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सोशल मीडिया पर यौन अपराध से जुड़े कंटेंट की निगरानी के लिए विशेष एजेंसी बनाएगा केंद्र
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 02 Feb 2017 03:32 PM IST
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डेमो पिक
- फोटो : amar ujala
सोशल मीडिया पर यौन अपराध से जुड़े वीडियो को ब्लॉक करने और हटाने के लिए केंद्र सरकार एक विशेष जांच एजेंसी का गठन करेगी। केंद्र ने गुरुवार को इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी। इस एजेंसी के मार्फत सरकार की कोशिश साइबर क्राइम पर निगाह रखने की है।
जस्टिस एमबी लोकुर और यू ललित की बेंच ने सरकार से इस एजेंसी की संरचना और कार्य पद्धति अथवा इसके गठन को स्पष्ट करने के लिए कहा है। कोर्ट ने सरकार ने पूछा है कि यह एजेंसी सीबीआई के अधीन काम करेगी या गृह मंत्रालय के?
एडिशनल सॉलीसिटर जनरल मनिंदर सिंह ने कहा कि इस संबंध में बजट में फंड की घोषणा कर दी गई है ताकि एक विशेष केंद्रीय संस्था का गठन किया जा सके, जिसके जरिए सोशल मीडिया पर यौन अपराध से जुड़े वीडियो को ब्लॉक, अपलोड करने से रोकने और इसके सर्कुलेशन को रोका जा सके।
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दुनिया की कुछ बड़ी कंपनियों जैसे गूगल इंडिया, माइक्रोसॉफ्ट इंडिया, याहू इंडिया और फेसबुक ने कोर्ट के नोटिस के जवाब में कहा कि इन वीडियो को ऑटो ब्लॉक करना संभव नहीं है।
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जस्टिस एमबी लोकुर और यू ललित की बेंच ने सरकार से इस एजेंसी की संरचना और कार्य पद्धति अथवा इसके गठन को स्पष्ट करने के लिए कहा है। कोर्ट ने सरकार ने पूछा है कि यह एजेंसी सीबीआई के अधीन काम करेगी या गृह मंत्रालय के?
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एडिशनल सॉलीसिटर जनरल मनिंदर सिंह ने कहा कि इस संबंध में बजट में फंड की घोषणा कर दी गई है ताकि एक विशेष केंद्रीय संस्था का गठन किया जा सके, जिसके जरिए सोशल मीडिया पर यौन अपराध से जुड़े वीडियो को ब्लॉक, अपलोड करने से रोकने और इसके सर्कुलेशन को रोका जा सके।
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दुनिया की कुछ बड़ी कंपनियों जैसे गूगल इंडिया, माइक्रोसॉफ्ट इंडिया, याहू इंडिया और फेसबुक ने कोर्ट के नोटिस के जवाब में कहा कि इन वीडियो को ऑटो ब्लॉक करना संभव नहीं है।
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चीन में हो सकता है, तो भारत में क्यों नहीं?
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : SELF
इस मामले में कोर्ट का सहयोग कर रहीं एमिकस क्यूरी वकील अपर्णा भट्ट ने यौन अपराध से जुड़े वीडियो को हटाने के लिए कई सलाह दी और कहा कि 'एक बार पहचान हो जाने के बाद ऐसे कंटेंट को हटाया जाना चाहिए। इसके लिए एक ढांचा तैयार करने की जरूरत है ताकि सोशल साइट और दूसरे प्लेटफॉर्म पर अपलोडिंग को रोका जा सके।'
उन्होंने कहा, 'एक ढांचा बनाने की आवश्यकता है. जहां से लगातार निगरानी की जा सके और ऑनलाइन पोस्ट किए जाने वाले वीडियो की पहचान के लिए की-वर्ड डाले जाएं।'
पीठ ने कहा कि की-वर्ड को हिंदी या अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में भी रखा जाना चाहिए। ताकि कंटेंट की पहचान जल्दी और आसानी से हो सके। एक वकील ने सलाह दी कि अगर चीन में फेसबुक को रेगुलेट किया जा सकता है, तो भारत में ऐसा क्यों नहीं हो सकता और आपत्तिजनक कंटेंट पर भी निगरानी रखी जा सकती है।
इस मामले में अगली सुनवाई के लिए पीठ ने 21 फरवरी की तारीख तय की है।
उन्होंने कहा, 'एक ढांचा बनाने की आवश्यकता है. जहां से लगातार निगरानी की जा सके और ऑनलाइन पोस्ट किए जाने वाले वीडियो की पहचान के लिए की-वर्ड डाले जाएं।'
पीठ ने कहा कि की-वर्ड को हिंदी या अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में भी रखा जाना चाहिए। ताकि कंटेंट की पहचान जल्दी और आसानी से हो सके। एक वकील ने सलाह दी कि अगर चीन में फेसबुक को रेगुलेट किया जा सकता है, तो भारत में ऐसा क्यों नहीं हो सकता और आपत्तिजनक कंटेंट पर भी निगरानी रखी जा सकती है।
इस मामले में अगली सुनवाई के लिए पीठ ने 21 फरवरी की तारीख तय की है।