञापन
एयरोस्टेट के चलते ही दुनिया भर में इस खेल के दोनों समारोहों को खासी सराहना मिली। समारोह के दौरान एयरोस्टेट पर दर्शाई गई झांकियों ने जबरदस्त सुर्खियां बटोरी थीं। लेकिन समारोह में वाहवाही लूटने के बाद यह एयरोस्टेट सफेद हाथी बन गया।
इसके कई टुकड़े कर कंटेनर में बंद करके नेहरू स्टेडियम के तहखाने में डाल दिया गया। तब से यह वहीं पड़ा जंक खा रहा है। हालांकि कॉमनवेल्थ खेलों के बाद इसे डीआरडीओ को देने का फैसला लिया गया, लेकिन उसने भी इसे लेने में रुचि नहीं दिखाई।खेल मंत्री विजय गोयल ने इस एयरोस्टेट के उपयोग की योजना बनाई है, जिस पर मंत्रालय ने काम शुरू कर दिया है।
नेहरू स्टेडियम या कनाट प्लेस में लगाने की योजना
मंत्रालय की योजना है कि एयरोस्टेट को ऐतिहासिक धरोहर के रूप में इस्तेमाल किया जाए। उसकी योजना है कि इसे या तो दिल्ली के दिल कनाट प्लेस के सेंट्रल पार्क में खड़ा किया या फिर इसे जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में ही लोगों के देखने के लिए लगाया जाए।
कनाट प्लेस में एयरोस्टेट को लगाकर इस पर कंपनियों को विज्ञापन दिखाने के लिए आमंत्रित किया जा सकता है। अगर इस पर एनडीएमसी से बात नहीं बनी तो फिर से इसे नेहरू स्टेडियम में ही स्थापित किया जाएगा।